पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित एक सदी पुराने ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिराए जाने की घटना पर भारत ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर गहरा क्षोभ प्रकट करते हुए इसे अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थल के खिलाफ एक निंदनीय हरकत करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नारोवाल के सिराज गांव में हुए इस मंदिर ध्वंस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपने देश में अल्पसंख्यक समुदायों के पुराने पूजा स्थलों की रक्षा करने में पाकिस्तानी प्रशासन की लापरवाही और विफलता बेहद चिंताजनक पहलू है।
पाक प्रशासन की अकर्मण्यता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठते सवाल
भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की घटनाएं पड़ोसी देश में रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच लगातार बनी असुरक्षा की भावना और उनकी धार्मिक आजादी पर बढ़ते हमलों को उजागर करती हैं। किसी भी राष्ट्र के लिए अपने नागरिकों की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को सुरक्षित रखना उसका प्राथमिक संवैधानिक व नैतिक दायित्व होता है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह इस संवेदनशील मामले में बिना किसी विलंब के पारदर्शी और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया शुरू करे। इसके साथ ही, इस तोड़फोड़ के पीछे शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जानी चाहिए।
मंदिर के पुनर्निर्माण और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की मांग
भारत ने पाकिस्तान के सामने केवल जांच की मांग ही नहीं रखी, बल्कि यह भी कहा है कि ध्वस्त किए गए इस ऐतिहासिक मंदिर के तत्काल पुनर्स्थापन के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। नई दिल्ली ने इस्लामाबाद को स्मरण कराया कि अपने समस्त अल्पसंख्यक नागरिकों की जान-माल, सुरक्षा और कल्याण की रक्षा करना वहां के शासन व्यवस्था का मूलभूत कर्तव्य है। धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।
धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर वैश्विक मंच पर भारत का स्पष्ट संदेश
पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के उपासना स्थलों, ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक स्वतंत्रता पर लगातार खतरे के बादल मंडराते रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में भारत सरकार का यह बयान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली ने अपने संदेश में यह साफ कर दिया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण कोई वैकल्पिक विषय नहीं है, बल्कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसे पूरा करने में पाकिस्तान को अपनी प्रतिबद्धता दिखानी होगी।





















