राजस्थान के भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में नामांकन प्रक्रिया पूरी होते ही एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने स्थानीय चुनावी माहौल में हलचल पैदा कर दी है। भीलवाड़ा नगर निगम के कुल 70 वार्डों के लिए जारी चुनावी प्रक्रिया के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस केवल 53 वार्डों में ही अपने प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल समय पर जमा कराने में सफल हो सकी। इस प्रशासनिक और रणनीतिक चूक के कारण नगर निगम के 17 वार्डों में कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार अपनी पार्टी के सिंबल से पूरी तरह वंचित रह गए हैं। वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सभी 70 वार्डों में अपने अधिकृत प्रत्याशियों के सिंबल सफलता पूर्वक जमा करवा दिए हैं। नामांकन की अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद 17 वार्डों में सिंबल न जमा हो पाने का यह मुद्दा केवल चुनावी समीकरणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर सामने आई एक विवादित तस्वीर ने इस पूरे मामले में एक नया मोड़ ला दिया है। इस वायरल तस्वीर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेश सोनी पार्टी उम्मीदवारों के टिकट तैयार करते नजर आ रहे हैं, जबकि ठीक उनके पास भाजपा के वरिष्ठ नेता एलएन डाड बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। दोनों विरोधी दलों के दिग्गज नेताओं की एक ही स्थान पर मौजूदगी और एक साथ बैठने की घटना ने राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलों और चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
नामांकन प्रक्रिया और सिंबल जमा न होने का गणित
भीलवाड़ा नगर निगम क्षेत्र में कुल 70 वार्ड स्थापित हैं, जहाँ शहरी निकाय चुनाव के तहत जनप्रतिनिधियों का चुनाव होना है। चुनावी नियमों के अनुसार, किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रत्याशी को पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार माने जाने के लिए नियत समय सीमा के भीतर संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पार्टी का सिंबल (फार्म सीए और सीबी) जमा कराना अनिवार्य होता है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की चुनावी प्रबंधन टीम ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए सभी 70 वार्डों में अपने कार्यकर्ताओं के सिंबल फॉर्म सही समय पर जमा करा दिए। इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी की स्थानीय इकाई केवल 53 वार्डों में ही अपने आधिकारिक सिंबल जमा कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकी। इसके चलते शेष 17 वार्डों में स्थिति जटिल हो गई और वहाँ कांग्रेस का कोई भी अधिकृत प्रत्याशी पार्टी के चिन्ह पर चुनाव मैदान में नहीं उतर सका। इस स्थिति ने स्थानीय कांग्रेस संगठन के भीतर हलचल मचा दी है, क्योंकि 17 वार्डों में पार्टी चिन्ह का न होना सीधे तौर पर चुनावी दौड़ में भाजपा को शुरुआती बढ़त देने जैसा माना जा रहा है। नामांकनों की जांच और समय सीमा बीतने के बाद जब यह आंकड़ा सार्वजनिक हुआ, तो कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय राजनीति के जानकारों के बीच इस भारी चूक के कारणों को लेकर बहस शुरू हो गई।
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर और उठते सियासी सवाल
नामांकन प्रक्रिया के समापन के तुरंत बाद सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक तस्वीर तेज़ी से प्रसारित होने लगी। इस तस्वीर ने पूरे भीलवाड़ा के राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया। फोटो में दिखाई दे रहा है कि कांग्रेस नेता महेश सोनी एक मेज पर बैठकर कांग्रेस प्रत्याशियों के नामांकन और टिकट संबंधी कागजात लिख रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि उसी मेज के ठीक पास भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व सभापति एलएन डाड शांत भाव से बैठे हुए हैं। जैसे ही यह तस्वीर आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच पहुँची, सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार शुरू हो गई। लोग यह सवाल पूछने लगे कि जब कांग्रेस अपनी पार्टी के टिकट और सिंबल की गोपनीय प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही थी, उस समय प्रतिद्वंद्वी भाजपा के इतने वरिष्ठ नेता की वहाँ मौजूदगी का क्या औचित्य था। आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा चलने लगी कि क्या सिंबल न जमा हो पाने के पीछे कोई अंदरूनी साठगांठ थी या फिर यह महज एक प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा था। यद्यपि इस तस्वीर के आधार पर दोनों दलों के नेताओं के बीच किसी भी प्रकार के गुप्त समझौते या सीधी मिलीभगत का कोई आधिकारिक प्रमाण या प्रशासनिक पुष्टि सामने नहीं आई है, फिर भी चुनावी माहौल में इस तस्वीर ने विपक्ष को बैकफुट पर धकेल दिया है।
भाजपा समर्थित विधायक अशोक कोठारी का बयान और घटनाक्रम
मामले के लगातार तूल पकड़ने के बाद भाजपा समर्थित निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी ने वायरल तस्वीर को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एक सामान्य शिष्टाचार मुलाकात और एक विशुद्ध संयोग करार दिया है। अशोक कोठारी ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक नेताओं का आपस में मिलना, अभिवादन करना या एक स्थान पर बैठना एक आम प्रक्रिया है और इसे किसी भी तरह के राजनीतिक षड्यंत्र से जोड़कर देखना अनुचित है। उन्होंने बताया कि भाजपा के सिंबल प्रबंधन प्रभारी विपिन द्विवेदी, प्रशांत मेवाड़ा और संजय ने उन्हें उस निर्दिष्ट स्थान पर पहुँचने का आग्रह किया था। उनके बुलावे पर ही वे उस स्थान पर पहुँचे थे और वहाँ कुछ समय के लिए बैठे थे। विधायक कोठारी ने कहा कि जब वे वहाँ पहुँचे थे, तो उन्हें पूर्व से इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उस कमरे में कौन-कौन से लोग मौजूद हैं। वहाँ पहुँचने पर जब उन्हें यह अहसास हुआ कि कमरे में कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेता भी मौजूद हैं और अपनी प्रक्रिया में व्यस्त हैं, तो वे महज पांच मिनट के भीतर ही वहाँ से उठकर बाहर निकल गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संक्षिप्त उपस्थिति को किसी भी रूप में राजनीतिक घटनाक्रम या पर्दे के पीछे की सांठगांठ के तौर पर व्याख्यायित नहीं किया जाना चाहिए।
पूर्व जिलाध्यक्ष एलएन डाड की सफाई और वार्ड नंबर 28 का समीकरण
वायरल तस्वीर में महेश सोनी के साथ नजर आ रहे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व सभापति एलएन डाड ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एलएन डाड ने स्पष्ट किया कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं के बीच सामान्य बातचीत और मिलना-जुलना एक स्वाभाविक सामाजिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि महेश सोनी कांग्रेस पार्टी के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं और वे अपनी पार्टी के सांगठनिक हितों को ध्यान में रखकर ही कोई भी फैसला लेते हैं। डाड के अनुसार, इस सामान्य मुलाकात को राजनीतिक मोड़ देना सही नहीं है। हालांकि, एलएन डाड की इस सफाई के बावजूद स्थानीय स्तर पर चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस पूरे विवाद में भीलवाड़ा के वार्ड नंबर 28 की स्थिति लगातार केंद्र बिंदु बनी हुई है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में यह बात प्रमुखता से उठ रही है कि वार्ड नंबर 28 में भाजपा नेता एलएन डाड के पुत्र चुनाव मैदान में प्रत्याशी के रूप में खड़े हैं, जबकि इसी वार्ड में कांग्रेस का कोई भी अधिकृत प्रत्याशी चुनाव मैदान में मौजूद नहीं है। लोग इस स्थिति को वायरल तस्वीर और सिंबल न जमा होने की घटना से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इस स्थिति के पीछे किसी प्रत्यक्ष संबंध या व्यक्तिगत हस्तक्षेप की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रशासनिक अड़चनों की दलील और भाजपा का आधिकारिक पक्ष
सिंबल न जमा होने के इस बड़े विवाद पर कांग्रेस पार्टी की ओर से भी स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया है। कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व का कहना है कि पार्टी नगर निगम के सभी वार्डों में पूरी गंभीरता के साथ अपने अधिकृत प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर काम कर रही थी। प्रत्याशियों के चयन, नामांकन पत्र तैयार करने और सिंबल वितरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ रही थी। परंतु, नामांकन के अंतिम दौर में कुछ अपरिहार्य तकनीकी समस्याओं और प्रशासनिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पार्टी का दावा है कि इन तकनीकी अड़चनों और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण ही अंतिम समय में 17 वार्डों में सिंबल जमा कराने की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की जा सकी। कांग्रेस ने इन परिस्थितियों को ही सिंबल से वंचित रहने की मुख्य वजह बताया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस के आरोपों और वायरल तस्वीर से जुड़े दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि कांग्रेस के आंतरिक सांगठनिक मामलों, टिकट वितरण की अव्यवस्था या सिंबल जमा न हो पाने से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। भाजपा नेताओं का मानना है कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए इस तरह के संयोग को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल, 70 वार्डों में चुनावी मुकाबला औपचारिक रूप से शुरू हो चुका है, लेकिन 17 वार्डों में सिंबल का न होना और महेश सोनी व एलएन डाड की तस्वीर का विवाद भीलवाड़ा चुनाव का सबसे चर्चा का विषय बना हुआ है।




















