महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर और आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल जेनजी समिट' के दौरान अपनी कार्यशैली और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया। खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और खाद्य सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू कराने के लिए जाने जाने वाले तुकाराम मुंढे ने सार्वजनिक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। इस कार्यक्रम में बातचीत करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि वह अपने परिवार के साथ बाहर रेस्टोरेंट में खाना खाने से परहेज करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की जाने वाली छापेमारी की रणनीति और जांच के बुनियादी मानकों पर भी विस्तार से जानकारी दी।
रेस्टोरेंट में खाना न खाने के पीछे की वजह
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में कड़े फैसलों के लिए मशहूर तुकाराम मुंढे से जब समिट में उनके पारिवारिक जीवन और विभागीय कार्रवाइयों के प्रभाव पर सवाल पूछे गए, तो उन्होंने स्थिति को बेहद स्पष्ट रूप से सामने रखा। उनसे पूछा गया था कि क्या उनके घर में छापेमारी की कार्रवाइयों की चर्चा होती है और क्या कभी ऐसा हुआ है कि परिवार के किसी मनपसंद रेस्टोरेंट पर कार्रवाई के बाद वहां जाना बंद करना पड़ा हो। इस पर जवाब देते हुए कमिश्नर ने बताया कि उनका परिवार अब बाहर जाकर खाना खाने से बचता है और वे लोग बहुत कम बाहर निकलते हैं।
अपनी इस आदत का कारण बताते हुए आईएएस अधिकारी ने कहा कि उनके पास खाद्य पदार्थों और रेस्टोरेंटों के कामकाज से जुड़ी अंदरूनी जानकारियां होती हैं। आम लोगों की तुलना में विभागीय आंकड़ों और जमीनी हकीकत की अधिक जानकारी होने के कारण वे खान-पान की चीजों को लेकर काफी सतर्कता बरतते हैं। उनके इस बयान से स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर वे केवल प्रशासनिक स्तर पर ही सख्त नहीं हैं, बल्कि अपने निजी जीवन में भी सतर्कता के इसी पैमाने को लागू करते हैं।
छापेमारी का तरीका और कच्चे माल की जांच पर जोर
समिट के दौरान जब अधिकारियों की छापेमारी प्रक्रिया और मीडिया कैमरों की मौजूदगी को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या अब रेड की सूचना पहले ही सार्वजनिक हो जाती है और कैमरे अधिकारियों से पहले मौके पर पहुंच जाते हैं, तब तुकाराम मुंढे ने विभागीय कार्यप्रणाली के मूल सिद्धांतों को समझाया। उन्होंने बताया कि आधुनिक समय में भले ही तकनीक और मीडिया का असर बढ़ा हो, लेकिन अधिकारियों को हमेशा बुनियादी प्रक्रियाओं पर ध्यान देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
तुकाराम मुंढे ने बताया कि किसी भी रेस्टोरेंट या खाद्य निर्माण इकाई में गुणवत्ता की असली जांच तैयार भोजन से नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल से शुरू होती है। उनकी टीम को यह सख्त हिदायत दी गई है कि मौके पर पहुंचकर सबसे पहले उन कच्चे सामानों की गुणवत्ता की जांच की जाए जिनसे खाना पकाया जा रहा है। कच्ची सामग्रियों की स्थिति देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है।
खाद्य सुरक्षा कमिश्नर ने छापेमारी के क्रम को समझाते हुए स्पष्ट किया कि तैयार भोजन या खाद्य पदार्थों के नमूने सबसे आखिरी चरण में लिए जाते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य केवल तैयार भोजन का सैंपल एकत्र करना नहीं है, बल्कि भोजन तैयार करने की पूरी श्रृंखला और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गहन जांच करना है। प्रक्रिया की शुरुआत से ही मानकों का पालन सुनिश्चित कराकर ही मिलावट पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।



















