यूरोपीय यूनियन और चीन के बीच जारी आर्थिक और व्यापारिक खींचतान अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है। वैश्विक बाजारों पर इसके पड़ने वाले सम्भावित झटकों के बीच यूरोप ने चीन की व्यापारिक नीतियों और एकतरफा फायदों के खिलाफ अपना रुख पूरी तरह कड़ा कर लिया है। यूरोपीय यूनियन के ट्रेड कमिश्नर मारोश शेफचोविच ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि बीजिंग प्रशासन ने अक्टूबर तक व्यापार घाटे को नियंत्रित करने तथा यूरोपीय कंपनियों के लिए समान अवसर पैदा करने की दिशा में कोई ठोस नतीजे पेश नहीं किए, तो ब्रसेल्स कड़े रक्षात्मक और दंडात्मक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से यूरोप ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को बातचीत और कूटनीतिक रास्तों से सुलझाने का प्रयास किया है, लेकिन वर्तमान परिस्थिति यूरोपीय महाद्वीप की अपनी मूल औद्योगिक संरचना और विनिर्माण क्षेत्र के अस्तित्व से जुड़ी हुई है। इस पूरी डील की दिशा तय करने में आने वाले दो हफ्ते बेहद नाजुक और निर्णायक साबित होने वाले हैं।
अक्टूबर की डेडलाइन और बैठकों का भावी शेड्यूल
व्यापारिक मोर्चे पर जारी इस गतिरोध को सुलझाने या अंतिम निर्णय तक पहुंचाने के लिए ब्रसेल्स और बीजिंग के बीच कूटनीतिक बैठकों का एक व्यस्त कार्यक्रम तैयार किया गया है। तय योजना के अनुसार, सितंबर के मध्य में यूरोपीय संघ के ट्रेड कमिश्नर मारोश शेफचोविच और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वोनताओ के बीच एक अति महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इस वार्ता में व्यापार असंतुलन और बाजार पहुंच से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर प्राथमिक चर्चा होगी। इसके ठीक बाद, अक्टूबर महीने में मारोश शेफचोविच स्वयं चीन के आधिकारिक दौरे पर जाएंगे, जहां वे बीजिंग के उच्च अधिकारियों के साथ आमने सामने की वार्ता करेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण परिणति अक्टूबर के अंत में ब्रसेल्स में आयोजित होने वाले यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के विशेष शिखर सम्मेलन में देखने को मिलेगी। इस महासम्मेलन के एजेंडे में चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा और असंतुलित आर्थिक संबंध सबसे ऊपर रखे गए हैं। यूरोपीय संघ के अधिकारियों के अनुसार, ब्लॉक के सभी 27 सदस्य देश इस मुद्दे पर पूरी तरह एकमत और एकजुट हैं। यूरोप अब चीन से केवल मौखिक आश्वासनों और औपचारिक बयानों से संतुष्ट होने के मूड में नहीं है, बल्कि वह ठोस सबूत यानी 'प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट' चाहता है। यदि अक्टूबर की समयसीमा तक चीन अपनी नीतियों में स्पष्ट बदलाव का खाका पेश नहीं करता है, तो यूरोपीय संघ के राष्ट्राध्यक्ष कड़े व्यापारिक प्रतिबंध लागू करने के लिए मजबूत राजनीतिक सहमति बनाएंगे।
'सुपर पॉलिटिकल' मोड़ पर पहुंचा विवाद और उर्सुला वॉन डेर लेयेन की चेतावनी
यूरोपीय संघ के शीर्ष रणनीतिकारों का मानना है कि यह मामला अब केवल सामान्य आयात और निर्यात का कमर्शियल मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अत्यंत जटिल और 'सुपर पॉलिटिकल' मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी हाल ही में फ्रांस में आयोजित एक प्रमुख बिजनेस फोरम के दौरान चीन को कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि चीन के साथ मीठी-मीठी बातें करना और औपचारिक बैठकों का दौर जारी रखना केवल तब तक ही प्रासंगिक और सार्थक है, जब तक उनके कोई धरातलीय और मापने योग्य परिणाम निकलें।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्पष्ट किया कि यदि कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से बीजिंग अपनी बाजार विरोधी और अनुचित व्यापार नीतियों में सुधार नहीं करता है, तो यूरोपीय संघ अपने पास मौजूद सभी रक्षात्मक व्यापारिक हथियारों का खुलकर इस्तेमाल करेगा। हालांकि मारोश शेफचोविच ने उन विशिष्ट कदमों का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है जो यूरोप उठाने की योजना बना रहा है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि ब्रसेल्स एक विशेष 'डाइवर्सिफिकेशन इंस्ट्रूमेंट' को अंतिम रूप दे रहा है। इस नए तंत्र का मुख्य उद्देश्य अपनी महत्वपूर्ण और बुनियादी जरूरतों के लिए चीन पर यूरोप की एकतरफा आर्थिक निर्भरता की मजबूरी को हमेशा के लिए समाप्त करना है।
ऑटो, मेडिकल और कृषि सेक्टर में गहराता तनाव
यूरोपीय संघ के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उसके सभी 27 सदस्य देश इस समय चीन के साथ भारी और रिकॉर्ड व्यापार घाटे का सामना कर रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि यूरोपीय देश चीनी कारखानों में बने सामानों का भारी मात्रा में आयात तो कर रहे हैं, लेकिन जब यूरोपीय कंपनियों के उत्पादों को चीन में बेचने की बात आती है, तो बीजिंग का प्रशासन कई तरह की कड़ी रुकावटें और नियम खड़े कर देता है। हालांकि शेफचोविच ने स्वीकार किया है कि चीनी बाजार के दरवाजे यूरोपीय निर्यातकों के लिए रातोंरात पूरी तरह खुलवाना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है, फिर भी वे कुछ प्रमुख और संवेदनशील आर्थिक क्षेत्रों में तत्काल राहत की मांग कर रहे हैं।
विवाद के तीन सबसे प्रमुख केंद्र निम्नलिखित हैं
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग: चीन की सरकारी सब्सिडी के सहारे बेहद सस्ती दरों पर निर्मित इलेक्ट्रिक गाड़ियां यूरोपीय बाजार में भारी मात्रा में पहुंच रही हैं। इससे यूरोप की पारंपरिक और प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के अस्तित्व पर सीधा खतरा मंडराने लगा है।
- मेडिकल और हेल्थकेयर उपकरण: यूरोपीय कंपनियों को चीन के विशाल स्वास्थ्य और मेडिकल बाजार में सीधी और निष्पक्ष प्रवेश की अनुमति नहीं मिल रही है, जिसके चलते यूरोपीय मेडिकल डिवाइस निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- कृषि और खाद्य उत्पाद: यूरोप के डेयरी, कृषि और फार्म उत्पादों पर चीन ने अत्यधिक कड़े और जटिल नियम थोप रखे हैं, जिससे यूरोपीय किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को अपने उत्पाद चीन भेजने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
बीजिंग के साथ बढ़ता तनाव और यूरोप की जांच कार्रवाई
पिछले कुछ महीनों के दौरान यूरोपीय संघ और चीन के बीच राजनयिक व आर्थिक संबंध काफी तनावपूर्ण दौर से गुजरे हैं। यूरोपीय संघ ने अपने बाजार में चीनी कंपनियों की सीधी पहुंच पर कई तरह की सीमाएं लगाना शुरू कर दिया है और उनकी संदिग्ध गतिविधियों तथा सब्सिडी की व्यापक जांच शुरू की है। इसके जवाब में चीन ने भी यूरोपीय सामानों के आयात पर जवाबी प्रतिबंध लगाने और दंडात्मक कदम उठाने की धमकियां दी हैं।
हाल के दिनों में यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल गहन द्विपक्षीय बातचीत के लिए बीजिंग पहुंचा था। यह दल वार्ता प्रक्रिया पूरी कर वापस ब्रसेल्स लौट रहा है और जल्द ही अपनी विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपेगा। इसके अतिरिक्त, यूरोपीय कमीशन ने ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के दौरान भी कई स्तरों पर चीनी उत्पादों के खिलाफ औपचारिक व्यापारिक जांच शुरू की थी। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दोहराया है कि चीनी कंपनियों द्वारा बाजार नियमों के उल्लंघन और अनुचित व्यापार पद्धतियों को रोकने के लिए इन चल रही जांचों की गति को और अधिक तेज किया जा रहा है।
बैकफुट पर आने से इनकार और वैश्विक आर्थिक असर
यूरोपीय संघ का नेतृत्व अब इस कड़वे सच को अच्छी तरह समझ चुका है कि चीन की अनुचित व्यापार पद्धतियों के कारण यूरोप की अपनी कई प्रमुख इंडस्ट्रीज और विनिर्माण इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच रही हैं। यूरोपीय रणनीतिकारों का मानना है कि यदि इस मोड़ पर यूरोपीय संघ ने अपनी शर्तों पर चीन को झुकने के लिए मजबूर नहीं किया, तो आने वाले समय में पूरा यूरोपीय महाद्वीप अपनी आवश्यक आपूर्ति और औद्योगिक अस्तित्व के लिए चीन का पूरी तरह मोहताज बनकर रह जाएगा।
मारोश शेफचोविच ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा कि इस समय दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की गति और आक्रामकता ऐतिहासिक स्तर पर है। उन्होंने रेखांकित किया कि यूरोपीय अधिकारियों ने चीनी समकक्षों से पहले कभी इतनी बार, इतनी आक्रामकता और इतने स्पष्ट रुख के साथ बातचीत नहीं की है। अब संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चीन अक्टूबर की अंतिम डेडलाइन खत्म होने से पहले व्यापार असंतुलन दूर करने पर सहमत होता है, या फिर दुनिया को एक और विनाशकारी वैश्विक ट्रेड वॉर का सामना करना पड़ेगा।



















