भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगभग 75 मिनट लंबा विस्तृत भाषण दिया। यह संबोधन महज किसी सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं था, बल्कि वर्ष 2047 तक भारत को एक पूरी तरह से विकसित, आत्मनिर्भर और मजबूत राष्ट्र बनाने की दिशा में तय की गई विस्तृत रणनीति थी। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने सीमा पार से उत्पन्न चुनौतियों, तकनीकी स्वतंत्रता, युवा शक्ति के विकास, महिला नेतृत्व, कृषि क्षेत्र के वैश्विक विस्तार और वैचारिक रुकावटों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। पूरे संबोधन का मूल ध्येय यह रहा कि वर्ष 2047 का भारत वैश्विक पटल पर एक निर्णय लेने वाली महाशक्ति के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे और अपनी हर जरूरत के लिए पूरी तरह आत्मविश्वासी तथा स्वावलंबी बने।
सीमा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर चीन को कड़ा संदेश
यद्यपि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में पड़ोसी देश चीन का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया, किंतु भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की सुरक्षा को लेकर उनका वक्तव्य अत्यंत स्पष्ट और दृढ़ था। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा तक जिन ताकतों ने भारत की संप्रभुता को चुनौती देने का प्रयास किया, भारतीय सशस्त्र बलों ने उन्हें उनकी ही भाषा में करारा उत्तर दिया है। सुरक्षा रणनीति को केवल सैन्य बल तक सीमित न रखते हुए प्रधानमंत्री ने इसे आर्थिक एवं औद्योगिक आत्मनिर्भरता से सीधे जोड़ा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत को सेमीकंडक्टर निर्माण, दुर्लभ खनिजों के खनन, परमाणु ऊर्जा और समुद्री संसाधनों के दोहन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाहरी देशों पर अपनी निर्भरता समाप्त करनी होगी। इसी रणनीति के अंतर्गत देश ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का एक विशाल लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता सुरक्षित हो सके।
आतंकवाद तथा आंतरिक सुरक्षा पर पाकिस्तान व नक्सलवाद को स्पष्ट चेतावनी
राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान और देश के भीतर सक्रिय नकारात्मक शक्तियों को भी कड़ा संकेत दिया। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए स्पष्ट किया कि आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दों पर भारत किसी भी प्रकार के समझौते के पक्ष में नहीं है। देश अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा और किसी भी दबाव के आगे पीछे नहीं हटेगा। आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि देश में सशस्त्र नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और सरकार की सुदृढ़ नीतियों के कारण हिंसा का दायरा काफी सिमट चुका है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने 'दिमागी नक्सल' शब्द का प्रयोग करते हुए देश की प्रगति में बाधा उत्पन्न करने वाली नकारात्मक सोच, वैचारिक विरोध और प्रगति विरोधी मानसिकता पर करारा हमला किया।
विकसित भारत 2047 के लिए शक्ति की सप्तधारा का खाका
संबोधन का सबसे मुख्य स्तंभ 'विकसित भारत@2047' का व्यापक विजन रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया कि अब छोटे लक्ष्य निर्धारित करने का समय समाप्त हो चुका है और भारत को बड़े सपने देखकर उन्हें साकार करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों का एक मॉडल प्रस्तुत किया, जिसे 'शक्ति की सप्तधारा' का नाम दिया गया। इस सप्तधारा में आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी तथा इनोवेशन, गतिशक्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा उत्पादन, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं। इस योजना का अंतिम उद्देश्य भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक विश्वसनीय और मजबूत केंद्र बनाना है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका निर्णायक हो सके।
युवाओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण और 1 लाख करोड़ का कोष
देश की युवा आबादी को विकसित भारत के निर्माण का सबसे बड़ा आधार और लाभार्थी बताते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं के उत्थान के लिए कई प्रमुख पहलों की घोषणा की। आधुनिक तकनीक के दौर में भारतीय युवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आने वाले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) में प्रशिक्षित करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1 लाख करोड़ रुपये के विशेष फंड का प्रावधान किया गया है। भाषण के दौरान देश में तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों द्वारा सैटेलाइट और रॉकेट लॉन्च करने की सफलताओं और डिजिटल इंडिया की ताकत का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की सहायता के लिए एक मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग नेटवर्क तैयार करने का भी संकल्प दोहराया गया, ताकि देश का युवा केवल नौकरी चाहने वाला न बनकर नए अवसर पैदा करने वाला बने।
महिला नेतृत्व और 6 करोड़ लखपति दीदी का नया लक्ष्य
संबोधन में नारी शक्ति के योगदान और उनके राजनीतिक तथा आर्थिक अधिकारों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रधानमंत्री ने देश के सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को शीघ्र लागू करने में सहयोग करें। उन्होंने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कहा कि श्रेय चाहे कोई भी ले ले, लेकिन माताओं और बहनों को उनका वैधानिक हक मिलना ही चाहिए। आर्थिक सशक्तीकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली 'लखपति दीदी' योजना के लक्ष्य को 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की घोषणा की। इसके साथ ही स्थानीय पंचायतों में महिलाओं के प्रभावी नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि नए भारत में महिलाओं की भूमिका केवल योजनाओं के लाभ प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे विकास की दिशा तय करेंगी।
किसानों का वैश्विक बाजार से जुड़ाव और राष्ट्रीय संकल्प
किसानों की प्रगति पर विचार व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय कृषि को अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि देश के अन्नदाताओं को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जाएगा ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके। खाद्य प्रसंस्करण और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया। संपूर्ण भाषण का सार प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की यात्रा अब रुकने वाली नहीं है और देश 2047 तक अपने प्रत्येक नागरिक के योगदान से एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और समर्थ राष्ट्र बनने के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेगा।



















