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80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार 13वां संबोधन, स्वदेशी तोपों की सलामी और 22 भाषाओं में लाइव अनुवाद बना खासभारत
15 अग॰ 2026, 11:16 am (2 घंटे पहले)· 0

80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लगातार 13वां संबोधन, स्वदेशी तोपों की सलामी और 22 भाषाओं में लाइव अनुवाद बना खास

भारत 15 अगस्त 2026 को आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित करते हुए स्वदेशी क्षमता, तकनीक और युवा शक्ति से 2047 तक विकसित भारत के संकल्प पर जोर दिया।

भारत शनिवार 15 अगस्त 2026 को अपनी स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ बेहद उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मना रहा है। देश के उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक हर कोने में तिरंगा पूरी शान के साथ लहरा रहा है। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अंत के बाद से 79 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पूरी होने का यह अवसर राष्ट्रीय पर्व के रूप में देशभर में मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर का मुख्य और भव्य समारोह राजधानी नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर पर आयोजित किया गया है। यहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और स्वतंत्रता दिवस पर लगातार 13वीं बार राष्ट्र के नाम अपना औपचारिक संबोधन दिया। इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह को विशेष रूप से 'युवा शक्ति फॉर विकसित भारत@2047' की प्रेरणादायी थीम पर केंद्रित किया गया है, जो देश के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती है।

लाल किले की प्राचीर से भव्य समारोह और 13वां ऐतिहासिक संबोधन

स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित यह समारोह ऐतिहासिक धरोहर, सैन्य गौरव और आधुनिक तकनीक का एक अनूठा संगम बनकर उभरा। मुख्य कार्यक्रम में ध्वजारोहण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सहायता कैप्टन सोनिया सिंह चौहान ने की। जैसे ही प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया, भारतीय वायुसेना के 2 MI-17 हेलीकॉप्टरों ने समारोह स्थल के ऊपर उड़ान भरते हुए उपस्थित जनसमूह पर फूलों की वर्षा की। लाल किले के प्रांगण में इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 5,000 विशेष अतिथि मौजूद रहे। इसके अलावा 2,500 से अधिक राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के कैडेट भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस पूरे राष्ट्रीय समारोह का सजीव प्रसारण सुबह 6:30 बजे से डीडी नेशनल टेलीविजन चैनल और कई प्रमुख डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर पूरी दुनिया में किया गया।

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150 वर्ष पूर्ण होने पर 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक सजीव गायन

इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह एक और ऐतिहासिक कारण से अत्यंत विशेष बन गया है। भारत के कालजयी राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लाल किले पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संयोजन किया गया। स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक इतिहास में यह पहला अवसर रहा जब लाल किले के प्राचीर समारोह के दौरान 'वंदे मातरम' का सजीव (लाइव) गायन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन की समाप्ति के तुरंत बाद NCC कैडेट्स और 'माई भारत' संगठन के स्वयंसेवकों ने राष्ट्रीय गीत की एक औपचारिक और प्रभावकारी संगीतमय प्रस्तुति दी। इस खास प्रस्तुति ने स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों की विरासत को नमन करते हुए समारोह में उपस्थित हर नागरिक में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।

स्वदेशी सामर्थ्य का प्रदर्शन: 105 एमएम लाइट फील्ड गन्स से 21 तोपों की सलामी

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी क्षमता के लिहाज से भी इस बार का स्वतंत्रता दिवस एक नया इतिहास रचने में सफल रहा। स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक कार्यक्रम में इस्तेमाल किए गए मुख्य उपकरण पहली बार पूरी तरह से भारत में निर्मित थे। राष्ट्रध्वज को दी जाने वाली पारंपरिक 21 तोपों की सलामी इस बार पूर्ण रूप से स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन्स के माध्यम से दी गई। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को भारतीय सेना की सेरेमोनियल 1721 फील्ड बैटरी के जांबाज जवानों ने सफलतापूर्वक पूरा किया। स्वदेशी तोपों से गूंजती इस सलामी ने न केवल देश की बढ़ती सैन्य ताकत और रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' की सफलता को रेखांकित किया, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के मजबूत होते रक्षा ढांचे का परिचय भी दिया।

भाषिणी ऐप से 22 भाषाओं में रियल टाइम अनुवाद और विकसित भारत का विज़न

प्रौद्योगिकी और इनोवेशन के क्षेत्र में भी लाल किले का यह आयोजन मील का पत्थर साबित हुआ। देश के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित डिजिटल इंडिया भाषिणी ऐप के जरिए रीयल टाइम में 22 प्रमुख भारतीय भाषाओं में अनुवाद प्रसारित किया गया। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री के संदेश को देश के हर कोने में रहने वाले नागरिकों तक उनकी अपनी मातृभाषा में सहजता से पहुंचाना था। समारोह का दूसरा मुख्य संदेश वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराना था। 'युवा शक्ति फॉर विकसित भारत@2047' के अंतर्गत जेन-जेड (Gen-Z) उद्यमियों, शोधकर्ताओं और युवा इनोवेटर्स की ऊर्जा को 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने का सबसे मजबूत आधार बताया गया। इस प्रकार लाल किले का यह प्रांगण स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक विरासत, स्वदेशी पराक्रम, आधुनिक तकनीक और युवा शक्ति का प्रतीक बन गया।

सवाल-जवाब

2026 में भारत कौन सा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है?
भारत 15 अगस्त 2026 को आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, जो ब्रिटिश शासन से आजादी के 79 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है।
स्वतंत्रता दिवस 2026 समारोह की मुख्य थीम क्या है?
इस वर्ष के समारोह की मुख्य थीम 'युवा शक्ति फॉर विकसित भारत@2047' रखी गई है।
लाल किले पर तोपों की सलामी में क्या खास था?
समारोह में पहली बार स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन्स से सेरेमोनियल 1721 फील्ड बैटरी द्वारा 21 तोपों की पारंपरिक सलामी दी गई।
भाषण का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कैसे किया गया?
डिजिटल इंडिया भाषिणी ऐप की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके प्रधानमंत्री के संबोधन का 22 भारतीय भाषाओं में रीयल टाइम अनुवाद किया गया।
राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के लिए क्या विशेष आयोजन हुआ?
वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लाल किले के आधिकारिक कार्यक्रम में पहली बार इसका सजीव गायन और एनसीसी कैडेट्स तथा 'माई भारत' स्वयंसेवकों द्वारा औपचारिक प्रस्तुतीकरण किया गया।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

लाल किले पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से पाँच हजार विशिष्ट अतिथियों और ढाई हजार एनसीसी कैडेट्स की यह भव्य मौजूदगी एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंध है। राष्ट्रीय पर्व पर इस प्रकार के विशाल आयوजनों के दौरान किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक से निपटने के लिए खुफिया तंत्र और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का समन्वय सर्वोपरि रहता है, विशेषकर जब वैश्विक स्तर पर तकनीक आधारित लाइव प्रसारण हो रहा हो।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

लाल किले के इस समारोह में तकनीकी एकीकरण, विशेष तौर पर 22 भाषाओं में एआई-आधारित लाइव अनुवाद, भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह प्रशासनिक और कूटनीतिक दृष्टि से यह सुनिश्चित करता है कि देश की नीति और प्रधानमंत्री का संदेश बिना किसी भाषाई बाधा के सीधे अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक तक पहुँचे, जो लोकतांत्रिक समावेशिता को मजबूत करता है।

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