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प्रॉपर्टी फर्जीवाड़े पर दिल्ली सरकार का कड़ा प्रहार, ब्लड रिलेशन के बिना जीपीए रजिस्ट्री अब नहीं होगी आसानभारत
8 जुल॰ 2026, 6:46 pm (45 दिन पहले)· 2

प्रॉपर्टी फर्जीवाड़े पर दिल्ली सरकार का कड़ा प्रहार, ब्लड रिलेशन के बिना जीपीए रजिस्ट्री अब नहीं होगी आसान

दिल्ली में प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देशानुसार, अब ब्लड रिलेशन से बाहर के लोगों को प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने पर कड़े नियमों और स्टांप कलेक्टर की जांच का सामना करना पड़ेगा।

दिल्ली के प्रॉपर्टी बाजार में फर्जीवाड़ा करने वालों और टैक्स चोरी करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ सरकार ने एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी यानी GPA के जरिए होने वाले संपत्ति हस्तांतरण पर नकेल कसने के लिए एक बेहद सख्त योजना लागू की है। इस नए फैसले से उन भू-माफियाओं और अवैध डीलरों के बीच हड़कंप मच गया है, जो स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए इस कानूनी विकल्प का गलत इस्तेमाल करते थे। सरकार द्वारा तैयार किए गए इस नए नियम के तहत, खून के रिश्तों यानी ब्लड रिलेशन को छोड़कर किसी भी अन्य व्यक्ति के नाम पर होने वाली GPA की सीधे रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी। अब ऐसे सभी दस्तावेजों को जांच की एक बेहद कठिन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे सरकारी राजस्व का नुकसान रोका जा सके और आम खरीदारों को जालसाजी से बचाया जा सके।

ब्लड रिलेशन के बाहर की संपत्तियों पर कड़ी नजर

नए नियमों के मुताबिक, सरकार ने पारिवारिक और बाहरी लेन-देन के बीच एक स्पष्ट अंतर तय कर दिया है। अब सामान्य और बिना किसी अतिरिक्त जांच के GPA पंजीकरण की सुविधा केवल सगे पारिवारिक रिश्तों तक ही सीमित रहेगी। इस दायरे में केवल माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा, बेटी, सगा भाई और सगी बहन ही शामिल होंगे। यदि कोई व्यक्ति अपने इन करीबी रिश्तेदारों के नाम पर जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाता है, तो उसे अतिरिक्त जांच प्रक्रिया से छूट दी जाएगी। सरकार का मानना है कि वास्तविक पारिवारिक संपत्ति प्रबंधन के लिए अपनों को अधिकार देना जरूरी होता है, इसलिए इन रिश्तों को इस सख्त दायरे से बाहर रखा गया है। लेकिन, जैसे ही कोई ट्रांजैक्शन इस निर्धारित ब्लड रिलेशन के दायरे से बाहर किसी तीसरे व्यक्ति या दूर के रिश्तेदार के साथ होगा, तो वह दस्तावेज तुरंत अतिरिक्त जांच के दायरे में आ जाएगा।

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सब-रजिस्ट्रार के लिए कड़े दिशा-निर्देश और चेकलिस्ट

इस नई व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए दिल्ली के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब हर एक सब-रजिस्ट्रार को उनके सामने आने वाले हर GPA दस्तावेज की बारीकी से जांच करनी होगी। इस जांच के लिए एक स्पष्ट चेकलिस्ट तैयार की गई है, जिसके तहत अधिकारियों को तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देना होगा। पहला, क्या दस्तावेज में किसी भी तरह के आर्थिक लेन-देन या पैसे के भुगतान का उल्लेख है? दूसरा, क्या इस अटॉर्नी के जरिए संपत्ति का भौतिक कब्जा किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जा रहा है? और तीसरा, क्या इस दस्तावेज में संपत्ति को स्थायी रूप से बेचने, उपहार में देने, ट्रांसफर करने या गिरवी रखने का अटूट अधिकार दिया जा रहा है? यदि जांच में इनमें से किसी भी बिंदु की पुष्टि होती है, तो उसे सामान्य GPA नहीं माना जाएगा और उसे बिक्री पत्र की श्रेणी में रखा जाएगा।

कलेक्टर ऑफ स्टांप की भूमिका और सख्त समयसीमा

यदि कोई दस्तावेज ब्लड रिलेशन से बाहर के किसी व्यक्ति के नाम पर पाया जाता है, तो सब-रजिस्ट्रार उसे सीधे रजिस्टर करने के लिए अधिकृत नहीं होंगे। ऐसे सभी मामलों को तुरंत कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजा जाएगा। कलेक्टर इस बात की गहन जांच करेंगे कि क्या इस GPA के पीछे वास्तव में मालिकाना हक का ट्रांसफर या कोई व्यावसायिक सौदा छिपा हुआ है। यदि जांच में यह साबित होता है कि संपत्ति बेची जा रही है, तो कलेक्टर उसे बिक्री पत्र यानी सेल डीड घोषित कर देंगे। इसके बाद, खरीदार को संपत्ति की बिक्री पर लगने वाली पूरी स्टांप ड्यूटी का भुगतान करना होगा। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए बेहद सख्त समयसीमा तय की है। कलेक्टर ऑफ स्टांप को मामला मिलने के 30 दिनों के भीतर अपना लिखित निर्णय देना होगा। किसी बहुत ही जटिल या विशेष परिस्थिति में इस अवधि को अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इस दौरान पंजीकरण प्रक्रिया पूरी तरह रुकी रहेगी।

ऑनलाइन ट्रैकिंग और अधिकारियों पर जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी सब-रजिस्ट्रार ने नियमों की अनदेखी की और बिना उचित जांच के ब्लड रिलेशन से बाहर के किसी दस्तावेज का पंजीकरण किया, तो उसके खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को ऐसे सभी संदिग्ध और जांच के लिए भेजे गए मामलों का एक अलग रिकॉर्ड रखना होगा और हर महीने इसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी। व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रशासन एक महीने के भीतर एक विशेष ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम तैयार करने जा रहा है। इस डिजिटल प्रणाली के जरिए वरिष्ठ अधिकारी इन मामलों की निगरानी सीधे कर सकेंगे, जिससे काम में देरी नहीं होगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

आम जनता की सुरक्षा और राजस्व में बढ़ोतरी

इस नई नीति की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य केवल सरकारी खजाने को मजबूत करना ही नहीं है, बल्कि आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना भी है। दिल्ली के प्रॉपर्टी बाजार में बहुत से सीधे-सादे खरीदार कम पैसे के लालच में GPA के जरिए संपत्ति खरीद लेते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि उनके पास मालिकाना हक के पुख्ता दस्तावेज ही नहीं हैं। इस फैसले से बाजार में पारदर्शिता आएगी, फर्जीवाड़े पर पूरी तरह से रोक लगेगी और आम जनता कानूनी विवादों में फंसने से बच सकेगी। सरकार के इस कदम से पारदर्शी और स्वस्थ प्रॉपर्टी बाजार का निर्माण होगा।

सवाल-जवाब

अतिरिक्त जांच से छूट पाने वाले ब्लड रिलेशन के दायरे में कौन-कौन से रिश्ते आते हैं?
नए नियमों के तहत माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा, बेटी, सगा भाई और सगी बहन को इस अतिरिक्त जांच से छूट दी गई है।
यदि ब्लड रिलेशन से बाहर किसी व्यक्ति के नाम पर जीपीए बनाई जाती है, तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में सब-रजिस्ट्रार उसे सीधे पंजीकृत नहीं करेंगे, बल्कि मामले को कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजेंगे जो यह तय करेंगे कि यह सामान्य जीपीए है या बिक्री पत्र (सेल डीड)।
कलेक्टर ऑफ स्टांप को जांच पूरी कर अपना आदेश जारी करने में कितना समय मिलेगा?
कलेक्टर ऑफ स्टांप को इस प्रकार के मामलों में 30 दिनों के भीतर लिखित आदेश जारी करना होगा। विशेष और जटिल परिस्थितियों में इस समयसीमा को अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाया जा सकता है।
यदि जांच में पाया जाता है कि जीपीए का उपयोग संपत्ति बेचने के लिए किया जा रहा है, तो क्या कार्रवाई होगी?
यदि जांच में मालिकाना हक ट्रांसफर करने या संपत्ति बेचने की शर्तें पाई जाती हैं, तो उसे 'सेल डीड' माना जाएगा और रजिस्ट्री से पहले पूरी स्टांप ड्यूटी वसूल की जाएगी।
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