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पंजाब नेशनल बैंक की तिजोरी में नकली नोटों का मामला गहराया, सत्रह करोड़ तक पहुंच सकती है फर्जी रकमउत्तर प्रदेश
1 सित॰ 2026, 5:13 pm (11 दिन पहले)· 2

पंजाब नेशनल बैंक की तिजोरी में नकली नोटों का मामला गहराया, सत्रह करोड़ तक पहुंच सकती है फर्जी रकम

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से जुड़े नकली नोटों के मामले में नया मोड़ आया है। शुरुआती सात करोड़ से ज्यादा की राशि बढ़कर अब करीब सत्रह करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है और पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में नकली करेंसी मिलने का प्रकरण लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। शुरुआत में इस मामले में सात करोड़ चालीस लाख रुपये के नकली नोट सामने आए थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब सत्रह करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही जा रही है। बैंक की सुरक्षित तिजोरी में असली नोटों की जगह नकली नोट कैसे पहुंचे, इसकी जांच अभी चल रही है और अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर कुल रकम का यह आंकड़ा और भी अधिक बढ़ सकता है।

जयपुर भेजने पर खुला गड़बड़ी का राज

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब इस करेंसी चेस्ट से साढ़े ग्यारह करोड़ रुपये की नकदी भारतीय रिजर्व बैंक की जयपुर स्थित करेंसी चेस्ट में भेजी गई थी। जब वहां नोटों की गिनती की गई, तो उसमें लगभग चार लाख तीस हजार रुपये कम पाए गए। इस अंतर के सामने आने के बाद बैंक स्तर पर आंतरिक जांच शुरू की गई, जिसके जरिए इस बड़ी हेराफेरी की परतें खुलनी शुरू हुईं।

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कर्मचारी पर चोरी का आरोप और अधिकारियों पर कार्रवाई

बैंक द्वारा की गई शुरुआती जांच के दौरान पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार पर नोटों की गड्डियों से रुपये निकालने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सीसीटीवी फुटेज को भी जांच का मुख्य आधार बनाया गया है और आरोपी के खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा, इस फर्जीवाड़े के सिलसिले में तीन बैंक प्रबंधकों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं और बैंक प्रबंधन की ओर से उन्हें निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इन प्रबंधकों की वास्तविक संलिप्तता क्या थी और नकली नोट बैंक के भीतर तक कैसे पहुंचे, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगा।

उच्च अधिकारियों का दौरा और जांच के लिए एसआईटी का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी, डीएम और एसएसपी ने खुद मौके पर पहुंचकर करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया है। स्थानीय पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही इस पूरे प्रकरण में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई जांच की संभावना पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। फिलहाल जांच प्रक्रिया लगातार जारी है और अन्य बची हुई करेंसी की गहन पड़ताल पूरी होने के बाद ही नकली नोटों की कुल वास्तविक राशि का आधिकारिक आंकड़ा सामने आ पाएगा।

सवाल-जवाब

यह मामला सबसे पहले कहां सामने आया?
यह मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में सामने आया।
नकली नोटों का आंकड़ा बढ़कर अब कितना हो गया है?
शुरुआती जांच में सामने आए सात करोड़ से अधिक के नोटों का मामला अब बढ़कर करीब सत्रह करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
गड़बड़ी का खुलासा कैसे हुआ?
जब करेंसी चेस्ट से साढ़े ग्यारह करोड़ रुपये आरबीआई की जयपुर करेंसी चेस्ट भेजे गए, तब गिनती के दौरान चार लाख तीस हजार रुपये कम मिले।
इस मामले में किस कर्मचारी पर आरोप लगा है?
जांच के दौरान पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार पर नोटों की गड्डियों से रुपये निकालने का आरोप सामने आया है।
कितने बैंक प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है?
इस मामले में तीन बैंक प्रबंधकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनके निलंबन की जानकारी दी गई है।
किन अधिकारियों ने करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया?
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी, डीएम और एसएसपी ने करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया।
मामले की जांच के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पुलिस विशेष जांच टीम यानी एसआईटी बनाने की तैयारी कर रही है और सीबीआई जांच की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 दिन पहले

सहारनपुर के इस मामले में सात करोड़ से सत्रह करोड़ तक का फासला और जयपुर भेजी गई खेप में गड़बड़ी यह दर्शाती है कि यह केवल एक कर्मचारी की चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वित्तीय सेंध है। बैंक की अति-सुरक्षित तिजोरी में नकली नोटों का पहुंचना आंतरिक प्रणाली की गंभीर विफलता को उजागर करता है। एसआईटी जांच और सीबीआई की संभावना के बीच, असली चुनौती यह उजागर करना होगी कि क्या यह गिरोह बैंक के भीतर तक गहरी जड़ें जमा चुका था, जो आने वाले समय में वित्तीय सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·11 दिन पहले

सहारनपुर के इस बड़े वित्तीय प्रकरण में एसआईटी और संभावित सीबीआई जांच का रुख इस बात पर तय होगा कि क्या यह रैकेट केवल स्थानीय स्तर पर सक्रिय था या इसके तार अन्य जिलों या राज्यों के बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े हैं। बैंक की अति-सुरक्षित तिजोरी के भीतर इस तरह की सेंध न केवल आंतरिक सतर्कता को कठघरे में खड़ा करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि वित्तीय संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की मौजूदा व्यवस्था में बड़े पैमाने पर लीकेज मौजूद हैं, जिनकी समय रहते अनदेखी करना पूरी बैंकिंग प्रणाली के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

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