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राजस्थान की RGHS स्कीम में करोड़ों का फर्जीवाड़ा: SOG ने सीकर की लैब के तीन और कर्मचारी दबोचे, 16 जून तक रिमांड परराजस्थान
13 जून 2026, 7:31 pm (46 दिन पहले)· 0

राजस्थान की RGHS स्कीम में करोड़ों का फर्जीवाड़ा: SOG ने सीकर की लैब के तीन और कर्मचारी दबोचे, 16 जून तक रिमांड पर

राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में करीब 4 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच कर रही SOG ने सीकर के एक डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े तीन और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। तीनों को 16 जून 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है और पूरे नेटवर्क की पड़ताल जारी है।

राजस्थान सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजना — राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) — में सरकारी पैसे की लूट का एक बड़ा जाल सामने आ रहा है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की ताजा कार्रवाई में इस मामले से जुड़े तीन और लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। अब तक की पड़ताल इशारा करती है कि करीब 4 करोड़ रुपये का गोलमाल हुआ है, और जांच एजेंसी मानकर चल रही है कि यह आंकड़ा अभी और बड़ा हो सकता है, क्योंकि पूरे नेटवर्क की परतें अभी खुल रही हैं।

कैसे शुरू हुई जांच

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करती रही है। इसी रुख के तहत RGHS में दर्ज हो रहे फर्जी क्लेम, बेवजह की जांचें और सरकारी कोष के दुरुपयोग की शिकायतों पर शिकंजा कसा जा रहा है। सीकर जिले से जुड़ा यह मामला भी इसी मुहिम का हिस्सा है, जिसकी तह तक जाने की जिम्मेदारी SOG को दी गई थी।

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कागजों पर मरीज, खजाने से असली पैसा

जांच की जो तस्वीर अब तक उभरी है, वह चौंकाने वाली है। आरोप है कि सीकर के डॉ. विजय एंड बी लाल डायग्नोस्टिक सेंटर को मोहरा बनाकर कुछ डॉक्टरों और लैब चलाने वालों ने मिलीभगत से RGHS योजना को चूना लगाया। तरीका सीधा था — जिन मरीजों को कभी देखा तक नहीं गया, उनके नाम पर फर्जी ओपीडी पर्चियां बनाई गईं, गैरजरूरी जांचें लिख दी गईं और फिर मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट तैयार कर RGHS पोर्टल पर चढ़ा दी गईं। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे राज्य सरकार से करोड़ों रुपये का भुगतान वसूल लिया गया।

पहले दो, अब तीन और गिरफ्तारियां

इस गोरखधंधे में लैब संचालक बनवारी लाल उर्फ बी लाल और डॉ. कमल कुमार अग्रवाल पहले ही पकड़े जा चुके हैं। अब SOG ने जांच को आगे बढ़ाते हुए लैब के तीन कर्मचारियों — बजरंग सिंह, अरविंद कुमार शीला और विक्रम कल्याण — को भी गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी का कहना है कि ये तीनों योजना के लाभार्थियों के कार्ड नंबर जुटाने, फर्जी पर्चियां तैयार कराने और उन्हें डॉक्टरों तक पहुंचाने जैसे कामों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे — यानी पूरे फर्जीवाड़े की मशीनरी को चलाने वाले हाथ।

16 जून तक रिमांड, नेटवर्क की तलाश

तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 16 जून 2026 तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। इस दौरान SOG यह खंगालेगी कि इस गिरोह की जड़ें कहां तक फैली हैं — फर्जी भुगतान का हिसाब, पैसे का लेन-देन और इसमें शामिल बाकी संभावित किरदार कौन-कौन हैं।

संपत्ति जब्ती की भी तैयारी

SOG अधिकारियों के मुताबिक जांच में जिन और डॉक्टरों, लैब संचालकों या कर्मचारियों के नाम सामने आएंगे, उन पर भी सख्ती बरती जाएगी। साथ ही जरूरत पड़ी तो आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

लाभार्थियों के लिए सरकार की चेतावनी

इस पूरे मामले के बीच राज्य सरकार ने RGHS से जुड़े लोगों को सतर्क किया है। अपील की गई है कि अपना कार्ड और उससे जुड़ी जानकारी किसी अनजान के हाथ न लगने दें। इलाज और जांच के बाद मिलने वाली पर्चियों और बिलों को खुद ठीक से मिलाकर देखें, ताकि अगर उनके नाम पर कोई गड़बड़ी हो रही हो तो वक्त रहते उसका पता चल सके।

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