जयपुर ग्रामीण के बस्सी-नागा ग्राम पंचायत के तहत आने वाले चौलाई की ढाणी में गहरी आस्था और भक्ति का एक बेहद अनोखा नजारा देखने को मिला है। यहां रहने वाली 21 साल की दिव्यांग युवती रीनू यादव ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों के साथ भगवान शालीग्राम महाराज को अपना जीवनसाथी चुना है। बचपन से ही ईश्वर की भक्ति में रमी रीनू ने शालीग्राम जी को ही अपना सब कुछ मान लिया है और जीवनभर उनकी सेवा करने का संकल्प लिया है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और रीनू की अटूट आस्था
मूल रूप से जालसू क्षेत्र के खपरिया गांव के रहने वाले जगदीश यादव और संती देवी की बेटी रीनू बचपन से ही बस्सी-नागा स्थित अपने ननिहाल में रह रही हैं। जन्म से ही शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद रीनू के मन में ईश्वर के प्रति गहरा प्रेम रहा है। उनकी इसी अनूठी भक्ति और दृढ़ विश्वास को देखते हुए उनके नाना रामस्वरूप धोलीवाल और नानी मानी देवी ने इस आध्यात्मिक विवाह का आयोजन कराने का फैसला लिया।
धूमधाम से निकली बारात और पूरी हुईं रस्में
इस अनोखे विवाह समारोह की शुरुआत पारंपरिक लगन टीका कार्यक्रम के साथ हुई। इसके बाद लक्ष्मीनाथ मंदिर से गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भगवान शालीग्राम जी की भव्य बारात निकाली गई। यह बारात मुरली मनोहर मंदिर से होते हुए चौलाई की ढाणी में रामस्वरूप धोलीवाल के घर पहुंची। बारात के आगमन पर वधु पक्ष के लोगों और ग्रामीणों ने बारातियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके लिए प्रीतिभोज का आयोजन भी किया गया।
इसके बाद पंडित अमित गौड़ की देखरेख में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तोरण मारने की रस्म और विवाह के अन्य सभी आवश्यक विधान संपन्न किए गए। रीनू ने अपने मामा कालूराम व मामी उर्मिला देवी और दूसरे मामा महेश व मामी सीता देवी के सहयोग से भगवान शालीग्राम के साथ विवाह के सात फेरे लिए।
अद्भुत जीवनशैली और आजीवन भक्ति का संकल्प
शादी के बाद अब रीनू अपने ननिहाल में ही रहकर प्रभु की आराधना और सेवा में अपना जीवन व्यतीत करेंगी। उनकी जीवनशैली और भक्ति की कहानी स्थानीय लोगों को आश्चर्यचकित कर देती है। परिजनों के मुताबिक, 21 वर्षीय रीनू ने जन्म से लेकर आज तक कभी भी सामान्य अन्न का सेवन नहीं किया है। वह पूरे चौबीस घंटे में केवल दो बार ही आहार लेती हैं, जिसमें सुबह और शाम केवल एक-एक कप दूध पीना शामिल है।
विवाह के मंडप में जब नाना रामस्वरूप धोलीवाल और नानी मानी देवी ने अपनी नातिन का कन्यादान किया, तो वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें भावुक हो गईं। इस आध्यात्मिक उत्सव को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने रीनू को आशीर्वाद और उपहार दिए। इस पावन अवसर पर विवाह में शामिल हुए शुभचिंतकों की ओर से रीनू को 51 हजार रुपये की कन्यादान राशि भी भेंट की गई।



















