पश्चिम एशिया में कई दिनों की अस्थाई शांति के बाद सैन्य संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। मंगलवार (28 जुलाई) और बुधवार (29 जुलाई 2026) के दौरान हुए सिलसिलेवार सैन्य अभियानों में अमेरिकी और सऊदी वायुसेना ने इराक में मौजूद ईरान समर्थित लड़ाकों के रणनीतिक अड्डों पर भीषण हवाई हमले किए हैं। इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने जॉर्डन स्थिति अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिन्हें जॉर्डन के वायु रक्षा तंत्र ने हवा में ही मार गिराया। वहीं दूसरी ओर, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरानी नौसेना द्वारा तीन तेल टैंकरों को रोके जाने और यमन के हूती गुट द्वारा नए समुद्री शुल्क वसूलने की योजनाओं की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को संकट में डाल दिया है। इस चौतरफा सैन्य तनाव के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कमोडिटी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की भारी तेजी दर्ज की गई है।
इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त कार्रवाई, भीषण बमबारी में भारी नुकसान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अमेरिकी और सऊदी अरब के युद्धक विमानों ने इराक में सक्रिय ईरान समर्थित उग्रवादी गुटों के खिलाफ मंगलवार को व्यापक सैन्य अभियान चलाया। CENTCOM का कहना है कि यह हमला उन लड़ाकों को निशाना बनाकर किया गया था जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अमेरिकी सुरक्षा बलों और सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर लगातार हमले करने के निर्देश मिल रहे थे। अमेरिकी सेना के आंकड़ों के अनुसार, इन उग्रवादियों ने पिछले कुछ ही दिनों के भीतर 24 से अधिक घातक ड्रोन हमले अंजाम दिए थे, जिसके बाद यह जवाबी कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी।
दूसरी तरफ, इराक में काम कर रहे ईरान समर्थक पूर्व अर्धसैनिक बलों के संगठन Popular Mobilization Forces (PMF) यानी हशद अल-शाबी ने बयान जारी कर पुष्टि की है कि अमेरिकी और सऊदी बमबारी में उनके कई सैन्य परिसरों को भारी नुकसान पहुंचा है। संगठन ने बताया कि हमले के कारण कई इमारतें और सैन्य संपत्तियां पूरी तरह तबाह हो गईं तथा उनके अनेक कर्मियों की मौत हो गई। स्वतंत्र सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस हमले में PMF के निनवे प्रांत स्थित ठिकाने पर सबसे घातक मार पड़ी, जहां कम से कम 10 लड़ाकों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा अन्य प्रांतों में हुए हमलों में कम से कम 20 लड़ाके मारे गए और छह ईरानी सैन्य सलाहकारों की भी जान चली गई, जबकि दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में टैंकर जब्ती और ओमान के प्रबंधन प्रस्ताव का खारिज होना
जलमार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कार्रवाई करते हुए तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों को रोककर अपने कब्जे में ले लिया है। तस्नीम न्यूज एजेंसी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, गार्ड्स की नौसेना ने दावा किया कि इन व्यापारिक जहाजों ने बार-बार दी गई चेतावनियों की अनदेखी की, समुद्री सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया और गैर-कानूनी व असुरक्षित रास्तों से गुजरने का प्रयास किया, जिसके कारण उन्हें बलपूर्वक रोका गया।
इसी बीच, राजनयिक मोर्चे पर भी गतिरोध गहरा गया है। ईरान के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बुधवार (29 जुलाई 2026) को स्पष्ट किया कि तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के क्षेत्रीय और साझा प्रबंधन से जुड़े ओमान के शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारी का कहना है कि ओमान की इस योजना के सफल होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि अमेरिका और सऊदी अरब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपनी अवास्तविक योजनाओं को थोपने के लिए ओमान पर लगातार दबाव बना रहे हैं।
लाल सागर में हूती गुट की टैक्स योजना और चीन के साथ गुप्त वार्ता
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के सूचना मंत्री मोअम्मर अल-इरियानी ने एक गंभीर खुलासा करते हुए बताया है कि ईरान के मार्गदर्शन में हूती विद्रोही लाल सागर और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों से मनमाना शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था तैयार कर रहे हैं। मंत्री ने इस कदम को एक खतरनाक दुस्साहस करार देते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे प्रमुख समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक को हूती गुट की आतंकवादी और सैन्य गतिविधियों की फंडिंग का स्थायी जरिया बनाना है।
उल्लेखनीय है कि हूती गुट ने 20 जुलाई को ही सऊदी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर नाकाबंदी की घोषणा की थी, जिससे लाल सागर का क्षेत्र युद्ध के नए केंद्र में बदल गया है। हालांकि, घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले छह स्वतंत्र सूत्रों के अनुसार, चीन ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यमन के हूती नेतृत्व से सीधी बातचीत की है। बीजिंग ने हूती कमान से स्पष्ट आश्वासन मांगा है कि दक्षिणी लाल सागर से गुजरने वाले चीनी जहाजों पर कोई हमला न किया जाए ताकि उनके ईंधन आपूर्ति मार्ग सुरक्षित रह सकें।
जॉर्डन द्वारा ईरानी मिसाइलों का इंटरसेप्शन और ईरानी सीमा पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक
बुधवार (29 जुलाई) तड़के जॉर्डन की सीमा पर भी सैन्य कार्रवाई देखने को मिली। जॉर्डन की सेना के प्रवक्ता ने बताया कि उनके उन्नत वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की तरफ से राज्य के हवाई क्षेत्र में घुसी पांच बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया। दूसरी ओर, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की एयरोस्पेस फोर्स का बयान जारी करते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने जॉर्डन में स्थित मुवफ्फक साल्टी एयर बेस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुख्यालय को निशाना बनाकर ये बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं।
इसी दौरान, ईरान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में भी अमेरिकी हमले की खबर सामने आई है। ईरान के सरकारी टेलीविजन और फ़ार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि अमेरिकी वायुसेना ने इराक सीमा के पास स्थित पश्चिम अज़रबैजान प्रांत के पिरानशहर सीमावर्ती इलाके में एक मिसाइल हमला किया। हालांकि, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मिसाइल एक निर्जन इलाके में गिरी, जिससे किसी भी तरह की जनहानि या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।
लेबनान सीमा पर युद्धविराम का उल्लंघन और इजराइली रक्षा बल की रिपोर्ट
दक्षिणी लेबनान में भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इजराइली रक्षा बल (IDF) ने बुधवार को हिज़बुल्लाह पर युद्धविराम के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। इजराइली सैन्य बयान के अनुसार, रात के समय हिज़बुल्लाह ने सुरक्षा क्षेत्र के भीतर अली अल-ताहेर रिज इलाके में गश्त कर रहे IDF के एक इंजीनियरिंग वाहन को निशाना बनाकर एक विस्फोटक ड्रोन दागा। यद्यपि इस हमले में कोई भी इजराइली सैनिक घायल नहीं हुआ, लेकिन IDF ने इसे शांति समझौते का सीधा उल्लंघन माना है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की कड़ी प्रतिक्रिया और राजनयिक आह्वान
पश्चिम एशिया में भड़के इस बहुपक्षीय संघर्ष पर भारत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र (UN) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर में व्यापारिक पोतों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है, और वहां संक्षिप्त शांति के बाद दोबारा हिंसा भड़कना अत्यंत चिंताजनक है।
राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने सभी पक्षों से संयम बरतने का आग्रह करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही को तुरंत बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार प्रक्रिया को गति देने पर जोर दिया और कहा कि संकीर्ण स्वार्थों के कारण बहुपक्षीय वार्ताओं में आ रही रुकावटों को दूर किया जाना चाहिए। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इराक में हुए अमेरिकी-सऊदी हमलों की निंदा करते हुए इसे UN चार्टर का उल्लंघन और इजराइली-अमेरिकी हितों को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा चेतावनी संदेश और नए आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी
जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने जवानों की सुरक्षा के लिए कड़ा और निर्णायक पलटवार करेगी। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी संसद से मांग की है कि रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े विधेयक में ईरान पर भी भारी शुल्क (टैरिफ) लगाने के नए कानूनी प्रावधान जोड़े जाएं। उल्लेखनीय है कि इस विधेयक को हाल ही में दिवंगत हुए अमेरिकी सेनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा था।
वैश्विक कमोडिटी बाजार पर असर: कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा की तेजी
पश्चिम एशिया में सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है। बुधवार तड़के एशियाई कारोबार के दौरान अमेरिकी Benchmark West Texas Intermediate (WTI) क्रूड 3.67% की बढ़त के साथ $82.17 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि North Sea Brent क्रूड 3.39% बढ़कर $86.94 प्रति बैरल हो गया।
भारतीय बाजारों की बात करें तो Multi Commodity Exchange (MCX) पर अगस्त महीने की डिलीवरी वाला क्रूड वायदा ₹242 यानी 3.18% की मजबूती के साथ ₹7,845 प्रति बैरल दर्ज किया गया। चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी विश्लेषक आमिर माकडा के अनुसार, सप्लाई बाधित होने के डर से कारोबार की शुरुआत में ही क्रूड ₹7,650 के करीब मजबूत होकर खुला था। वहीं कोटक नियो के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में बताया कि ईरान और अमेरिकी-सऊदी बलों के बीच एक-दूसरे के ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाइयों ने बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को बढ़ा दिया है, जिससे पिछले तीन दिनों से जारी मंदी का सिलसिला खत्म हो गया है।
सामरिक विश्लेषण और भविष्य के खतरे
वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक स्टेनली जॉनी के अनुसार, इस पूरे संकट में यमन के हूती विद्रोहियों का कूदना और ईरान के साथ उनका रणनीतिक समन्वय इस युद्ध को पूरे पश्चिम एशिया में फैलाने का काम कर रहा है। अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके उन्नत रक्षा हथियारों और मिसाइल रक्षा तंत्रों के तेजी से घटते स्टॉक को लेकर है, जो उसके अपने क्षेत्रीय अड्डों और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी इस युद्ध को लंबा खींचने का विरोध बढ़ रहा है। यदि यह सैन्य गतिरोध जल्द नहीं थमा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।



















