डूंगरपुर शहर के पुराना बस स्टैंड के पीछे स्थित श्री लक्ष्मण राजपूत छात्रावास को लेकर काफी समय से चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। एडीजे कोर्ट ने इस मामले में अपना अंतिम निर्णय सुनाते हुए संपत्ति को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। अदालत के आदेश के अनुसार, यह पूरा छात्रावास भवन और इससे जुड़ी जमीन श्री लक्ष्मण देवस्थान निधि ट्रस्ट की वैध संपत्ति है। इस अदालती फैसले से पूर्व राजपरिवार के सदस्यों और राजपूत समाज को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। लंबे समय से चल रही इस खींचतान का परिणाम पक्ष में आने के बाद पूरे समाज में खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
पूर्व सांसद ने प्रेस वार्ता में रखी अपनी बात
अदालत का यह फैसला आने के बाद श्री लक्ष्मण राजपूत छात्रावास परिसर में ही एक विशेष पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। इस मौके पर पूर्व राज्यसभा सांसद और पूर्व राजपरिवार के महारावल हर्षवर्धन सिंह ने मीडिया के सामने समाज का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संपत्ति ऐतिहासिक रूप से हमेशा क्षत्रिय समाज की रही है और भविष्य में भी उसी के अधीन रहेगी। उन्होंने बताया कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर समाज के लोगों को भटकाने और इस कीमती संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने की साजिश रची थी। "न्यायालय ने दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद यह फैसला दिया है," उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा।
सत्य और न्याय की हुई जीत
हर्षवर्धन सिंह ने न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा जताते हुए इस फैसले को न्याय की सीधी जीत करार दिया। उनके अनुसार, जिस तरह से कुछ अराजक तत्वों द्वारा जबरदस्ती अधिकार जमाने का प्रयास किया जा रहा था, उसे अदालत ने पूरी तरह नाकाम कर दिया है। मामले से जुड़े हर एक तथ्य और पुराने कागजातों की गहराई से जांच की गई। इसी जांच के आधार पर अदालत ने यह तय किया कि छात्रावास पर ट्रस्ट का जो भी दावा है, वह कानूनी तौर पर पूरी तरह सही और मजबूत है। अब स्वामित्व को लेकर सारे भ्रम दूर हो चुके हैं और संपत्ति का अधिकार सुरक्षित हो गया है।
छात्रों की शिक्षा के लिए होगा सही इस्तेमाल
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के डूंगरपुर जिलाध्यक्ष करणीराज सिंह चौहान बिछीवाड़ा ने भी अदालत के इस आदेश का खुले दिल से स्वागत किया। उन्होंने बताया कि समाज के भीतर के ही कुछ गिने-चुने लोगों ने ही सबको गुमराह करके इस पूरी संपत्ति को हथियाने का असफल प्रयास किया था। अब जब अदालत ने सारा विवाद सुलझा दिया है, तो छात्रावास का संचालन पहले की तरह सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा। इस पूरी जगह का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ क्षत्रिय समाज के कल्याण के लिए किया जाएगा। यहाँ मुख्य रूप से समाज के छात्रों को रहने की सुविधा दी जाएगी, ताकि वे बिना किसी बाहरी परेशानी के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और अपना भविष्य संवार सकें।




















