भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी (ADC) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने 30 वर्ष की आयु में भारतीय सेना छोड़ने का फैसला किया है। लगभग 12 वर्षों की समर्पित सैन्य सेवा के बाद वर्दी उतारने के इस अचानक फैसले ने उनके प्रशंसकों और सैन्य बिरादरी को चकित कर दिया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से लेकर 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस और फिर राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है।
उत्कृष्ट सैन्य करियर और प्रमुख उपलब्धियां
मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने वर्ष 2013 में एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने 133वें कोर्स के माध्यम से अपना प्रशिक्षण शुरू किया। वर्ष 2021 में आयोजित गणतंत्र दिवस परेड के दौरान उन्होंने जाट रेजिमेंट के दल का नेतृत्व किया था और उनकी टुकड़ी ने सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दस्ते की ट्रॉफी अपने नाम की थी। इसके बाद वे भारतीय सेना की घातक टुकड़ी 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस में शामिल हुए, जहाँ कठोर प्रशिक्षण और अभियानों के बाद उन्होंने प्रतिष्ठित 'बलिदान बैज' हासिल किया।
मार्च 2023 में उन्हें राष्ट्रपति भवन के महत्वपूर्ण पदों में से एक, राष्ट्रपति के एडीसी (Aide-de-Camp) के रूप में तैनात किया गया। अपनी नियुक्ति के दौरान उन्होंने वीवीआईपी प्रोटोकॉल, विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की अगवानी, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के साथ समन्वय और राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था को कुशलता से संभाला। इस दौरान उनके शालीन व्यवहार के वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हुए, जिससे वे इंटरनेट पर 'नेशनल क्रश' के नाम से पहचाने जाने लगे।
पॉडकास्ट में सेना छोड़ने के कारण पर स्पष्टता
वर्दी छोड़ने के फैसले पर चल रही तरह-तरह की चर्चाओं के बीच, मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राज शमानी के पॉडकास्ट पर इस विषय पर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में आए कुछ व्यक्तिगत मोड़ों और प्राथमिकताओं के कारण उन्हें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा। 12 वर्षों की अपनी सेवा के दौरान उन्होंने लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर चुनौतीपूर्ण हाई-रिस्क ऑपरेशन्स और राष्ट्रपति भवन के अनुशासित माहौल तक हर जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाया।
सैन्य पेंशन नियम और मिलने वाले लाभ
सैन्य अधिकारियों के सेवानिवृत्ति नियमों के अनुसार, पूर्ण पेंशन प्राप्त करने के लिए कम से कम 20 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होता है। चूंकि मेजर ऋषभ ने 12 साल की सेवा के बाद प्रीमेच्योर रिटायरमेंट यानी समय पूर्व सेवानिवृत्ति ली है, इसलिए वे नियमित मासिक पेंशन के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, सेना के विशेष नियमों के तहत उन्हें ग्रेच्युटी, पूर्व सैनिक (ESM) का दर्जा, ईसीएचएस (ECHS) के तहत चिकित्सा सुविधाएं और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएंगे।
भविष्य की योजनाएं और करियर दिशा
भारतीय सेना से समय पूर्व सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों के लिए कॉरपोरेट क्षेत्र, रणनीतिक सुरक्षा परामर्श, नेतृत्व विकास और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्रों में अवसर मौजूद रहते हैं। मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने संकेत दिया है कि वे आने वाले समय में देश के युवाओं को मार्गदर्शन देने और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में अपना योगदान देंगे।

















