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शीतकालीन फसलों से पहले खेत की उर्वरता बढ़ाने का प्राकृतिक तरीका, रांची के किसान संदीप ने बताया असरदार फॉर्मूलाझारखंड
14 सित॰ 2026, 3:24 pm (55 मिनट पहले)· 0

शीतकालीन फसलों से पहले खेत की उर्वरता बढ़ाने का प्राकृतिक तरीका, रांची के किसान संदीप ने बताया असरदार फॉर्मूला

रांची के किसान संदीप शीतकालीन सब्जियों की बुवाई से एक महीना पहले खेत की प्राकृतिक जुताई और जैविक खाद का उपयोग करते हैं। गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन के इस मिश्रण से मिट्टी का पीएच संतुलित रहता है और फसल में कीड़े नहीं लगते।

शीतकालीन सब्जियों की बुवाई का मौसम शुरू होते ही किसान अपने खेतों को नए सिरे से तैयार करने में जुट जाते हैं। झारखंड की राजधानी रांची के किसान संदीप का मानना है कि किसी भी फसल की बंपर पैदावार सीधे तौर पर खेत की मिट्टी की सेहत पर निर्भर करती है। अक्सर फसलों में कीड़े लगने या उत्पादन कम होने की मुख्य वजह मिट्टी की उर्वरक शक्ति का कमजोर होना होता है। इसी वजह से वह कोई भी नई सब्जी लगाने से पहले पूरे एक महीने तक खेत को जैविक तकनीकों से तैयार करते हैं, जिससे खेत की उपजाऊ क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी होती है।

एक महीने की तैयारी और जुताई का चक्र

संदीप बताते हैं कि खेत में सीधे नई फसल लगाने की जल्दबाजी करने के बजाय मिट्टी को एक महीने का समय देना चाहिए। इस प्रक्रिया की शुरुआत में खेत में धान का पुआल और जैविक कचरा बिछा दिया जाता है। पुआल मिट्टी को आपस में बांधने का काम करता है और उसकी बनावट में सुधार लाता है। इस एक महीने की तैयारी के दौरान हर 15 दिन के अंतराल पर खेत में जैविक पोषक तत्व डाले जाते हैं। इसके साथ ही पूरे महीने में दो से तीन बार खेत की अच्छी तरह जुताई की जाती है, ताकि सभी प्राकृतिक तत्व मिट्टी में गहराई तक मिल सकें।

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जैविक घटकों का मिश्रण और पीएच संतुलन

मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए एक खास जैविक मिश्रण तैयार किया जाता है। इसमें सड़ी हुई गोबर खाद, केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट), गोमूत्र, थोड़ा सा गुड़ और थोड़ा सा बेसन आपस में मिलाया जाता है। इसके साथ ही इसमें चुटकी भर या थोड़ी मात्रा में चूना भी मिलाया जाता है, जो मिट्टी के पीएच स्तर को संतुलित करने का काम करता है। संदीप के अनुसार, सड़ा हुआ गोबर खाद खेती के लिए सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र साबित होता है। वह रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से पूरी तरह दूर रहते हैं। उनका कहना है कि रासायनिक खाद तुरंत तो अच्छा परिणाम दे सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह मिट्टी को पूरी तरह खराब और बंजर कर देती है।

फसलों का चयन, गुणवत्ता और अतिरिक्त आय

इस प्राकृतिक प्रक्रिया से मिट्टी तैयार होने के बाद किसान संदीप उसमें शीतकालीन सब्जियां उगाते हैं। ठंड के इस मौसम में वह अपने खेत में मुख्य रूप से गाजर, शिमला मिर्च, फूलगोभी और पत्तागोभी की फसल लगाते हैं। यह तमाम सब्जियां 60 से 70 दिनों के भीतर पूरी तरह पककर तैयार हो जाती हैं। इस जैविक तकनीक से उगाई गई सब्जियों की गुणवत्ता इतनी शानदार होती है कि 100 में से बमुश्किल एक या दो सब्जी ही खराब निकलती है, यानी 98 प्रतिशत उपज पूरी तरह सटीक और स्वस्थ रहती है। इसके अलावा, वह खेत के खाली स्थानों में धनिया भी बो देते हैं। उच्च गुणवत्ता वाला यह धनिया बाजार में बेहतरीन कीमतों पर बिकता है, जिससे उन्हें बिना किसी अतिरिक्त लागत के अच्छा मुनाफा मिल जाता है।

सवाल-जवाब

सब्जियों की बुवाई से पहले खेत तैयार करने में कितना समय लगता है?
बुवाई शुरू करने से पहले खेत को पूरे एक महीने तक जैविक तरीकों से तैयार किया जाता है।
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए किन प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल किया जाता है?
इसमें पुआल, सड़ी गोबर खाद, केंचुआ खाद, गोमूत्र, थोड़ा गुड़, बेसन और चूना मिलाया जाता है।
मिश्रण में चूना मिलाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
चूना मिलाने से खेत का पीएच स्तर संतुलित हो जाता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है।
इस जैविक खेत में कौन-कौन सी शीतकालीन सब्जियां उगाई जाती हैं?
इस तैयार खेत में गाजर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, पत्तागोभी और धनिया उगाया जाता है।
शीतकालीन सब्जियां कितने समय में तैयार होती हैं और उनकी गुणवत्ता कैसी रहती है?
यह फसलें 60 से 70 दिनों में तैयार होती हैं और 98 प्रतिशत पैदावार पूरी तरह स्वस्थ और सटीक रहती है।
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