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रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा कदम, दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ विंटर एक्शन प्लान तैयारदिल्ली
14 सित॰ 2026, 10:40 am (16 घंटे पहले)· 0

रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा कदम, दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ विंटर एक्शन प्लान तैयार

दिल्ली में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। इसके तहत प्रदूषण जांच केंद्रों को आधुनिक बनाने और पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी है।

राजधानी दिल्ली में सर्दियों के मौसम से पहले हवा के जहरीले होने के खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने अभी से ही अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हर साल ठंड के दिनों में स्मॉग और प्रदूषण की जो गंभीर समस्या खड़ी होती है, उससे निपटने के लिए इस बार व्यापक स्तर पर योजना बनाई जा रही है। इस समस्या में सबसे बड़ा योगदान सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएं का होता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए खास कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रदूषण जांच केंद्रों का आधुनिकीकरण

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखने के उद्देश्य से सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। इसके तहत दिल्ली में संचालित सात सौ से अधिक प्रदूषण जांच केंद्रों यानी पीयूसीसी को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। पेट्रोल पंपों पर बने इन जांच बूथों का रंग-रूप पूरी तरह से बदला जाएगा और वहां आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ताकि पूरी जांच प्रक्रिया की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न बचे।

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पारदर्शी और मजबूत व्यवस्था पर जोर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का मानना है कि केवल सड़क पर गाड़ियों की कागजी जांच करने भर से इस विकट चुनौती से पार नहीं पाया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी करने वाली पूरी प्रणाली को तकनीकी रूप से सुदृढ़ और पारदर्शी बनाया जाए। अभी तक यह देखा गया है कि कमर्शियल वाहनों को पुराने तौर-तरीकों वाले केंद्रों से फिटनेस सर्टिफिकेट मिल रहे थे, जबकि आम जनता अपने निजी वाहनों की जांच पेट्रोल पंप के बाहर बने छोटे बूथों पर करवाती थी। अब इन दोनों ही व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक का समावेश किया जा रहा है।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर्स की शुरुआत

व्यावसायिक गाड़ियों की फिटनेस की सटीक जांच सुनिश्चित करने के वास्ते दिल्ली सरकार ने तहखंड और नंद नगरी में दो अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए हैं। इन विशेष केंद्रों पर वाहनों की फिटनेस की जांच पूरी तरह से आधुनिक मशीनों और तकनीक के जरिए की जाएगी। इन दोनों ही आधुनिक स्टेशनों की कार्यक्षमता बहुत अधिक है और प्रत्येक स्टेशन हर साल लगभग बहत्तर हजार वाहनों की जांच करने में सक्षम है। इस प्रकार से ये दोनों केंद्र मिलकर सालाना करीब एक लाख चौवालीस हजार कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच का जिम्मा संभालेंगे।

पेट्रोल पंपों पर कैमरों से निगरानी

राजधानी में पहले ही यह नियम सख्ती से लागू किया गया है कि वैध प्रदूषण नियंत्रण जांच सर्टिफिकेट के बिना किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा। इस नियम के कड़ाई से पालन के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे और आधुनिक अनाउंसमेंट सिस्टम स्थापित किए गए हैं। इन सभी कैमरों को सीधे परिवहन विभाग के पोर्टल के साथ एकीकृत कर दिया गया है। जैसे ही कोई बिना वैध पीयूसीसी के ईंधन डलवाने के लिए पहुंचता है, कैमरे तुरंत वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेते हैं और परिसर में चेतावनी की उद्घोषणा होने लगती है.

सवाल-जवाब

दिल्ली सरकार सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार 700 से अधिक प्रदूषण जांच केंद्रों को अपग्रेड कर रही है और पेट्रोल पंपों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रही है।
पीयूसीसी केंद्रों को अपग्रेड करने के पीछे मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य वाहनों की जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और गड़बड़ी की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म करना है।
कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए कौन से नए केंद्र शुरू किए गए हैं?
दिल्ली सरकार ने तहखंड और नंद नगरी में दो अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर शुरू किए हैं।
प्रत्येक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन की वार्षिक क्षमता कितनी है?
प्रत्येक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन हर साल लगभग 72,000 वाहनों की जांच करने की क्षमता रखता है।
पेट्रोल पंपों पर कौन सी नई तकनीक लगाई गई है?
सभी पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरे और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाए गए हैं जो परिवहन विभाग के पोर्टल से जुड़े हैं।
बिना वैध प्रदूषण सर्टिफिकेट के पेट्रोल पंपों पर क्या होता है?
बिना पीयूसीसी के ईंधन लेने पहुंचे वाहनों की नंबर प्लेट कैमरे पढ़ लेते हैं और उद्घोषणा होने लगती है।
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