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रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ट्रेन से अयोध्या पहुंचे, आज मुख्यमंत्री योगी से होगी पहली मुलाकातउत्तर प्रदेश
8 सित॰ 2026, 1:32 pm (4 दिन पहले)· 2

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ट्रेन से अयोध्या पहुंचे, आज मुख्यमंत्री योगी से होगी पहली मुलाकात

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ जितेंद्र मिश्रा आज सुबह ट्रेन से अयोध्या पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला दर्शन के साथ उनसे मुलाकात करेंगे।

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ की कमान संभालने के तुरंत बाद रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा आज सुबह ट्रेन से अयोध्या पहुंच गए। कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी पहली आधिकारिक मुलाकात होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आज खुद अयोध्या के दौरे पर हैं और वह रामलला के दर्शन भी करेंगे। नए सीईओ के पदभार संभालने के बाद यह पहला मौका है जब मुख्यमंत्री और जितेंद्र मिश्रा आमने-सामने बैठकर मंदिर के कामकाज पर बातचीत करेंगे।

2 सितंबर को हुआ था सीईओ पद पर नाम का ऐलान

बीते 2 सितंबर को ही जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगी थी और तय हुआ था कि वही राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगे। जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले हैं। वह करीब 4 महीने पहले, यानी 30 अप्रैल 2026 को ही भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए थे। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर, दोनों ही अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी। रिटायर होने से ठीक पहले वह वायुसेना की पश्चिमी कमान के चीफ के पद पर तैनात रहे। उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल यानी एसवाईएसएम, अति विशिष्ट सेवा मेडल यानी एवीएसएम और विशिष्ट सेवा मेडल यानी वीएसएम, तीनों सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

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दान चोरी के विवाद के बाद बनाया गया था सीईओ का पद

दरअसल इससे पहले राम मंदिर के दान में चोरी का एक मामला सामने आया था, जिसकी देश के साथ-साथ विदेश में भी खूब चर्चा हुई थी। यह मामला इतना तूल पकड़ गया था कि राम मंदिर ट्रस्ट को सख्त कदम उठाने पड़े। इसके बाद ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा, दोनों को उनके पदों से हटा दिया था। इसी घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट के भीतर यह सहमति बनी कि मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज, दान-व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की सीधी निगरानी के लिए एक अलग से सीईओ नियुक्त किया जाना चाहिए, ताकि आगे इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

साथ ही ट्रस्ट में शामिल किए गए तीन नए ट्रस्टी

जिस दिन जितेंद्र मिश्रा के सीईओ बनने का ऐलान हुआ, ठीक उसी दिन राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टी भी शामिल किए गए थे। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के ही मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव के नाम शामिल हैं। ट्रस्ट के फैसलों में अब इन तीनों की भी भागीदारी रहेगी।

पदभार संभालने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने जताई थी खुशी

सीईओ का पदभार संभालने के बाद जितेंद्र मिश्रा ने कहा था, "मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं कि इतने सारे उम्मीदवारों में से मुझे चुना गया।" उन्होंने आगे यह भी बताया कि वायु सेना में देश की 43 साल की सेवा देने के बाद भगवान राम ने उन्हें श्री राम मंदिर और श्री राम भक्तों की सेवा करने का यह अवसर दिया है, और वह इसे प्रभु का आशीर्वाद ही मानते हैं।

नियुक्ति पर कांग्रेस ने भी उठाए थे सवाल

जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का सीईओ बनाए जाने के फैसले पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस का कहना था कि मंदिर से जुड़े कामकाज को संभालने की जिम्मेदारी साधु-संतों के पास होनी चाहिए, किसी रिटायर्ड अधिकारी के पास नहीं। हालांकि इस विरोध के बावजूद ट्रस्ट प्रबंधन अपने फैसले पर कायम रहा और जितेंद्र मिश्रा ने अपना कार्यभार संभाल लिया।

सवाल-जवाब

जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?
वह रिटायर्ड एयर मार्शल हैं, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले हैं और अब राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ बनाए गए हैं।
जितेंद्र मिश्रा को सीईओ कब बनाया गया?
बीते 2 सितंबर को उनके नाम पर सीईओ पद के लिए मुहर लगी थी।
राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ का पद क्यों बनाया गया?
मंदिर के दान में चोरी के मामले के बाद कामकाज की बेहतर निगरानी के लिए यह पद बनाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आज अयोध्या क्यों गए हैं?
वह रामलला के दर्शन करने और नए सीईओ जितेंद्र मिश्रा से मुलाकात करने अयोध्या पहुंचे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में कितने नए ट्रस्टी बनाए गए?
तीन नए ट्रस्टी बनाए गए, महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव।
चोरी के मामले के बाद किन्हें पद से हटाया गया था?
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा को उनके पदों से हटाया गया था।
जितेंद्र मिश्रा वायु सेना से कब रिटायर हुए थे?
वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए थे।
क्या इस नियुक्ति पर कोई विवाद हुआ?
हां, कांग्रेस पार्टी ने इस नियुक्ति पर सवाल उठाए थे और कहा था कि यह जिम्मेदारी साधु-संतों की होनी चाहिए।
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