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सतना में किसान अब सोयाबीन संग उगा रहे मुनाफे वाला पपीतामध्य प्रदेश
6 जुल॰ 2026, 8:22 am (69 दिन पहले)· 2

सतना में किसान अब सोयाबीन संग उगा रहे मुनाफे वाला पपीता

मध्य प्रदेश के सतना जिले में किसान अब सोयाबीन, धान जैसी फसलों के साथ खेत की मेड़ों पर पपीता लगाकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं, जुलाई का महीना रोपाई के लिए खास मौका लेकर आया है।

मानसून की पहली फुहारों के साथ ही मध्य प्रदेश के सतना जिले में किसान अब खेती में एक नया प्रयोग करते दिख रहे हैं। धान, सोयाबीन, तिल और मूंग जैसी परंपरागत फसलों के साथ पपीते की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बनती जा रही है। बरसात का मौसम पपीते की रोपाई के लिए सबसे मुफीद माना जाता है और यही वजह है कि जुलाई का महीना किसानों के लिए बड़ा मौका लेकर आया है। जिन किसानों के पास पहले से तैयार पौधे मौजूद हैं, वे इसी महीने सीधे खेत में रोपाई कर सकते हैं, जबकि जिन्होंने अभी तैयारी शुरू नहीं की, उनके पास भी मौका बाकी है।

सोयाबीन-धान की मेड़ों पर भी उग सकता है पपीता

सोहावल विकासखंड की उद्यान विकास अधिकारी सुधा पटेल के मुताबिक, पपीते की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे किसी भी मुख्य फसल के साथ आसानी से उगाया जा सकता है। जो किसान धान, सोयाबीन, तिल या मूंग बो चुके हैं, वे खेत की मेड़ों पर पपीते के पौधे लगाकर बिना अतिरिक्त जमीन खर्च किए अलग से कमाई कर सकते हैं। इतना ही नहीं, आम, अमरूद या केले के बगीचे वाले किसान भी इसका फायदा उठा सकते हैं। अगर इन बगीचों में पौधों के बीच पर्याप्त जगह खाली पड़ी है, तो वहां भी पपीता रोपा जा सकता है। इससे न सिर्फ जमीन का पूरा इस्तेमाल हो पाता है, बल्कि किसानों के लिए आमदनी का एक नया स्रोत भी खुल जाता है।

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जुलाई में देर नहीं हुई, बस तरीका बदलना होगा

आम तौर पर पपीते की नर्सरी जून में ही तैयार कर ली जाती है, लेकिन अगर किसी वजह से इसमें देरी हो गई है तो घबराने की जरूरत नहीं है। जुलाई में भी पपीते की खेती शुरू की जा सकती है, बस इस समय सीधे बीज बोने के बजाय पहले से तैयार पौधों की रोपाई करना ज्यादा फायदेमंद रहता है। जो किसान बिल्कुल नई नर्सरी से शुरुआत करना चाहते हैं, वे अभी बीज बो सकते हैं। इन बीजों से तैयार पौधे करीब 40 से 45 दिन में रोपाई लायक हो जाते हैं, यानी अगस्त-सितंबर तक ये पौधे मुख्य खेत में लगाए जा सकते हैं।

ताइवान रेड लेडी जैसी किस्में दे रहीं बंपर पैदावार

पपीते की खेती में हाइब्रिड किस्मों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि ये कम समय में ज्यादा फल देती हैं। ताइवान रेड लेडी, पूसा ताइवान, पूसा नन्हा और पूसा डेलिसियस जैसी किस्में इनमें सबसे ज्यादा भरोसेमंद मानी जाती हैं। एक एकड़ खेत के लिए करीब 200 से 250 ग्राम बीज ही काफी होते हैं। रोपाई के बाद पौधे को पूरी तरह तैयार फसल में बदलने में करीब 9 से 10 महीने लगते हैं। पौधे लगाने के 3 से 4 महीने के भीतर ही फूल आने शुरू हो जाते हैं और इसके अगले 5 से 6 महीनों में फल पककर तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि एक स्वस्थ पौधा एक बार लगने के बाद लगातार 2 से 3 साल तक भरपूर उत्पादन देता रहता है, यानी किसान की जेब में लंबे समय तक कमाई आती रहती है।

प्रो ट्रे में नर्सरी तैयार करने का पूरा तरीका

उद्यान विभाग की सलाह है कि पपीते के बीज कभी सीधे खेत में नहीं बोने चाहिए, बल्कि पहले प्रो ट्रे में नर्सरी तैयार की जानी चाहिए। इसके लिए 3 भाग कोकोपीट, 1 भाग वर्मीक्यूलाइट और 1 भाग परलाइट को आपस में मिलाकर 50 छेद वाली प्रो ट्रे में भर दिया जाता है। इसके बाद हर छेद में उपचारित बीज को करीब आधा इंच गहराई पर बोया जाता है और फव्वारे से हल्की सिंचाई की जाती है। सही देखभाल मिलने पर 6 से 9 दिनों के भीतर बीज अंकुरित हो जाते हैं। इसके बाद नेट हाउस में नियमित हल्की सिंचाई करते हुए पौधों की देखभाल की जाए तो 40 से 45 दिनों में ये पौधे खेत में रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। जुलाई के महीने में विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि नई बुवाई करने के बजाय तैयार पौधों की सीधी रोपाई करना ज्यादा बेहतर रहेगा।

मोजेक रोग से बचाव और बेहतर उत्पादन के देसी नुस्खे

पपीते की खेती में मोजेक रोग सबसे बड़ा खतरा माना जाता है, इसलिए समय-समय पर कीटनाशक और फफूंदनाशक का छिड़काव करते रहना जरूरी है। इसके लिए एक असरदार घरेलू उपाय भी अपनाया जा सकता है। प्लास्टिक के डिब्बे में मट्ठा भरकर उसे 15 से 20 दिनों तक सड़ने दें और इसमें नीम की पत्तियां और नीम की खली मिला दें। तैयार मिश्रण को पानी में घोलकर पौधों पर स्प्रे किया जा सकता है। इसके अलावा गौमूत्र का इस्तेमाल भी कीट-रोगों से बचाव में कारगर माना जाता है। बेहतर बढ़वार और ज्यादा उत्पादन के लिए हर पौधे में 10 से 15 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद डालना भी जरूरी है। अगर किसान सही समय पर रोपाई करें, पौधों को उचित पोषण दें और रोग प्रबंधन पर ध्यान रखें, तो पपीते की खेती बेहद कम लागत में भी अच्छी और लंबे समय तक चलने वाली कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है।

सवाल-जवाब

पपीते की रोपाई के लिए जुलाई का महीना क्यों अहम है?
बरसात का मौसम पपीते की रोपाई के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है, इसलिए जिन किसानों के पास तैयार पौधे हैं वे जुलाई में सीधे खेत में रोपाई कर सकते हैं।
किन फसलों के साथ पपीता लगाया जा सकता है?
धान, सोयाबीन, तिल और मूंग जैसी फसलों के साथ खेत की मेड़ों पर पपीता लगाया जा सकता है, साथ ही आम, अमरूद और केले के बगीचों में खाली जगह में भी इसे लगाया जा सकता है।
कौन सी हाइब्रिड किस्में बेहतर उत्पादन देती हैं?
ताइवान रेड लेडी, पूसा ताइवान, पूसा नन्हा और पूसा डेलिसियस जैसी किस्में जल्दी फल देने के साथ ज्यादा उत्पादन के लिए बेहतर मानी जाती हैं।
एक एकड़ खेत के लिए कितना बीज चाहिए?
एक एकड़ क्षेत्र के लिए करीब 200 से 250 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं।
रोपाई के कितने महीने बाद पपीते की फसल तैयार होती है?
रोपाई के करीब 9 से 10 महीने बाद फसल पूरी तरह तैयार हो जाती है, पौधे लगाने के 3 से 4 महीने बाद फूल आना शुरू होता है और अगले 5 से 6 महीनों में फल पककर तैयार हो जाते हैं।
प्रो ट्रे में नर्सरी कैसे तैयार करें?
3 भाग कोकोपीट, 1 भाग वर्मीक्यूलाइट और 1 भाग परलाइट मिलाकर 50 छेद वाली प्रो ट्रे में भरें और हर छेद में उपचारित बीज आधा इंच गहराई पर बोकर हल्की सिंचाई करें, बीज 6 से 9 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं।
मोजेक रोग से बचाव के लिए कौन सा घरेलू उपाय अपनाया जा सकता है?
प्लास्टिक के डिब्बे में मट्ठा 15 से 20 दिनों तक सड़ाकर उसमें नीम की पत्तियां और खली मिलाकर पानी में घोलकर स्प्रे किया जा सकता है, इसके अलावा गौमूत्र का भी उपयोग किया जा सकता है।
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