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श्योपुर में रमाबाई ने अपनी जमीन के लिए 32 घंटे टावर की चोटी पर बिताए, आखिरकार झुका प्रशासनमध्य प्रदेश
21 जुल॰ 2026, 4:15 am (54 दिन पहले)· 1

श्योपुर में रमाबाई ने अपनी जमीन के लिए 32 घंटे टावर की चोटी पर बिताए, आखिरकार झुका प्रशासन

श्योपुर जिले के श्यार्दे गांव की रमाबाई अपनी पट्टे वाली जमीन से एक दबंग का अवैध कब्जा हटवाने की मांग को लेकर 60 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर 32 घंटे तक डटी रहीं, प्रशासन के आश्वासन के बाद ही वह नीचे उतरीं।

श्योपुर जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र में एक महिला ने अपनी ही जमीन वापस पाने के लिए 60 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर चढ़कर पूरे 32 घंटे गुजार दिए। श्यार्दे गांव की रहने वाली रमाबाई सरकारी दूरसंचार कंपनी के इस टावर के सबसे ऊपरी छोर पर डटी रहीं, जबकि नीचे जमीन पर उनके परिवार और गांव वाले धरने पर बैठे रहे। लंबी बातचीत और प्रशासन के ठोस आश्वासन के बाद ही वह आखिरकार सुरक्षित नीचे उतरीं।

जमीन पर कब्जे की शिकायत पर नहीं हुई सुनवाई

रमाबाई का आरोप है कि जिस जमीन का पट्टा उनके नाम पर दर्ज है, उस पर इलाके के एक दबंग व्यक्ति ने अवैध कब्जा जमा रखा है। वह लंबे समय से प्रशासन के सामने यह मांग रखती आ रही थीं कि उनकी निजी पट्टे वाली जमीन को इस कब्जे से मुक्त कराया जाए, लेकिन बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कब्जाधारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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उल्टा महिला को ही बेदखल करने पहुंचा प्रशासन

हैरानी की बात यह रही कि प्रशासन ने पट्टे वाली जमीन पर काबिज दबंग के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, उस सरकारी जमीन से रमाबाई को ही बेदखल करने की तैयारी कर ली, जिस पर वह फिलहाल रह रही हैं। इसी एकतरफा कार्रवाई से नाराज होकर रमाबाई विरोध में टावर पर चढ़ गईं। उनकी मांग बिल्कुल साफ थी, जब तक उनकी पट्टे वाली जमीन से दबंग का कब्जा नहीं हटाया जाता, तब तक वह सरकारी जमीन खाली नहीं करेंगी।

बिना अन्न-जल ग्रहण किए बीते 32 घंटे

तेज गर्मी और भारी तनाव के बीच रमाबाई ने टावर के ऊपरी हिस्से पर पूरे 32 घंटे बिताए और इस दौरान उन्होंने न कुछ खाया और न ही पानी पिया। टावर के नीचे उनके परिजन और गांव के अन्य लोग भी लगातार धरने पर डटे रहे और प्रशासन के जवाब का इंतजार करते रहे। परिजनों ने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि प्रदर्शन के दौरान भूख-प्यास या किसी और वजह से रमाबाई को कुछ भी नुकसान हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी।

प्रशासन के दखल के बाद नीचे उतरीं रमाबाई

मामला तूल पकड़ता देख प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे और रमाबाई को सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाने में जुट गए। करीब 32 घंटे की लंबी मशक्कत के बाद प्रशासन ने फिलहाल उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई रोक दी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही विवाद से जुड़े दोनों पक्षों को साथ बैठाकर बातचीत कराई जाएगी और उनकी पट्टे वाली जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। यही आश्वासन मिलने के बाद रमाबाई आखिरकार टावर से नीचे उतरने को राजी हुईं।

सवाल-जवाब

रमाबाई कौन हैं और उन्होंने टावर पर चढ़ने का फैसला क्यों किया?
रमाबाई श्योपुर जिले के श्यार्दे गांव की रहने वाली हैं, जिन्होंने अपनी पट्टे वाली जमीन से एक दबंग व्यक्ति का अवैध कब्जा हटवाने की मांग को लेकर बीएसएनएल टावर पर चढ़ने का फैसला किया।
यह घटना कहां हुई?
यह घटना श्योपुर जिले के बीरपुर थाना क्षेत्र के श्यार्दे गांव में हुई।
रमाबाई कितने समय तक टावर पर रहीं?
रमाबाई करीब 32 घंटे तक 60 फीट ऊंचे टावर के सबसे ऊपरी हिस्से पर डटी रहीं।
टावर पर रहते हुए रमाबाई ने खाना-पानी लिया या नहीं?
नहीं, भीषण गर्मी और तनाव के बावजूद इस दौरान उन्होंने कुछ भी खाया-पिया नहीं।
प्रशासन ने आखिर में क्या फैसला लिया?
प्रशासन ने फिलहाल रमाबाई को बेदखल करने की कार्रवाई रोक दी और भरोसा दिलाया कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराकर पट्टे वाली जमीन को कब्जे से मुक्त कराने के प्रयास किए जाएंगे।
रमाबाई के परिजनों ने प्रशासन को क्या चेतावनी दी थी?
परिजनों ने कहा था कि भूख-प्यास या किसी और वजह से रमाबाई को कुछ हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रशासन की होगी।
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