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संभल में गंगा किनारे की 1144 बीघा सरकारी जमीन घोटाले में पुलिस का शिकंजा, छह गिरफ्तारउत्तर प्रदेश
4 जुल॰ 2026, 1:35 am (71 दिन पहले)· 2

संभल में गंगा किनारे की 1144 बीघा सरकारी जमीन घोटाले में पुलिस का शिकंजा, छह गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गंगा किनारे की 1144 बीघा सरकारी जमीन फर्जी तरीके से दूसरों के नाम करने के मामले में पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गंगा नदी किनारे की सरकारी जमीन से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि गंगा किनारे की 1144 बीघा कीमती सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से दूसरे लोगों के नाम कर दिया गया। इस पूरे खेल में शामिल रहने के चलते तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह को पहले ही नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। पुलिस ने अब इस मामले में ओमवीर सिंह, सरकारी वकील जय भारद्वाज और पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद जमीन का रिकॉर्ड संभालने वाले पूरे राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

गुन्नौर तहसील के गांवों में फर्जी दस्तावेजों से बांटी गई जमीन

यह पूरा मामला गुन्नौर तहसील के अंतर्गत आने वाले असदपुर, सुखैला और इनके आसपास के गांवों का है। यहां गंगा किनारे झाऊ श्रेणी की बेशकीमती सरकारी जमीन मौजूद थी, जो उस समय चकबंदी प्रक्रिया के दायरे में आती थी। पुलिस प्रशासन के मुताबिक भू-माफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इस जमीन के फर्जी कागजात तैयार कराए गए और गैरकानूनी ढंग से पट्टे स्वीकृत करा लिए गए। जैसे ही यह गड़बड़ी सामने आई, लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर 2 जुलाई को गुन्नौर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इस घोटाले में कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

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2019 में नियमों को दरकिनार कर दोबारा बांटी गई जमीन

जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। साल 2018 में भी इसी जमीन से जुड़े कागजात रद्द किए जा चुके थे और उस वक्त कई लोगों पर मुकदमे भी दर्ज हुए थे। इसके बावजूद साल 2019 में तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 162 लोगों के नाम पर दोबारा पट्टे मंजूर कर दिए। जांच कमेटी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इस बार जमीन बांटते वक्त जरूरी नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई। न तो ग्राम सभा की कोई खुली बैठक बुलाई गई, न सभी की सहमति ली गई और न ही लॉटरी के जरिए पट्टे बांटे गए। इसके अलावा जमीन के हिस्से और लाभ पाने वालों की गिनती में भी बड़ी गड़बड़ी पाई गई।

जांच रिपोर्ट मिलते ही शुरू हुई गिरफ्तारियां

4 जून 2026 को विशेष जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। रिपोर्ट मिलते ही पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी। शुक्रवार को पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें नौकरी से बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व सरकारी वकील जय भारद्वाज, उस समय के चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह और नौकरी से हटाए गए चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह शामिल हैं। इन सभी को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक बाकी बचे आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और कुछ अन्य संदिग्ध अधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच चल रही है।

सवाल-जवाब

संभल में कितनी सरकारी जमीन का घोटाला सामने आया है?
गंगा नदी किनारे की 1144 बीघा सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से दूसरों के नाम करने का मामला सामने आया है।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, सरकारी वकील जय भारद्वाज और पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
यह घोटाला किस इलाके से जुड़ा है?
यह मामला गुन्नौर तहसील के असदपुर, सुखैला और आसपास के गांवों का है, जहां गंगा किनारे झाऊ श्रेणी की सरकारी जमीन थी।
एफआईआर किसकी शिकायत पर और कब दर्ज हुई?
लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर 2 जुलाई को गुन्नौर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
इस मामले में कुल कितने लोगों को आरोपी बनाया गया है?
इस घोटाले में कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
2019 में जमीन दोबारा किसके नाम पर बांटी गई थी?
तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर 162 लोगों के नाम पर दोबारा पट्टे मंजूर कर दिए थे।
जांच कमेटी की रिपोर्ट कब सौंपी गई?
विशेष जांच कमेटी ने 4 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी।
गिरफ्तार किए गए पांच लोग कौन हैं?
शुक्रवार को गिरफ्तार हुए पांच लोगों में एसडीएम ओमवीर सिंह, वकील जय भारद्वाज, चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, कानूनगो राजवीर सिंह और चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह शामिल हैं।
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