राजस्थान के कोटा शहर में स्थित ग्यारह सौ साल पुराने चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के मामले में पुलिस ने अपनी तफ्तीश पूरी करते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस सनसनीखेज वारदात के पीछे करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति और मठ पर वर्चस्व स्थापित करने की लालसा मुख्य वजह रही है। कोटा पुलिस द्वारा इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी वकील, सुपारी किलर और पूर्व पुजारी समेत सात आरोपियों के साथ एक विधि से संघर्षरत किशोर के खिलाफ पुख्ता सबूतों के आधार पर चालान पेश किया गया है ताकि अपराधियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
संपत्ति और वर्चस्व के लिए रची गई खूनी साजिश
जांच के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य आया कि पूरा विवाद सात सौ पचास बीघा बेशकीमती जमीन और बैंक खातों में जमा चार करोड़ तैंतीस लाख रुपये की भारी-भरकम संपत्ति को हड़पने से जुड़ा हुआ था। इस पूरी खूनी साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि एडवोकेट संतोष कुमार राय था, जिसने मठ की संपत्ति पर कब्जा जमाने के इरादे से महंत देवानंद महाराज को रास्ते से हटाने का षड्यंत्र रचा था। इस जघन्य कृत्य को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अपराधियों को केवल एक लाख रुपये की सुपारी देकर तैयार किया गया था, ताकि वे इस वारदात को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।
साजिश छिपाने के लिए रची गई थी खास चाल
पुलिस की पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि मुख्य षड्यंत्रकारी संतोष राय ने अपनी संलिप्तता छिपाने और पुलिस के शक से बचने का नायाब तरीका निकाला था। घटना से ठीक पहले वह जयपुर के एक अस्पताल में पैर की सर्जरी के बहाने खुद को भर्ती करा लिया था ताकि वह अदालत या पुलिस के सामने शहर से बाहर होने का मजबूत बहाना पेश कर सके। पांच जून की रात को बदमाशों ने गहरी नींद में सो रहे देवानंद महाराज पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमले किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह डरावना खुलासा हुआ था कि महंत के शरीर पर करीब छब्बीस गंभीर घाव आए थे, जिनमें से अधिकांश वार उनकी छाती और पीठ पर किए गए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई
मठ के कोषाध्यक्ष बृजमोहन गुर्जर ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ बोरखेड़ा थाने में इस घटना की सूचना दी थी, जिसके आधार पर पुलिस ने फौरन हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। गंभीर रूप से घायल अवस्था में महंत को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस पेचीदा अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए कोटा पुलिस ने साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों का पूरा सहारा लिया। एसआईटी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने दिन-रात मेहनत करके इस सनसनीखेज वारदात का पर्दाफाश किया और ग्यारह जून तक सभी मुख्य आरोपियों को शिकंजे में ले लिया।
केस ऑफिसर स्कीम के तहत तेज सुनवाई
बोरखेड़ा थाना पुलिस ने इस बहुचर्चित मामले में अनुसंधान पूरा कर माननीय न्यायालय में चार्जशीट सौंप दी है। इस गंभीर प्रकरण को राजस्थान सरकार की केस ऑफिसर स्कीम के तहत लिया गया है ताकि मुकदमे की सुनवाई तेजी से हो सके और दोषियों को कानून के तहत जल्द से जल्द कठोर सजा मिल सके। अदालत में इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों पर शिकंजा कसा जा रहा है।



















