भारतीय संसद के सत्र के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के विशालतम सार्वजनिक उपक्रम, भारतीय रेलवे, में रोजगार सृजन और यात्री सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े और नीतियां प्रस्तुत कीं। लोकसभा और राज्यसभा में दिए गए लिखित तथा मौखिक वक्तव्यों के माध्यम से रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि 2014 से जून 2026 तक की 12 वर्षों की अवधि में कुल 5.56 लाख अभ्यर्थियों को पारदर्शी परीक्षाओं के जरिए रेलवे की विभिन्न श्रेणियों में नियुक्तियां दी गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने ट्रेनों में यात्रा के दौरान टिकट चेकिंग कर्मचारियों यानी टीटीई के कार्यभार को संतुलित करने के लिए नए तैनाती मापदंडों का ब्योरा दिया और प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस तथा अमृत भारत एक्सप्रेस के टिकट रद्दीकरण एवं रिफंड से जुड़े संशोधित नियमों की जानकारी भी सार्वजनिक की।
12 वर्षों में 5.56 लाख भर्तियां और यूपीए शासनकाल से तुलना
लोकसभा में रोजगार संबंधी आंकड़े साझा करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2014 से लेकर जून 2026 तक भारतीय रेलवे ने 5.56 लाख लोगों को स्थायी रोजगार प्रदान किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग जोनों में संरक्षा, परिचालन और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप नौकरियां दी गईं। आंकड़े प्रस्तुत करते हुए मंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि केवल दक्षिण रेलवे के अंतर्गत ही 50,485 युवाओं को विभिन्न पदों पर भर्ती किया गया।
सदन के पटल पर पिछली सरकारों के प्रदर्शन से तुलना प्रस्तुत करते हुए रेल मंत्री ने पूर्ववर्ती यूपीए गठबंधन सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल का ब्योरा भी दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दौरान कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार के शासनकाल में रेलवे में कुल 4.11 लाख अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की गई थीं। मंत्री के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में भर्ती प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया गया है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सभी क्षेत्रीय जोनों में परीक्षाओं का संचालन निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत पूरी शुचिता के साथ किया जाता है और तकनीकी बदलावों के साथ उभरती नई जरूरतों के आधार पर भर्ती विज्ञापनों की रूपरेखा तैयार की जाती है।
टीटीई पर काम का दबाव और रेलवे के नए डिप्लॉयमेंट नियम
संसदीय कार्यवाही के दौरान नांदेड़ से कांग्रेस सांसद रवींद्र वसंतराव चव्हाण ने ट्रेनों में टीटीई कर्मचारियों पर बढ़ते काम के बोझ का मुद्दा उठाया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर रेलवे की ट्रेन संख्या 22401/22402 का उदाहरण देते हुए सवाल किया, जो दिल्ली के सराय रोहिल्ला स्टेशन से जम्मू कश्मीर के उधमपुर के बीच संचालित होती है। सांसद ने पूछा कि क्या व्यस्त मार्गों पर यात्रा करने वाली ट्रेनों में अतिरिक्त टिकट जांच कर्मियों को तैनात करने की कोई योजना अथवा व्यवस्था मौजूद है।
इस सवाल का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे द्वारा लागू किए गए नए प्रशासनिक मानकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रेनों में टीटीई कर्मचारियों की संख्या ट्रेन की संरचना और डिब्बों के प्रकार पर निर्भर करती है। नए दिशानिर्देशों के तहत, एक टीटीई को अधिकतम 5 एसी डिब्बों की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। वहीं यदि ट्रेन में 'चेयर कार' या 'स्लीपर' डिब्बे लगे हैं, तो प्रत्येक 3 डिब्बों पर एक टीटीई की तैनाती की जाती है। रेल मंत्री के अनुसार इस व्यवस्था से उपलब्ध जनशक्ति का अनुकूलतम उपयोग संभव होता है, जिससे टिकट चेकिंग का काम प्रभावी ढंग से संपन्न होता है और साथ ही यात्रियों की समस्याओं का त्वरित निवारण भी हो पाता है। उन्होंने जोड़ा कि जोनल रेलवे को समय-समय पर कर्मचारियों के बेहतर प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
वेटिंग व कैंसिल टिकट आय रिकॉर्ड पर स्पष्टीकरण
राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में रेल मंत्री ने टिकट रद्दीकरण से प्राप्त होने वाले राजस्व के प्रबंधन पर स्थिति साफ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे रद्द कराए गए टिकटों अथवा प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) वाले टिकटों से होने वाली कमाई का अलग से क्षेत्र-वार या ज़ोन-वाइज़ रिकॉर्ड नहीं रखता है। संपूर्ण आय को केंद्रीय प्रणाली के माध्यम से समेकित रूप से दर्ज किया जाता है।
वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस टिकट कैंसिलेशन व रिफंड नियम
रेल मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि आधुनिक सुविधाओं से लैस वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस के टिकटों पर लागू होने वाले कैंसिलेशन प्रभार तथा रिफंड की समय-सीमा अन्य सामान्य मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के नियमों से भिन्न हैं। इन विशेष ट्रेनों के 'कन्फर्म' टिकट को रद्द करने की स्थिति में निम्नलिखित कटौती की शर्तें तय की गई हैं
- प्रस्थान से 72 घंटे से अधिक पहले: यदि कोई यात्री ट्रेन के प्रस्थान समय से कम से कम 72 घंटे पूर्व अपना कन्फर्म टिकट रद्द कराता है, तो कुल किराए का 25 प्रतिशत शुल्क काटा जाता है और 75 प्रतिशत राशि रिफंड कर दी जाती है।
- प्रस्थान से 72 घंटे से 8 घंटे के बीच: यदि टिकट को प्रस्थान समय से 72 घंटे और 8 घंटे के समयांतराल के दौरान रद्द किया जाता है, तो किराए में से 50 प्रतिशत की कटौती की जाती है और आधी राशि लौटाई जाती है।
- प्रस्थान से 8 घंटे से कम समय पर: यदि ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 8 घंटे से कम समय शेष रहने पर टिकट रद्द कराया जाता है, तो यात्री को कोई रिफंड नहीं दिया जाता और 100 प्रतिशत किराया जब्त हो जाता है।
रेल मंत्री द्वारा संसद में दी गई इन जानकारियों से जहां एक ओर रेलवे की भर्ती रफ्तार का खाका सामने आया है, वहीं दूसरी ओर यात्रियों को प्रीमियम ट्रेनों में सफर से जुड़ी रिफंड प्रक्रिया और ट्रेन कर्मियों के डिप्लॉयमेंट नियमों की स्पष्ट जानकारी हासिल हुई है।



















