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हथियार की तलाश में सागर पुलिस ने डाला छापा, ऑटो चालक के घर से मिले 3 करोड़ रुपएमध्य प्रदेश
17 अग॰ 2026, 3:23 am (3 घंटे पहले)· 2

हथियार की तलाश में सागर पुलिस ने डाला छापा, ऑटो चालक के घर से मिले 3 करोड़ रुपए

गोपालगंज पुलिस ने सोशल मीडिया पर बंदूक के साथ फोटो देखने के बाद छापा मारा था, लेकिन वहां हथियारों के बजाय बैग में भरकर रखी करीब 3 करोड़ रुपए की नकदी बरामद हुई।

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अवैध हथियारों की तलाश में गई पुलिस टीम के हाथ नोटों का बड़ा खजाना लग गया। एक स्थानीय मकान की तलाशी के दौरान पुलिस को बंदूकों या कारतूसों की जगह नोटों से भरे कई बड़े बैग मिले, जिनमें करीब 3 करोड़ रुपए की भारी-भरकम नकदी रखी हुई थी। यह पूरी बरामदगी एक ऑटो चालक के परिवार से जुड़े घर से हुई है। हथियारों की सामान्य जांच के दौरान हुई इतनी बड़ी वित्तीय बरामदगी को देखकर पुलिस अधिकारी और आसपास के इलाके के लोग पूरी तरह हैरान रह गए।

सोशल मीडिया फोटो से मिला सुराग और पड़ा छापा

यह पूरी कार्रवाई रविवार सुबह गोपालगंज थाना पुलिस की एक विशेष टीम द्वारा अंजाम दी गई। पुलिस अधिकारियों को सूचना मिली थी कि सोशल मीडिया पर एक युवक की हथियार के साथ फोटो वायरल हो रही है, जिसमें वह खुलेआम बंदूक का प्रदर्शन करता नजर आ रहा है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सौरभ अहिरवार के मकान पर दबिश दी, जिनके पिता का नाम राजेश अहिरवार है। पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य घर के भीतर छिपाकर रखे गए उस अवैध असलहे को जब्त करना था, जिसे इंटरनेट पर पोस्ट किया गया था। हालांकि, जब पुलिसकर्मियों ने मकान के कमरों की गहन तलाशी शुरू की, तो वहां कोई हथियार मिलने के बजाय नोटों से ठसाठस भरे कई बैग बरामद हुए।

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मशीन से 5 घंटे तक चली नोटों की गिनती

मकान में नोटों के बंडल इतनी बड़ी संख्या में मौजूद थे कि पुलिस कर्मचारियों के लिए उन्हें हाथों से गिन पाना पूरी तरह असंभव था। स्थिति को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मौके पर ही तुरंत नोट गिनने वाली इलेक्ट्रॉनिक मशीनें मंगवाईं। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और आधिकारिक रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए राजस्व विभाग की टीम को भी तुरंत मौके पर बुलाया गया। पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को इस पूरी रकम को गिनने में लगभग 5 घंटे का लंबा समय लग गया। गिनती पूरी होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने खुलासा किया कि बरामद की गई कुल रकम लगभग 3 करोड़ रुपए है। इतने बड़े पैमाने पर अघोषित नकदी मिलने के बाद आयकर विभाग को भी इस मामले की औपचारिक जानकारी दे दी गई है।

भोपाल के सरकारी इंजीनियर से जुड़े तार और पूछताछ जारी

भारी मात्रा में नकदी मिलने के तुरंत बाद पुलिस अधिकारियों ने घर में मौजूद सदस्यों से नकदी के स्रोत को लेकर विस्तार से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान परिजनों ने दावा किया कि यह पैसा उनका नहीं है, बल्कि भोपाल में तैनात उनके एक रिश्तेदार का है, जो सरकारी विभाग में इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं। पुलिस अब इस दावे की प्रामाणिकता की गहराई से जांच कर रही है। इस मामले में पुलिस सौरभ अहिरवार और अंकित अहिरवार को हिरासत में लेकर लगातार पूछताछ कर रही है। जांच अधिकारी नकदी से जुड़े कागजात, बैंक खातों के विवरण और पैसों के वास्तविक स्रोत की कड़ियों को जोड़ रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी रकम किसी रिहाइशी मकान में क्यों रखी गई थी। इस घटना की खबर पूरे क्षेत्र में फैलते ही स्थानीय लोग भी स्तब्ध हैं।

सवाल-जवाब

सागर में पुलिस ने किस सूचना पर छापा मारा था?
पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक युवक की बंदूक के साथ फोटो देखने के बाद हथियार की तलाश में यह छापेमारी की थी।
छापेमारी के दौरान पुलिस को कुल कितनी नकदी मिली?
छापेमारी के दौरान पुलिस को बैगों में रखी कुल 3 करोड़ रुपए की नकदी बरामद हुई।
नोटों की गिनती में कितना समय लगा?
नोटों की मात्रा बहुत अधिक होने के कारण मशीनें मंगवाई गईं और राजस्व विभाग की मौजूदगी में गिनती पूरी करने में करीब 5 घंटे लगे।
परिवार के सदस्यों ने इतनी बड़ी रकम के बारे में क्या सफाई दी?
परिजनों ने दावा किया कि यह रकम भोपाल में पदस्थ उनके एक रिश्तेदार की है, जो सरकारी इंजीनियर हैं।
मामले में पुलिस किन लोगों से पूछताछ कर रही है?
पुलिस इस मामले में सौरभ अहिरवार और अंकित अहिरवार से गहन पूछताछ कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Ravikash Gupta@ravikash·24 मिनट पहले

यह मामला वित्तीय पारदर्शिता और बेहिसाब नकदी की अर्थव्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब एक साधारण परिवार के घर से तीन करोड़ रुपए मिलते हैं और तार भोपाल के किसी इंजीनियर से जुड़ते हैं, तो यह कॉर्पोरेट और सरकारी स्तर पर समानांतर अर्थव्यवस्था के गहरे गठजोड़ को उजागर करता है। आयकर विभाग की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस डिजिटल युग में इतनी भारी मात्रा में भौतिक नकदी का भंडारण किस वित्तीय नेटवर्क को पोषित कर रहा था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह मामला डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए वित्तीय अपराधों के खुलासे का एक बेहतरीन उदाहरण है। सोशल मीडिया पर एक साधारण हथियार की फोटो से शुरू हुई पुलिस की यह कार्रवाई अब हवाला, भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति के एक बड़े वित्तीय जाल तक पहुँच चुकी है। आयकर विभाग की एंट्री के बाद अब यह देखना अहम होगा कि क्या भोपाल के उस सरकारी इंजीनियर के तार किसी बड़े संगठित रैकेट से जुड़े हैं या यह किसी भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह मामला सिर्फ एक संयोग नहीं, बल्कि डिजिटल निगरानी और जमीनी खुफिया तंत्र के मेल का परिणाम है। जब एक ऑटो चालक के घर से तीन करोड़ जैसी भारी रकम मिलती है, तो यह स्पष्ट होता है कि छोटे मोहरों के पीछे बड़े वित्तीय और प्रशासनिक नेटवर्क काम कर रहे हैं। भोपाल के सरकारी इंजीनियर के कनेक्शन की जांच इस बात को तय करेगी कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार का है या इसमें किसी बड़े संगठित सिंडिकेट की संलिप्तता है।

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