दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने साल 2020 में एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हुए 32 वर्षीय युवक को 2.92 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दुर्घटना के कारण पीड़ित व्यक्ति 88 प्रतिशत तक स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया था। न्यायाधिकरण ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी की उस दलील को पूरी तरह से निरस्त कर दिया जिसमें कहा गया था कि पीड़ित ने घटना के समय हेलमेट नहीं पहना था, इसलिए दुर्घटना के लिए वह भी बराबर का जिम्मेदार था। अदालत ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि जब तक किसी यातायात नियम के उल्लंघन से हादसा होने का प्रत्यक्ष सबूत न हो, तब तक उसे सहभागी लापरवाही नहीं माना जा सकता।
हादसे का विवरण और पीड़ित की शारीरिक स्थिति
यह मामला नीलमणि चौहान द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा कर रहे थे। याचिका में दर्ज विवरण के अनुसार, 30 दिसंबर 2020 को नीलमणि अपने दोपहिया वाहन पर जा रहे थे, तभी लापरवाही और अत्यधिक तेज गति से कार चला रहे रमेश नाम के चालक ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। इस भयानक हादसे में नीलमणि की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से संवेदनहीन और निष्क्रिय हो गया।
चिकित्सकीय जांच में उनकी दिव्यांगता का स्तर 88 प्रतिशत स्थायी पाया गया। इस स्थिति के चलते पीड़ित जीवनभर के लिए बिना किसी बाहरी सहारे के खड़े होने या चलने में पूरी तरह असमर्थ हो गया है। न्यायाधिकरण ने अपने 12 अगस्त के आदेश में उल्लेख किया कि अदालत के रिकॉर्ड से यह साबित हो चुका है कि पीड़ित अपने दैनिक शारीरिक कार्यों और पेशाब करने तक के लिए एक सहायक पर निर्भर है, क्योंकि वह शारीरिक संवेदनाएं महसूस करने में असमर्थ है। दुर्घटना के बाद पीड़ित के नियोक्ता ने मानवीय आधार पर बड़ा दिल दिखाते हुए मामला सुलझने तक उसे वेतन देना जारी रखा था।
बीमा कंपनी के तर्कों को न्यायाधिकरण ने किया खारिज
मामले में बीमाकर्ता इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने अपना बचाव करते हुए दावा किया था कि पीड़ित ने हेलमेट नहीं पहना था, जिसके कारण चोटें अधिक गंभीर हुईं और दुर्घटना में उसकी अपनी भी लापरवाही थी। इसके साथ ही बीमा कंपनी ने दुर्घटना को फर्जी बताने की भी कोशिश की। हालांकि, पीठासीन अधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने बीमा कंपनी के इन दोनों ही दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना हेलमेट के वाहन चलाना निश्चित रूप से एक यातायात अपराध है, परंतु केवल हेलमेट न पहनने को वह लापरवाही नहीं माना जा सकता जिसके कारण टक्कर या दुर्घटना हुई हो। अदालत ने कार चालक रमेश को तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाकर हादसा करने का पूर्ण दोषी ठहराया।
भविष्य की कमाई, इलाज और देखभाल के लिए मिला हर्जाना
पीड़ित के पेशेवर जीवन पर हादसे के असर का मूल्यांकन करते हुए न्यायाधिकरण ने पाया कि नीलमणि एक विपणन कार्यकारी यानी मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत थे। इस नौकरी में काफी भागदौड़ और फील्ड वर्क शामिल होता है। रीढ़ की हड्डी में आई गंभीर चोटों के कारण वह भविष्य में कभी भी इस प्रकार का काम नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, यदि वे भविष्य में किसी कार्यालय में बैठकर किए जाने वाले डेस्क जॉब को भी चुनते हैं, तो भी उन्हें पूरे समय एक निजी सहायक या देखभाल करने वाले की जरूरत बनी रहेगी।
इन सभी परिस्थितियों, भविष्य की कमाई के नुकसान, चिकित्सा उपचार पर होने वाले व्यय और जीवनभर देखभाल के लिए केयरटेकर के खर्चों का व्यापक आकलन करने के बाद न्यायाधिकरण ने इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को ब्याज सहित 2.92 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का निर्देश जारी किया। यह फैसला सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों के संरक्षण और सहभागी लापरवाही की कानूनी परिभाषा को स्पष्ट करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





















