मशहूर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब अपने 25वें दिन में प्रवेश कर चुकी है और उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने एक स्पष्ट शर्त रख दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी किए गए एक ताज़ा वीडियो संदेश में उन्होंने देशवासियों को अपने स्वास्थ्य और भविष्य की रणनीति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वह अपना उपवास तभी समाप्त करेंगे, जब प्रशासन हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का लिखित या पक्का भरोसा दिलाएगा। अपने लंबे उपवास के कारण वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चुके हैं, लेकिन उनका हौसला अभी भी बरकरार है।
स्वास्थ्य में भारी गिरावट और अस्पताल में भर्ती
लगातार 25 दिनों तक भोजन का त्याग करने का असर वांगचुक के शरीर पर साफ दिखाई दे रहा है। अपने वीडियो में उन्होंने खुलासा किया कि इस लंबी भूख हड़ताल के दौरान उनके शरीर का वजन 11 किलोग्राम कम हो गया है। इसके साथ ही उनकी मांसपेशियों में भी काफी कमी दर्ज की गई है, जिससे शारीरिक कमजोरी बढ़ गई है। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए 21 जुलाई को उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से हटाकर गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, तमाम शारीरिक कष्टों के बावजूद वांगचुक का कहना है कि वह अभी जीवित हैं और पूरी तरह से ठीक महसूस कर रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इतने लंबे समय तक बिना भोजन के रहना शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
'चलो संसद' मार्च और छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन
अपने संदेश में वांगचुक ने 20 जुलाई को हुए 'चलो संसद' मार्च का विशेष रूप से जिक्र किया। यह मार्च कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और छात्रों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने उन सभी प्रदर्शनकारियों की जमकर तारीफ की जिन्होंने पुलिस की कड़ी कार्रवाई और लाठीचार्ज का सामना करने के बावजूद अपना संयम नहीं खोया। वांगचुक के अनुसार, भीड़ में कुछ ऐसे असामाजिक तत्वों को भी भेजा गया था जिनका मकसद लोगों को उकसाना और पत्थरबाजी करना था। इसके बावजूद असली प्रदर्शनकारी पूरी तरह से शांतिपूर्ण बने रहे। उनका धैर्य देखकर वांगचुक काफी भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि छात्रों पर हुए इस बेरहम हमले को देखने के बाद ही उन्होंने अपना अनशन आगे बढ़ाने का सख्त फैसला लिया था।
नेताओं की अपील और अनशन खत्म करने की शर्त
एक्टिविस्ट के समर्थन में अब कई राजनीतिक हस्तियां भी आगे आई हैं। सरकार के कई मंत्रियों और विपक्षी दलों के नेताओं ने उनसे अपनी भूख हड़ताल तुरंत समाप्त करने का आग्रह किया है। वांगचुक ने बताया कि उन्हें 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक विशेष पत्र भी सौंपा गया है, जिसमें उनसे देश सेवा के काम में वापस लौटने की अपील की गई है। वांगचुक खुद भी मानते हैं कि उनका काम महत्वपूर्ण है और वह वापस लौटना चाहते हैं। लेकिन, उन्होंने अपनी अंतिम मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार बच्चों और युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार के बल का प्रयोग न करे। वह सिर्फ इतना आश्वासन चाहते हैं कि प्रदर्शनकारियों पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और न ही उन्हें पुलिस या जेल का डर दिखाया जाएगा। वांगचुक ने चेतावनी दी है, "अगर मुझे जल्द ही आश्वासन मिल जाता है, तो आपकी भावनाओं का सम्मान करते हुए मैं आज अपना उपवास तोड़ सकता हूं।" अगर सरकार की तरफ से ऐसा कोई भरोसा नहीं मिलता है, तो उनकी यह भूख हड़ताल दुर्भाग्य से आगे भी जारी रहेगी।



















