राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में हुई दिल दहला देने वाली इमारत ढहने की घटना ने कई परिवारों को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है। इस बड़ी त्रासदी में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के एक युवा छात्र की जान चली गई, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा युवराज सोनी इस भयानक हादसे का शिकार हो गया। मृतक छात्र कुछ ही दिन पहले अपने घर से छुट्टियां बिताकर और मां के हाथों का बना खाना खाकर दिल्ली वापस लौटा था, लेकिन इस अनहोनी ने उसके परिवार के सारे सपने पल भर में उजाड़ दिए।
दोस्त से बात करते समय आया खौफनाक मोड़
रविवार को सत्य निकेतन में घटी वह दुर्घटना किसी डरावने सपने जैसी थी। जब पांच मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह धराशायी हुई, उस समय युवराज अपने गहरे दोस्त आर्यन के साथ फोन पर बातचीत कर रहा था। दोनों की बातचीत के बीच अचानक तेज धमाका हुआ, धूल का गुबार उठा और चीख-पुकार मचने के तुरंत बाद खामोशियां छा गईं। आर्यन लगातार फोन पर अपने यार को पुकारता रहा कि क्या हुआ भाई, बोल न, लेकिन दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। बेचैन होकर उसने बार-बार कॉल लगाने की कोशिश की, मगर संपर्क नहीं हो सका।
अस्पतालों और मलबे के बीच तलाश
कुछ ही पलों में जब इलाके में इमारत गिरने की भयावह खबर फैली, तो आर्यन के पैरों तले जमीन खिसक गई। वह घबराई हुई स्थिति में सीधे सत्य निकेतन पहुंचा और अपने दोस्त की तलाश में जुट गया। मलबे के ढेर और विभिन्न अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद आखिरकार उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर से इस मनहूस खबर की पुष्टि हुई। अपने जिगरी दोस्त को इस तरह खो देने का सदमा आर्यन सहन नहीं कर पा रहा है और उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
दुर्ग में पसरा मातम और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल
छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित युवराज के घर जैसे ही यह दुखद सूचना पहुंची, कोहराम मच गया। वह अपने माता-पिता की इकलौता संबल था और भविष्य में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का बड़ा सपना लेकर राष्ट्रीय राजधानी में रह रहा था। मां का हाल सबसे ज्यादा बेहाल है, जो बार-बार सुधबुध खो बैठती हैं और उनकी चीखें सुनने वालों का कलेजा चीर देती हैं। उनकी बेटी भी गहरे सदमे में है और सभी परिजन पार्थिव शरीर को लेकर दुर्ग के रास्ते पर हैं। मां सिर्फ यही दोहराती रही कि बेटा तीन दिन पहले ही हंसते हुए गया था और अगली बार दुर्गा पूजा पर आने की बात कहकर गया था।
व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल
दिल्ली के इस दर्दनाक पीजी हादसे ने शहर के भीतर फल-फूल रहे अवैध पीजी संचालन और खस्ताहाल इमारतों की अनदेखी करने वाले तंत्र की पोल खोल दी है। एक तरफ जहां दोस्त अपने साथी की यादों में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ दुर्ग में एक मां अपने बेटे के शव के घर पहुंचने का इंतजार कर रही है। यह त्रासदी उन तमाम जिम्मेदार लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो मुनाफे की खातिर जर्जर मकानों को छात्रों की जिंदगी दांव पर लगाकर किराए पर चलाते हैं।


















