समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में चल रहे विकास कार्यों, बाढ़ की स्थिति और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को आड़े हाथों लिया। राम वन गमन पथ से लेकर एक्सप्रेसवे निर्माण तक कई प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य जनता का विकास नहीं बल्कि चुनिंदा लोगों की तिजोरियां भरना है।
विकास के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में हुए विकास कार्यों पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने कहा कि भारी भरकम बजट खर्च होने के बाद भी ज़मीन पर हालात खराब हैं। बारिश के दिनों में इन इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रमुख संसदीय क्षेत्रों में हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर पानी भरने के कारण नाव चलानी पड़ रही है। विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ दिखावा किया जा रहा है और जनता को गुमराह किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी को दिए गए बोनस पर भी सवाल खड़े किए।
सहारनपुर और कानून व्यवस्था के मुद्दे
सहारनपुर में हुई घटनाओं को लेकर भी सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि अपराधियों को पकड़ने के बजाय विपक्षी दल के नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही कई परियोजनाओं में मुख्यमंत्री के खुद इंजीनियर की भूमिका निभाने का दावा करने पर भी कटाक्ष किया गया।
साधु-संतों के वीडियो और राजनीतिक बयानबाजी
साधु-संतों से जुड़े वायरल वीडियो के संदर्भ में यह स्पष्ट किया गया कि पार्टी संतों का पूरा सम्मान करती है, लेकिन इस तरह की वीडियो सामग्री बनाए जाने पर प्रतिक्रिया भी स्वाभाविक रूप से सामने आएगी। यदि इस प्रकार की चीजें सामने आएंगी तो उसका माकूल जवाब दिया जाएगा।
भविष्य के वादे और तकनीक का इस्तेमाल
भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए यह घोषणा की गई कि यदि राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो सम्राट अशोक जयंती पर आधिकारिक अवकाश घोषित किया जाएगा। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल पर बात करते हुए कहा गया कि इस तकनीक का उपयोग सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों के लिए होना चाहिए, न कि नकारात्मक राजनीति फैलाने के वास्ते।
सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर सवाल
सहारनपुर में एक मस्जिद को गिराए जाने की घटना पर गहरी आपत्ति जताई गई। यह सवाल उठाया गया कि इतनी जल्दबाजी दिखाने की क्या आवश्यकता थी जबकि देश में उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय जैसी न्यायिक संस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है और प्रशासन को स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए था।



















