सितंबर में बोई पालक कुछ ही हफ्तों में देगी बंपर पैदावार, बुवाई शुरू करने से पहले समझ लें ये जरूरी टिप्सअजमेर के इस 250 साल पुराने मंदिर में भादवा में उमड़ती है रामदेवरा जैसी भीड़ईरान का बड़ा पलटवार, अमेरिकी युद्धपोतों पर दागी बैलिस्टिक मिसाइलेंग्वालियर में विवेकानंद तिराहे के पास बस में आग, 25 यात्रियों ने कूदकर बचाई जानग्रीस के एयरशो में करतब दिखाते समय आग का गोला बना F-4 फैंटम, दोनों पायलट नहीं बचेबिलासपुर में अलग नगर निगम की मांग पर गरमाई सियासत, अमित तिवारी का पांचवें दिन भी अनशन जारीपाकिस्तान पर बड़ी जीत के बाद हरमनप्रीत कौर के कड़े तेवर, ऐतिहासिक मैच में रचा नया कीर्तिमानफाइव-स्टार होटलों से आगे निकलकर क्यों बढ़ रहा है रिवर्स वेकेशन का ट्रेंडहर दिन बालों में फिरने वाली कंघी में छिपी हो सकती है सिर की सेहत बिगाड़ने वाली गंदगीओडेसा में रूसी भाषा पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी, कला और सार्वजनिक स्थलों पर नए नियमों पर होगी चर्चा
बिलासपुर में अलग नगर निगम की मांग पर गरमाई सियासत, अमित तिवारी का पांचवें दिन भी अनशन जारीछत्तीसगढ़
6 सित॰ 2026, 7:04 am (34 मिनट पहले)· 2

बिलासपुर में अलग नगर निगम की मांग पर गरमाई सियासत, अमित तिवारी का पांचवें दिन भी अनशन जारी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र को नया नगर निगम बनाने की मांग को लेकर अमित तिवारी पांच दिनों से आमरण अनशन पर हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि बड़ी आबादी और टैक्स देने के बावजूद इस इलाके में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों की भारी कमी है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक नए नगर निगम के गठन को लेकर चल रहा संघर्ष अब काफी तेज हो चुका है। अरपा नदी के उस पार स्थित सरकंडा और उसके आसपास के तमाम इलाकों को वर्तमान बिलासपुर नगर निगम से पूरी तरह अलग करके एक स्वतंत्र नगर निकाय का दर्जा दिए जाने की पुरजोर मांग उठाई जा रही है। इसी सिलसिले में अमित तिवारी पिछले पांच दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। अनशनकारी की तरफ से यह बात सामने आई है कि उन्होंने पूरी तरह से अन्न और जल का त्याग कर दिया है, जिसके चलते लगातार स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है और कमजोरी बढ़ती जा रही है। इसके बावजूद शासन, प्रशासन या फिर किसी भी जनप्रतिनिधि की तरफ से इस गंभीर मामले में अब तक कोई ठोस पहल या बातचीत की शुरुआत नहीं की गई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि इस पार के इलाके में जनसंख्या और वार्डों की संख्या में बहुत तेजी से इजाफा हुआ है, लेकिन मौजूदा नगर निगम के ढांचे के अंतर्गत इस विशाल क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

सालों पुरानी मांग और चुनावी वादों का मुद्दा

अरपा पार के इस इलाके को एक अलग नगर निगम बनाने की यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि इसका एक लंबा इतिहास रहा है। इस आंदोलन से जुड़े देवेंद्र मिश्रा के बयानों के आधार पर यह बात सामने आती है कि सरकंडा और अरपा पार के लिए पृथक नगर निगम का यह प्रस्ताव करीब पच्चीस से तीस साल पुराना है। इस लंबी समयावधि के दौरान जनता और विभिन्न संगठनों द्वारा अनगिनत बार धरना प्रदर्शन, रैलियां और आंदोलन आयोजित किए जा चुके हैं। उनका यह भी कहना है कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान क्षेत्र के स्थानीय विधायक ने अपने आधिकारिक घोषणा पत्र में इस अलग नगर निगम की मांग को प्रमुखता से शामिल किया था। हालांकि चुनाव संपन्न हुए और करीब तीन साल का लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन इस दिशा में एक भी ठोस कागजी कार्रवाई या प्रशासनिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई है, जिससे स्थानीय जनता में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है।

ये भी पढ़ें

अनशनकारी अमित तिवारी की स्थिति और प्रशासन की अनदेखी

अमित तिवारी का यह स्पष्ट कहना है कि अरपा पार क्षेत्र के लिए अलग नगर निगम की स्थापना को लेकर उनका आमरण अनशन पांचवें दिन भी बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है। उन्होंने दृढ़ संकल्प लेते हुए यह कहा है कि जब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे किसी भी कीमत पर अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। लगातार अन्न और जल का त्याग करने के कारण उनके शरीर में भारी कमजोरी आ गई है और सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है। उनका यह भी गंभीर आरोप है कि इस विकट परिस्थिति में न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी सुध लेने की जहमत उठाई है और न ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस जन आंदोलन को किसी प्रकार की गंभीरता से लिया है। प्रशासन और सरकार की इस उदासीनता के कारण आंदोलनकारियों का गुस्सा लगातार उग्र होता जा रहा है।

जोन कार्यालय के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव

आंदोलनकारियों का मुख्य तर्क यह है कि अरपा पार के इस हिस्से में प्रशासनिक कामकाज के लिए एक जोन कार्यालय तो जरूर स्थापित कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय नागरिकों को उस कार्यालय से किसी भी प्रकार का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने एक बहुत बड़ा उदाहरण देते हुए यह समझाया कि पानी के एक छोटे से टैंकर जैसी बेहद बुनियादी सुविधा प्राप्त करने के लिए भी लोगों को अरपा नदी को पार करके नगर निगम के दूसरे छोर पर स्थित मुख्य कार्यालय तक दौड़ लगानी पड़ती है। उनका सीधा और कड़ा सवाल यह है कि जब नागरिकों को रोजमर्रा की अत्यंत छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए इतनी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, तो ऐसी स्थिति में इस समूचे क्षेत्र का उचित और संतुलित विकास कैसे संभव हो सकता है।

बरसात के मौसम में बदतर होते हालात की मिसाल

स्थानीय स्तर पर चल रहे इस आंदोलन के समर्थकों ने हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के दौरान पैदा हुए विकट हालातों का विशेष तौर पर हवाला दिया है। उनका यह तर्क है कि जब कुछ समय पहले लगातार कई घंटों तक भारी बारिश हुई थी, तब सरकंडा क्षेत्र के लोगों को भयंकर जलभराव और आवागमन की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा था। उनका यह पक्का मानना है कि यदि अरपा पार के इस घनी आबादी वाले क्षेत्र के लिए एक अलग और स्वतंत्र नगर निगम का गठन हो जाता है, तो स्थानीय स्तर पर विशेष योजनाएं तैयार करके क्षेत्र की वास्तविक और तात्कालिक जरूरतों के हिसाब से सभी आवश्यक विकास कार्य बहुत ही सुगमता से कराए जा सकेंगे।

सत्तर में से चौबीस वार्डों का इस पार होना

इस आंदोलन से जुड़े अजय कापसे ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान समय में बिलासपुर नगर निगम के कुल विस्तार के बाद यहां कुल सत्तर वार्ड आते हैं, जिनमें से अकेले करीब चौबीस वार्ड अकेले सरकंडा और अरपा पार के इस विशाल क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। उनका कहना है कि इस इलाके की मेहनतकश जनता नगर निगम को नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के टैक्स और राजस्व का भुगतान करती है, लेकिन उसके अनुपात में क्षेत्र को विकास फंड और सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। उनका यह भी तर्क है कि एक अलग नगर निगम के अस्तित्व में आने से इस क्षेत्र के विकास के लिए जो सरकारी धन आवंटित होगा, उसका उपयोग स्थानीय विकास कार्यों में बहुत अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से किया जा सकेगा।

सेंदरी से मोपका और लगरा तक नए निगम के दायरे की मांग

आंदोलनकारियों ने अपने इस प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया है कि सेंदरी से लेकर मोपका और लगरा तक के पूरे विस्तृत भूभाग को एक साथ मिलाकर एक नया और सक्षम नगर निगम बनाया जा सकता है। उनका यह भी दावा है कि इस पूरे क्षेत्र के पास अपनी एक अलग इकाई के रूप में कार्य करने के लिए पर्याप्त आबादी, विशाल क्षेत्रफल और आवश्यक बुनियादी संरचना पहले से ही मौजूद है। एक नया और स्वतंत्र नगर निगम बन जाने के बाद इस पूरे क्षेत्र के आम नागरिकों को पीने के साफ पानी, पक्की सड़कों, नालियों के निर्माण, नियमित साफ-सफाई और अन्य सभी प्रकार की जरूरी नागरिक सुविधाओं को पाने के लिए सीधे अपने स्थानीय निकाय के स्तर पर अपनी मजबूत दावेदारी और मांग रखने का सुनहरा अवसर मिल जाएगा।

मांग पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान

आंदोलन से जुड़े तमाम लोगों ने मीडिया और प्रशासन के सामने यह बात दोहराई है कि पृथक नगर निगम के गठन की यह मांग केवल किसी एक व्यक्ति, दल या विशेष संगठन की व्यक्तिगत मांग नहीं है, बल्कि यह अरपा पार के इस पूरे उपेक्षित क्षेत्र के सुनहरे भविष्य और विकास से जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने शासन और स्थानीय प्रशासन से यह पुरजोर अपील की है कि अनशन पर बैठे अमित तिवारी की लगातार बिगड़ती हुई शारीरिक स्थिति को पूरी गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभाव से बातचीत की पहल की जाए और नए नगर निगम के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया बिना किसी और विलंब के शुरू की जाए। फिलहाल पांचवें दिन भी अमित तिवारी का आमरण अनशन पूरी दृढ़ता के साथ जारी है।

सवाल-जवाब

अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग क्यों की जा रही है?
इस क्षेत्र की बढ़ती आबादी, वार्डों के विस्तार और मौजूदा नगर निगम के तहत बुनियादी सुविधाएं व विकास कार्य समय पर न मिलने के कारण अलग नगर निगम की मांग की जा रही है।
अमित तिवारी क्यों अनशन पर बैठे हैं?
अमित तिवारी सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र के लिए पृथक नगर निगम के गठन की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं।
यह मांग कितने साल पुरानी है?
आंदोलनकारियों के अनुसार सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र के लिए अलग नगर निगम बनाने की यह मांग करीब पच्चीस से तीस साल पुरानी है।
नए नगर निगम में किन क्षेत्रों को शामिल करने की मांग है?
आंदोलनकारियों ने सेंदरी से लेकर मोपका और लगरा तक के क्षेत्र को नए नगर निगम में शामिल करने की मांग की है।
बिलासपुर नगर निगम में वर्तमान में कुल कितने वार्ड हैं?
बिलासपुर नगर निगम में वर्तमान में कुल सत्तर वार्ड हैं, जिनमें से चौबीस वार्ड अकेले सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र में आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 मिनट पहले

पाँच दिनों से अन्न-जल त्यागने के बावजूद प्रशासन की ओर से संवाद न होना कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि अनशनकारी की स्थिति बिगड़ती है, तो क्षेत्र में उग्र प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी आशंका है, जिसे रोकने के लिए तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 मिनट पहले

यह स्थिति केवल एक स्थानीय निकाय के गठन की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता के बीच जनप्रतिनिधियों के प्रति पनप रहे गहरे अविश्वास को दर्शाती है। यदि निर्वाचन के दौरान दिए गए वादों को इस प्रकार अनदेखा किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सीधा सवालिया निशान लगाता है। प्रशासनिक स्तर पर संवादहीनता न केवल अनशनकारी के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है, बल्कि यह क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़े जनाक्रोश और राजनीतिक अस्थिरता को भी जन्म दे सकती है, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR