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स्वदेशी माणिक इंजन वाली LRLACM का चांदीपुर से कामयाब परीक्षण, ब्रह्मोस से तीन गुना मार और 1,500 किलोमीटर तक दुश्मन के घर में सेंधओडिशा
16 जून 2026, 5:08 am (43 दिन पहले)· 2

स्वदेशी माणिक इंजन वाली LRLACM का चांदीपुर से कामयाब परीक्षण, ब्रह्मोस से तीन गुना मार और 1,500 किलोमीटर तक दुश्मन के घर में सेंध

DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर तट से लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया. यह सबसोनिक मिसाइल स्वदेशी माणिक टर्बोफैन इंजन से लैस है और 1,000 से 1,500 किलोमीटर तक मार कर सकती है.

ओडिशा के चांदीपुर तट पर शांत समंदर की पृष्ठभूमि में एक तेज धमाके के साथ सफेद रंग का स्वदेशी क्रूज मिसाइल आसमान चीरते हुए निकल पड़ा. यह भारत की लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल यानी LRLACM थी, जिसे अक्सर भारत की अपनी टॉमहॉक कहा जाता है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इस सफल परीक्षण ने एक ऐसे हथियार की ताकत दिखाई है, जो आने वाले समय में भारत की युद्ध रणनीति को नई दिशा दे सकता है.

इस मिसाइल की सबसे दिलचस्प बात इसका अनोखा फॉर्मूला है. भारत की सबसे चर्चित सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस जहां अपनी बिजली जैसी रफ्तार के लिए जानी जाती है, वहीं LRLACM रफ्तार में धीमी यानी सबसोनिक है. लेकिन इसका असली दम रफ्तार में नहीं, बल्कि उस लंबी पहुंच में छिपा है जो ब्रह्मोस से तीन गुना ज्यादा दूरी तक दुश्मन को निशाना बना सकती है. स्वदेशी माणिक टर्बोफैन इंजन से लैस यह मिसाइल समंदर की सतह के बेहद करीब और पहाड़ों की आड़ में उड़ान भरते हुए दुश्मन के इलाके में 1,500 किलोमीटर अंदर तक पहुंच सकती है.

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निर्भय और ITCM की विरासत पर बना स्वदेशी हथियार

LRLACM कोई अकेली कोशिश का नतीजा नहीं है. यह निर्भय और ITCM मिसाइल कार्यक्रमों के दौरान परखी और परिपक्व हो चुकी तकनीकों पर खड़ी की गई है. पूरी तरह स्वदेशी यह अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होने वाली है, क्योंकि तीनों सेनाएं इसे अलग-अलग मोर्चों पर इस्तेमाल कर सकेंगी.

मिसाइल की खास तकनीकी ताकत

इस क्रूज मिसाइल को कई ऐसी खूबियों से लैस किया गया है जो इसे राडार और एयर डिफेंस के लिए पकड़ पाना बेहद मुश्किल बना देती हैं.

  • नीची उड़ान और सी-स्किमिंग: यह जमीन से सटकर पहाड़ों और घाटियों के बीच से राडार की पकड़ से बचते हुए उड़ सकती है, और समुद्र के ऊपर पानी की सतह के बिल्कुल करीब रहकर आगे बढ़ती है.
  • वेपॉइंट नेविगेशन: सीधी लाइन में जाने के बजाय यह टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर पहुंचती है, जिससे दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम इसका असली टारगेट भांप नहीं पाते.
  • स्वदेशी माणिक इंजन: इसे ताकत भारत के अपने माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन (Manik STFE) से मिलती है. इससे पहले इस श्रेणी के इंजनों के लिए भारत को रूस पर निर्भर रहना पड़ता था.
  • कई लॉन्च प्लेटफॉर्म: इसे जमीन पर चलने वाले मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर और नौसेना के युद्धपोतों पर लगे यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च मॉड्यूल (UVLM) दोनों से दागा जा सकता है. इसका एयर-लॉन्च वेरिएंट भी विकसित किया जा रहा है, जिसे Sukhoi-30 MKI से छोड़ा जाएगा.
  • मारक क्षमता: इसकी रेंज 1,000 किलोमीटर से लेकर 1,500 किलोमीटर तक है, यानी यह दुश्मन के इलाके में गहराई तक घुसकर वार कर सकती है.
  • पेलोड: यह लगभग 200 से 300 किलोग्राम वजनी पारंपरिक और विशेष विस्फोटक ले जा सकती है. इसके अग्रभाग में लगे आधुनिक सीकर आखिरी पलों में टारगेट को सटीक तरीके से पहचान लेते हैं.
  • रफ्तार: यह सबसोनिक क्रूज मिसाइल है जो लगभग 0.7 से 0.8 मैक (करीब 850 से 950 किमी/घंटा) की रफ्तार से उड़ती है. कम रफ्तार ही इसे चुपके से आगे बढ़ने में मदद करती है.
  • आकार और वजन: इसकी लंबाई लगभग 6 मीटर और वजन करीब 1 टन यानी 1,000 किलोग्राम है.
  • कीमत: आधिकारिक तौर पर सटीक कीमत का खुलासा नहीं हुआ है. लेकिन अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब $1.5 से $2 मिलियन डॉलर बैठती है, जबकि स्वदेशी LRLACM की अनुमानित लागत 5 से 7 करोड़ रुपये प्रति मिसाइल रहने की संभावना है, क्योंकि इसके सारे सब-सिस्टम भारत में ही बने हैं.

सेनाओं के लिए कितनी बड़ी कामयाबी

यह मिसाइल अकेले नहीं, बल्कि भारत के मौजूदा हथियारों के साथ मिलकर ताकत को कई गुना बढ़ा देती है.

  • ब्रह्मोस के साथ तालमेल: ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार से दुश्मन के एयर डिफेंस को तुरंत खत्म करने का काम करेगी, जबकि LRLACM अपनी लंबी दूरी और जमीन से सटकर उड़ने की खूबी के दम पर दुश्मन के भीतरी कमांड सेंटर, एयरबेस, रसद डिपो और राडार स्टेशनों को निशाना बनाएगी.
  • पूरी आत्मनिर्भरता: इसे बेंगलुरु स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE) ने भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ मिलकर तैयार किया है. युद्ध के हालात में किसी विदेशी पाबंदी का इसकी सप्लाई चेन पर असर नहीं पड़ेगा.
  • किफायती युद्ध: सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें बेहद महंगी होती हैं. लंबी लड़ाई में जब सैकड़ों की संख्या में मिसाइलें दागनी पड़ें, तब LRLACM जैसी सबसोनिक मिसाइलें किफायती और बेहद विनाशकारी विकल्प बन जाती हैं.

सवाल-जवाब

LRLACM की मारक क्षमता कितनी है?
इस मिसाइल की रेंज 1,000 किलोमीटर से लेकर 1,500 किलोमीटर तक है, जो ब्रह्मोस से करीब तीन गुना ज्यादा है.
क्या LRLACM एक परमाणु सक्षम मिसाइल है?
इसे मुख्य रूप से सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए पारंपरिक लंबी दूरी के सटीक-स्ट्राइक हथियार के रूप में डिजाइन किया जा रहा है. तकनीकी रूप से क्रूज मिसाइलों को रणनीतिक पेलोड के लिए मॉडिफाई किया जा सकता है, लेकिन इसका मुख्य फोकस पारंपरिक युद्ध पर है.
इसे किस इंजन से ताकत मिलती है?
इसे भारत के अपने माणिक स्मॉल टर्बोफैन इंजन (Manik STFE) से ताकत मिलती है, जबकि पहले इस श्रेणी के इंजनों के लिए भारत रूस पर निर्भर था.
इसे किन प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है?
इसे जमीन पर मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर और नौसेना के युद्धपोतों पर लगे यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च मॉड्यूल (UVLM) से दागा जा सकता है, और Sukhoi-30 MKI से छोड़ा जाने वाला एयर-लॉन्च वेरिएंट भी विकसित हो रहा है.
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