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अमेरिकी लोकतंत्र में मतपत्रों की महत्ता, आधुनिक दौर में भी कागजी पर्चियों पर टिका चुनावी ढांचाभारत
4 नव॰ 2026, 8:09 pm (1 घंटे पहले)· 1

अमेरिकी लोकतंत्र में मतपत्रों की महत्ता, आधुनिक दौर में भी कागजी पर्चियों पर टिका चुनावी ढांचा

तकनीक में अव्वल होने के बावजूद अमेरिका में मतदान डिजिटल मशीनों के बजाय कागजी पर्चियों और हाई-स्पीड स्कैनर्स के मिले-जुले मॉडल पर संचालित होता है। सुरक्षा, ऑडिट की सुविधा और विकेंद्रीकृत व्यवस्था के कारण वहां मतपत्रों को प्राथमिकता दी जाती है।

दुनिया भर में आधुनिक तकनीक का परचम लहराने वाले देश में जब मतदान की बारी आती है, तो पूरा तंत्र पारंपरिक कागजी पर्चियों की ओर लौटता हुआ दिखाई देता है। भारत जैसे देशों में जहां इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से मतदान कराने की व्यवस्था दशकों से स्थापित है, वहीं अमेरिकी चुनाव प्रणाली आज भी बुनियादी तौर पर मतपत्रों पर अत्यधिक निर्भर करती है। मध्यावधि चुनाव 2026 के ताजा नतीजों में सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है, जहां विपक्षी डेमोक्रेट्स ने बाजी मारी है। इन सियासी बदलावों के बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सिलिकॉन वैली का घर कहे जाने वाले राष्ट्र में वोटिंग का तौर-तरीका इतना अलग और कागजी पर्चों से बंधा क्यों है।

संसदीय संतुलन और मध्यावधि मतदान की कार्यप्रणाली

अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति का कार्यकाल चार वर्षों का तय होता है, और ठीक दो साल का समय बीतने पर मध्यावधि चुनाव आयोजित किए जाते हैं। इन चुनावों में मतदाता सीधे राष्ट्रपति का चयन नहीं करते, क्योंकि उनका चार साल का कार्यकाल उस समय जारी रहता है। इसके बजाय, यह मतदान संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों की ताकत तय करने के लिए होता है।

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संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सदस्यों की समयावधि केवल 2 वर्ष की होती है, जिसकी वजह से सदन की सभी 435 सीटों पर एक साथ वोट डाले जाते हैं। इसके उलट, उच्च सदन यानी सीनेट में सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है। सीनेट का स्वरूप कभी पूरी तरह भंग नहीं होता, बल्कि प्रत्येक 2 वर्ष के अंतराल पर लगभग एक-तिहाई, यानी करीब 33 से 35 सीटों पर क्रमिक चुनाव कराए जाते हैं। इसी अवधि के दौरान करीब 36 राज्यों में राज्यपाल (गवर्नर) और ढेरों स्थानीय प्रशासनिक पदों के लिए भी नागरिक अपने मत का प्रयोग करते हैं।

राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे आयोजन को मौजूदा राष्ट्रपति के शुरुआती दो वर्षों के कामकाज पर जनता का सीधा रिपोर्ट कार्ड मानते हैं। जब राष्ट्रपति की पार्टी दोनों सदनों में अपनी बढ़त गंवा देती है, तो प्रशासन के लिए अपनी नीतियों और नए विधायी प्रस्तावों को कानून की शक्ल देना बेहद पेचीदा और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

मतगणना का विकेंद्रीकृत मॉडल और कागजी मतपत्र

चुनावी संचालन के मामले में अमेरिका का ढांचा भारत से एकदम जुदा है। यहां किसी केंद्रीय चुनाव आयोग जैसी राष्ट्रीय संस्था का अस्तित्व नहीं है, जो पूरे देश में एक समान नियम लागू कर सके। इसके स्थान पर समूची प्रक्रिया पूरी तरह काउंटी, कस्बों और स्थानीय निकायों के अधीन संचालित होती है। देश भर के 10,000 से अधिक स्थानीय निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात स्वतंत्र टीमें और स्थानीय व्यवस्थाएं अपने-अपने क्षेत्रों की मतगणना का जिम्मा संभालती हैं।

मतदान के दौरान नागरिक पेपर बैलेट हाथ में लेते हैं और अपने पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के सामने बने बॉक्स अथवा गोल घेरे को पेन से अच्छी तरह भरते हैं। इसके बाद उस पर्चे को इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर मशीन में डाला जाता है। यह डिजिटल स्कैनर मतपत्र पर की गई स्याही की मार्किंग को तुरंत दर्ज करता है और संबंधित उम्मीदवार के खाते में अंक जोड़ देता है। बड़े और सघन जनसंख्या वाले मतगणना केंद्रों पर ऐसी अत्याधुनिक और तीव्र गति वाली मशीनें लगाई जाती हैं जो एक ही घंटे में हजारों मतपत्रों को स्कैन करने की क्षमता रखती हैं। वहीं, कुछ बेहद छोटे अथवा विशिष्ट भौगोलिक इलाकों में आज भी मतपत्रों की गिनती हाथों से की जाती है।

वोटों की गणना का यह क्रम कई स्तरों पर व्यवस्थित रहता है

  • सीधे मतदान केंद्र पर डाले गए वोट: मतदान के आधिकारिक दिन पोलिंग बूथ पर व्यक्तिगत रूप से पहुंचे मतदाताओं के मतपत्रों को सबसे पहले गिनना शुरू किया जाता है।
  • अग्रिम मतदान की पर्चियां: निर्धारित मुख्य दिन से पहले स्थानीय केंद्रों पर जाकर डाले गए मतपत्रों की गिनती अगले चरण में होती है।
  • डाक मतपत्रों की जांच: मेल के जरिए डाक से भेजे गए मतपत्रों की प्रामाणिकता परखने और उन पर मौजूद हस्ताक्षरों का मिलान करने में चुनाव कर्मियों को अधिक वक्त लगता है।
  • प्रोविजनल मतपत्रों का सत्यापन: यदि किसी मतदाता की पात्रता को लेकर कोई प्रशासनिक संशय होता है, तो उसे यह खास मतपत्र सौंपा जाता है, जिसकी गणना पात्रता साबित होने के बाद ही की जाती है।

सुरक्षा घेरा और इंटरनेट से दूरी

मतगणना में इस्तेमाल होने वाले इन उपकरणों को किसी भी प्रकार के इंटरनेट नेटवर्क से कभी नहीं जोड़ा जाता, जिससे किसी बाहरी हैकिंग या साइबर घुसपैठ की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाती है। अनाधिकृत छेड़छाड़ से बचाने के लिए मशीनों पर विशेष सुरक्षा सील लगाई जाती है। इसके अलावा, डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के नियुक्त पर्यवेक्षक गिनती कक्ष में लगातार मौजूद रहते हैं, जिससे समूची प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे।

मूल कागजी पर्चियों को सुरक्षित बक्सों में सील करके रखा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कानूनी चुनौती, किसी सीट पर करीबी अंतर या दोबारा गिनती (रिकाउंट) की स्थिति में उन वास्तविक पर्चों को निकालकर हाथ से पुनः जांचा जा सके।

प्रमाणीकरण और परिणामों की अंतिम घोषणा

मतदान का समय समाप्त होने के बाद स्थानीय चुनाव अधिकारी प्रत्येक मतपत्र का बारीकी से आकलन करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि दर्ज मतों की कुल संख्या पंजीकृत मतदाताओं के आंकड़ों से पूरी तरह मेल खाती हो। स्थानीय स्तर पर सत्यापन पूरा होने के उपरांत राज्य के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट अथवा स्टेट कैनवास बोर्ड द्वारा नतीजों को कानूनी रूप से प्रमाणित किया जाता है। विभिन्न राज्यों के अलग-अलग कानूनों और प्रक्रियाओं के चलते इस अंतिम प्रमाणीकरण में कई दिनों से लेकर हफ्तों तक का समय लग जाता है।

वर्तमान समय में अमेरिका के करीब 98% नागरिक किसी न किसी रूप में कागजी मतपत्र अथवा भौतिक रिकॉर्ड दर्ज कराने वाली प्रणाली के जरिए ही अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं।

डिजिटल ईवीएम से परहेज और मतपत्रों पर अडिग रहने की वजहें

साइबर सुरक्षा के जानकारों और चुनाव प्रबंधकों की स्पष्ट राय है कि केवल कंप्यूटर कोडिंग अथवा सॉफ्टवेयर पर आधारित वोटिंग मशीनों को दूर बैठकर या उनके कोड में हेरफेर करके प्रभावित किया जा सकता है। इसके विपरीत, सफेद कागज पर पेन से खींची गई स्याही की रेखा को किसी डिजिटल वायरस या बाहरी साइबर हमले से बदला या मिटाया नहीं जा सकता। भौतिक मतपत्र बुनियादी रूप से किसी भी रिमोट हैकिंग से पूरी तरह मुक्त रहते हैं।

कागजी मतपत्रों का सबसे बड़ा लाभ स्वतंत्र भौतिक सत्यापन (वेरिफिएबल पेपर ट्रेल) की सुविधा है। यदि चुनावी नतीजों को लेकर किसी किस्म की धांधली का आरोप लगे या अदालत में मुकदमा दर्ज हो, तो चुनाव कर्मी बिना किसी मशीन के भरोसे के हाथ से पर्चियों को गिनकर परिणाम की पुष्टि कर सकते हैं। लगभग सभी अमेरिकी राज्यों में यह अनिवार्य नियम है कि इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर्स की गणना की सत्यता जांचने के लिए औचक तौर पर कुछ प्रतिशत मतपत्रों का रैंडम ऑडिट हाथ से किया जाए, जिससे तकनीक की 100% सटीकता प्रमाणित हो सके।

इस प्रणाली को मजबूत करने के पीछे कुछ ऐतिहासिक मोड़ भी जिम्मेदार रहे हैं

  • सन 2000 का कानूनी विवाद: बुश बनाम गोर मामले में फ्लोरिडा के भीतर पंच-कार्ड मतपत्रों के कारण पैदा हुए भारी असमंजस ने समूचे देश को यह समझाया कि स्पष्ट भौतिक रिकॉर्ड कितना जरूरी है।
  • सन 2016 के बाहरी हस्तक्षेप के दावे: 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान बाहरी हैकरों द्वारा डिजिटल प्रणालियों को निशाना बनाने के प्रयासों के आरोपों के बाद बिना पेपर ट्रेल वाली मशीनों को हटाने का फैसला लिया गया। इसके लिए संघीय सरकार ने राज्यों को विशेष फंड मुहैया कराया, जिसका इस्तेमाल मतपत्र प्रणाली को सुदृढ़ करने में हुआ।
  • सप्ताह के कार्यदिवस पर मतदान: अमेरिका में चुनाव का दिन मंगलवार होता है और इस दिन कोई सार्वजनिक अवकाश नहीं रहता। काम-काज की व्यस्तता के चलते लाखों नागरिक हफ्तों पहले ही डाक के जरिए अपना वोट भेज देते हैं। घर बैठे वोट करने की इस एब्सेंटी अथवा मेल-इन वोटिंग प्रणाली के लिए कागजी मतपत्र ही एकमात्र कानूनी और व्यावहारिक जरिया है।
  • स्थानीय बजट और वित्तीय सीमाएं: चूंकि कोई एकल राष्ट्रीय संस्था चुनाव खर्च नहीं उठाती, इसलिए हर दो साल में लाखों नई इलेक्ट्रॉनिक मशीनों को खरीदना और उनका महंगा सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना स्थानीय काउंटियों के बजट पर भारी बोझ बनता है। इसके मुकाबले सामान्य स्कैनर और पेपर बैलेट अधिक टिकाऊ तथा किफायती साबित होते हैं।

इस प्रकार, अमेरिकी चुनाव मॉडल मत डालने के लिए कागज की विश्वसनीयता और उनकी गिनती के लिए डिजिटल स्कैनिंग की गति को आपस में जोड़ता है। यह हाइब्रिड पद्धति गति और सुरक्षा दोनों का संतुलन साधती है।

सवाल-जवाब

क्या अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव हर दो साल पर होता है?
नहीं, अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है। दो साल पूरे होने पर होने वाले मध्यावधि चुनाव केवल संसद के दोनों सदनों और स्थानीय पदों के लिए कराए जाते हैं।
अमेरिका में ईवीएम के स्थान पर वोट कैसे डाले जाते हैं?
अमेरिकी नागरिक पेपर बैलेट पर पेन से अपने उम्मीदवार के नाम के आगे का बॉक्स या गोला भरते हैं। इसके बाद उस मतपत्र को इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर मशीन से स्कैन किया जाता है।
क्या अमेरिकी मतगणना मशीनों को इंटरनेट से जोड़ा जाता है?
नहीं, वोटों की गिनती करने वाले स्कैनर्स को इंटरनेट से बिल्कुल नहीं जोड़ा जाता ताकि किसी भी प्रकार की साइबर हैकिंग का खतरा न रहे।
अमेरिका में लगभग कितने प्रतिशत मतदाता मतपत्रों का प्रयोग करते हैं?
वर्तमान में लगभग 98 प्रतिशत अमेरिकी मतदाता किसी न किसी रूप में पेपर बैलेट अथवा कागजी रिकॉर्ड वाली प्रणाली के जरिए वोट डालते हैं।
अमेरिकी चुनाव के दिन सरकारी छुट्टी क्यों नहीं होती?
अमेरिका में संघीय चुनाव कानूनन मंगलवार को पड़ते हैं जो एक सामान्य कार्यदिवस होता है, इसलिए बड़ी संख्या में लोग हफ्तों पहले डाक मतपत्रों के जरिए मतदान कर देते हैं।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 मिनट पहले

अमेरिका में जब पिछली बार चुनाव के दौरान वो नीले रंग के पेपर बैलेट पर पेन से निशान लगाया था, तब अजीब लगा था कि सिलिकॉन वैली वाले देश में आज भी ऐसा होता है।

Amit Patel@amit-patel·अभी

अ अर्जुन, सच में हैरानी होती है कि इतनी बड़ी टेक पावर होने के बाद भी वहां पर्चियों से ही काम चलता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 मिनट पहले

अमेरिका जैसी तकनीक में आगे रहने वाली जगह पर आज भी कागजी पर्चियों से वोट पड़ना हैरान करता है। जब वहां इतनी धांसू टेक्नोलॉजी है, तो फिर हर जगह ईवीएम जैसी मशीनें क्यों नहीं अपनाई जातीं?

Ravikash Gupta@ravikash·28 मिनट पहले

करण भाई, बात तो सही है। पर क्या इस तरह कागज़ पर वोटिंग से अमेरिका में चुनाव का खर्च बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ जाता होगा?

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