तेलंगाना की राजधानी के बाहरी इलाके में संगठित आर्थिक अपराध के एक बड़े नेटवर्क पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने शिकंजा कसा है। सुरक्षा बलों ने कुंटलूर स्थित एक किराये के मकान में अवैध रूप से चल रही करेंसी प्रिंटिंग यूनिट का भंडाफोड़ किया, जहाँ से 6.78 करोड़ रुपये अंकित मूल्य की जाली नकदी पकड़ी गई। इस पूरी कार्रवाई में चार व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि गिरोह के तीन अन्य साथियों की खोजबीन सरगर्मी से की जा रही है। जांच अधिकारियों ने मौके से उच्च गुणवत्ता वाले कंप्यूटर, स्कैनर, कटिंग उपकरण और कलर प्रिंटर भी अपने कब्जे में लिए हैं।
राजमार्ग पर वाहन चेकिंग के दौरान खुला मामला
इस पूरे गोरखधंधे की शुरुआत 1 नवंबर 2026 को उस वक्त हुई जब अब्दुल्लापुरमेट पुलिस और शादनगर स्पेशल ऑपरेशंस टीम (SOT) के जवानों ने नेशनल हाईवे-65 पर एक साझा नाकाबंदी अभियान चलाया। रामोजी फिल्म सिटी के पास से गुजर रही एक संदिग्ध चार पहिया गाड़ी को रोककर जब उसकी सघन तलाशी ली गई, तो उसके भीतर से 500 रुपये के जाली नोटों की खेप बरामद हुई। वाहन में रखे इन नकली नोटों का कुल मूल्य 8 लाख रुपये आंका गया।
वाहन में सवार व्यक्तियों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और उनसे गहन पूछताछ शुरू की गई। पूछताछ के दौरान मिली सूचनाओं के आधार पर विशेष जांच दल सीधे हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र कुंटलूर में स्थित एक रिहायशी ठिकाने पर पहुंचा। वहां पहुंचकर जब मकान का ताला खोला गया, तो अधिकारियों के होश उड़ गए क्योंकि पूरे परिसर को करेंसी छापने की एक गुप्त कार्यशाला में तब्दील कर दिया गया था।
रिहायशी मकान में स्थापित थी प्रिंटिंग वर्कशॉप
कुंटलूर के उस किराये के कमरे की तलाशी के दौरान पुलिसकर्मियों को 500 रुपये के जाली नोटों के कुल 134 बंडल हाथ लगे। इन बंडलों में मौजूद नकली करेंसी का कुल मूल्य 6.70 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। राजमार्ग पर गाड़ी से पकड़े गए 8 लाख रुपये के जाली नोटों को मिलाकर इस पूरे अभियान में बरामद कुल अवैध नकदी का आंकड़ा 6.78 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
तलाशी अभियान के दौरान केवल तैयार नोट ही नहीं, बल्कि उत्पादन से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए। इनमें उच्च क्षमता वाले रंगीन प्रिंटर, डिजिटल स्कैनर, लैपटॉप कंप्यूटर, लैमिनेशन मशीनें और कागजों को सटीक आकार में तराशने वाले विशेष कटर शामिल थे। गिरोह इन सभी मशीनों का उपयोग नोटों को असली भारतीय मुद्रा जैसा रूप देने के लिए कर रहा था।
डिजिटल माध्यमों से ली गई थी तकनीकी ट्रेनिंग
फ्यूचर सिटी के पुलिस कमिश्नर डॉ. तरुण जोशी ने इस अभियान से जुड़ी जानकारियों को साझा करते हुए बताया कि मुख्य आरोपी मदुपोजू कर्णाकर ने डिजिटल वीडियो और सोशल मीडिया ट्यूटोरियल्स के जरिए इस गैरकानूनी काम की तकनीक सीखी थी। उसने ऑनलाइन सामग्री देखकर यह समझा कि सुरक्षा धागों और नोट के अन्य हिस्सों को हूबहू कैसे नकल किया जा सकता है।
जांच में पता चला कि आरोपी सबसे पहले 500 रुपये के मूल वैध नोट को स्कैनर के माध्यम से उच्च रेजोल्यूशन में स्कैन करते थे। इसके बाद फोटोशॉप जैसे जटिल इमेज एडिटिंग सॉफ्टवेयर का सहारा लेकर डिजिटल फाइलों में जरूरी सुधार और बदलाव किए जाते थे। संपादन पूरा होने के बाद विशेष कागज पर हाई क्वालिटी प्रिंट निकाला जाता था और फिर लैमिनेशन तथा कटिंग प्रोसेस के जरिए उन्हें तैयार किया जाता था।
बाजार में खपाने की योजना और दोहरी ठगी का खेल
तैयार नोटों को बाजार में उतारने के लिए आरोपियों ने एक लुभावना लालच पेश करने का रास्ता चुना था। वे आम लोगों और बिचौलियों के सामने प्रस्ताव रखते थे कि अगर कोई एक लाख रुपये की असली मुद्रा देगा, तो उसके बदले में उसे तीन से चार लाख रुपये के नकली नोट सौंपे जाएंगे। हालांकि, जोखिम और कानूनी सख्ती के चलते जब इस प्रस्ताव को पर्याप्त ग्राहक नहीं मिल सके, तो गिरोह ने अपना तरीका पूरी तरह बदल दिया।
खरीदार न मिलने पर गिरोह के सदस्यों ने जाली नोट लेने के इच्छुक लोगों को ही लूटने की नई तरकीब निकाली। वे ग्राहकों को पहले असली नोट दिखाकर विश्वास में लेते थे ताकि सौदा पक्का हो सके। लेकिन लेन-देन के तय स्थान पर अचानक पूरा परिदृश्य बदल जाता था और गिरोह के अन्य साथी फर्जी वर्दी और साजो-सामान के साथ धावा बोल देते थे।
फर्जी पुलिस टीम बनकर की जाती थी वसूली
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने खुद को कानून का रखवाला दिखाने के लिए फर्जी पुलिस पहचान पत्र, वॉकी-टॉकी सेट और खिलौना पिस्तौल जुटा रखी थी। इतना ही नहीं, वे अपनी गाड़ियों पर जाली नंबर प्लेट लगाकर चलते थे ताकि कोई उन तक न पहुंच सके। जब भी कोई व्यक्ति नकली करेंसी का लालच लेकर नकदी के साथ पहुंचता, गिरोह के सदस्य नकली पुलिस बनकर उसे डराते-धमकाते थे और उसकी असली नकदी छीनकर रफूचक्कर हो जाते थे।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने इस फर्जी पुलिसिया तरीके से दो अलग-अलग वारदातों में पीड़ितों से क्रमशः 2 लाख रुपये और 3 लाख रुपये की वास्तविक रकम लूटी थी। यानी वे न केवल जाली मुद्रा का उत्पादन कर रहे थे, बल्कि अपराधियों को निशाना बनाकर संगठित वसूली और जालसाजी का खेल भी चला रहे थे।
चार सदस्य गिरफ्तार, बाकी साथियों की तलाश जारी
इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान मदुपोजू कर्णाकर, चिनोल्ला माणिक्य रेड्डी, चेरुकुपेल्ली रत्नाकर रेड्डी और करणम अजय कुमार के रूप में हुई है। वहीं, इस गिरोह के तीन अन्य सक्रिय साथी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिनकी धरपकड़ के लिए विशेष टीमों द्वारा संभावित ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
पुलिस अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि यह गैरकानूनी कारखाना कितने महीनों से संचालित था और क्या पूर्व में छपे नोट बाजार में सफलतापूर्वक वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, गिरोह के वित्तीय संपर्कों, कच्चे माल की आपूर्ति करने वालों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।


















