शिलांग की सड़कों पर बढ़ती भीड़ और रोजाना लगने वाले जाम से निपटने की दिशा में मेघालय सरकार ने बुधवार को दो नए मल्टी-लेवल पार्किंग परिसरों का लोकार्पण किया। मोखर और मोटफ्रान में शुरू की गई इन परियोजनाओं से शहर के व्यस्ततम इलाकों में कुल 200 वाहनों के ठहराव की व्यवस्थित सुविधा तैयार हुई है। राजधानी के मुख्य बाजारों और प्रशासनिक रास्तों पर अनियंत्रित पार्किंग को व्यवस्थित करना इस पहल का प्राथमिक मकसद है।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत तैयार हुआ ढांचा
मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने उपमुख्यमंत्री स्नियावभालंग धर की मौजूदगी में मोखर स्थित जिला स्कूल शिक्षा कार्यालय-सह-मल्टी-लेवल कार पार्क और मोटफ्रान स्थित पूरी तरह मैकेनाइज्ड पार्किंग ढांचे का औपचारिक उद्घाटन किया। ये दोनों बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शिलांग स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 38.92 करोड़ रुपये की संयुक्त लागत से पूरी की गई हैं। यह कदम राज्य की राजधानी में लंबे समय से चली आ रही पार्किंग की किल्लत और यातायात के जटिल दबाव को व्यवस्थित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उद्घाटन समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिलांग के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ यहां आने वाले सैलानियों के लिए भी ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक लोगों को वाहन खड़े करने के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक विकल्प नहीं दिए जाएंगे, तब तक केवल प्रतिबंध लगाने या पाबंदियां थोपने से सड़क जाम की समस्या कभी हल नहीं हो सकती।
18 महीने के अध्ययन और तकनीकी सर्वे पर आधारित फैसला
सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मोटफ्रान शिलांग के सबसे अधिक घने इलाकों में शामिल है, जो व्यस्त लेवदुह बाजार के ठीक बगल में स्थित है। इन आधुनिक सुविधाओं के शुरू होने से न केवल ट्रैफिक जाम हल्का होगा, बल्कि बाजार और आसपास के क्षेत्रों तक लोगों की पहुंच भी काफी सुगम बनेगी। उन्होंने आगे कहा कि लेवदुह के पुनर्विकास के साथ मिलकर ये कदम एक अधिक संगठित, सुलभ और मुसाफिरों के अनुकूल शहर बनाने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने साझा किया कि इस योजना को धरातल पर उतारने से पहले सरकार ने शहर के आवागमन ढांचे का लगभग 18 महीने तक बेहद गहन विश्लेषण किया था। इस अध्ययन में ड्रोन तकनीक, सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और सड़कों पर वाहनों की वास्तविक संख्या की गिनती का सहारा लिया गया, ताकि जाम पैदा होने के मूल कारणों की सही पहचान की जा सके। इस व्यापक कवायद से यह तथ्य सामने आया कि पहले नो-पार्किंग जोन तो घोषित कर दिए जाते थे, लेकिन चालकों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक स्थान नहीं बनाए जाते थे, जिससे यातायात प्रबंधन में बड़ा अंतर आ गया था।
अतिरिक्त सचिवालय मॉडल और पहाड़ी राज्यों के लिए सुझाव
इस अध्ययन के निष्कर्षों के बाद प्रशासन ने सरकारी, सामुदायिक और निजी स्वामित्व वाली ऐसी जमीनों की पहचान शुरू की, जहां बहुमंजिला या सुरक्षित पार्किंग स्थल बनाए जा सकते हैं। इस सिलसिले में पहली परियोजना अतिरिक्त सचिवालय के समीप स्थापित की गई थी, जिसके सफल संचालन के बाद अब मोखर और मोटफ्रान की नई परियोजनाएं सामने आई हैं।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अतिरिक्त सचिवालय परिसर के दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने इस प्रयोग की खुलकर सराहना की थी। केंद्रीय मंत्री ने यह भी सुझाव दिया था कि शिलांग के इस पार्किंग मॉडल को देश के अन्य पहाड़ी राज्यों और पर्वतीय शहरों में भी समान रूप से दोहराया जाना चाहिए, जहां भौगोलिक बाधाओं के चलते सड़कों को चौड़ा करना आसान नहीं होता।
सामुदायिक साझेदारी और एक लाख रुपये तक का वित्तीय सहयोग
शहरी गतिशीलता की इस योजना में जनभागीदारी को शामिल करने के लिए राज्य सरकार की पार्किंग नीति की रूपरेखा भी साझा की गई। इस नीति के प्रावधानों के मुताबिक, उपयुक्त जमीन रखने वाले आम नागरिक अथवा स्थानीय समुदाय पार्किंग स्थल विकसित करने के लिए सरकार से 1 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद प्राप्त कर सकते हैं।
इस व्यवस्था के अंतर्गत पार्किंग ढांचे का मालिकाना हक और उसका दैनिक संचालन स्थानीय समुदायों के हाथों में ही रहेगा, जबकि सरकार को पार्किंग से होने वाले कुल राजस्व का एक मामूली हिस्सा प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि यह सामुदायिक साझेदारी का एक सशक्त माध्यम है, जो जनता को बुनियादी सेवा देने के साथ-साथ राज्य की युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है।
प्रशासनिक शहर में सचिवालय का स्थानांतरण
यह पहल शिलांग के उस बड़े पुनर्गठन का हिस्सा है जिसके तहत आगामी प्रशासनिक शहर की रूपरेखा तैयार की गई है। योजना के अनुसार, अगले साल सितंबर से नवंबर के दौरान राज्य सचिवालय को नए परिसर में स्थानांतरित करने की तैयारी है। प्रशासनिक गतिविधियों के शहर के केंद्र से बाहर स्थानांतरित होने के बाद शिलांग के अंदरूनी हिस्सों में वाहनों की भीड़ में और गिरावट आने की संभावना है।
परियोजनाओं के टिकाऊ उपयोग पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि नई सुविधाओं के कुशल प्रबंधन के लिए पर्याप्त स्टाफ की तैनाती, तकनीकी प्रशिक्षण और मानक संचालन प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचा खड़ा करना एक काम है, लेकिन उसे सुचारू बनाए रखना और नियमित रखरखाव करना उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण और जरूरी दायित्व है।
सांस्कृतिक आयोजनों को समर्थन और आगामी राष्ट्रीय खेल
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न समुदायों के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए दिए जाने वाले सरकारी सहयोग का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सहायता किसी खास पंथ या धर्म को बढ़ावा देने के लिए नहीं है, बल्कि चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल, लिटफेस्ट और गॉस्पेल कॉन्सर्ट जैसे त्योहारों के साथ-साथ छठ पूजा और दुर्गा पूजा का आयोजन करने वाले सभी वर्गों को समान रूप से सहयोग प्रदान किया जाता है ताकि देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना मजबूत रहे।
इसके अलावा, उन्होंने राज्य के 54 साल के इतिहास में सबसे बड़े संभावित आयोजन के रूप में अगले वर्ष आयोजित होने वाले राष्ट्रीय खेलों की तैयारियों का जिक्र किया। भारतीय ओलंपिक संघ की एक आयोजन समिति वर्तमान में व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए शिलांग में मौजूद है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे इस आयोजन को केवल सरकार का काम न मानकर पूरे मेघालय का साझा उत्सव समझें और बाहर से आने वाले एथलीटों तथा अतिथियों का राज्य की समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक आतिथ्य सत्कार के साथ स्वागत करें।






















