बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तरफ से अपराध और क्राइम को लेकर दी गई कथित नई व्याख्या पर सियासी घमासान तेज हो गया है। बेगूसराय में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने राज्य के शिक्षित वर्ग को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों ने जिस तरह का नेतृत्व चुना है, अब उन्हें उसके नतीजों का सामना करना पड़ रहा है। किशोर के अनुसार, राज्य की जनता जाति और मजहब के नाम पर बंटकर मोदी और लालू की सियासत में उलझ गई, जिसका नतीजा यह है कि हर कुछ दिनों में हास्यास्पद स्थितियां सामने आ रही हैं।
मुख्यमंत्री के बयान पर प्रशांत किशोर का तीखा हमला
प्रशांत किशोर ने बातचीत में आरोप लगाया कि राज्य के शीर्ष नेतृत्व को बुनियादी शब्दों का अंतर भी समझ नहीं आता। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपराध और क्राइम के फर्क को नहीं समझ सकता, उससे बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा या युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जब तक मौजूदा नेतृत्व सत्ता में रहेगा, तब तक इसी तरह का सियासी मनोरंजन देखने को मिलता रहेगा।
हालांकि, प्रशांत किशोर ने यह भी रेखांकित किया कि इस पूरे मामले में केवल मुख्यमंत्री की जवाबदेही नहीं बनती। उन्होंने कहा कि खुद को प्रबुद्ध और ज्ञानी समझने वाली बिहार की जनता ने ही इस नेतृत्व को चुना है। जब मतदाता सातवीं कक्षा में अनुत्तीर्ण रहने वाले व्यक्ति को अपना नेता बनाएंगे, तो उन्हें ऐसे ही बयानों और नीतियों की अपेक्षा रखनी चाहिए। उनका कहना था कि सत्ता में बैठे व्यक्ति से अधिक चिंता उन मतदाताओं को करने की आवश्यकता है जिन्होंने उन्हें इस पद पर बैठाया है।
विवाद का कारण बना मुख्यमंत्री का मूल बयान
इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का वह बयान है, जो उन्होंने मंगलवार को दिया था। मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि राज्य में कोई अपराध नहीं है, हालांकि कुछ घटनाएं या क्राइम जरूर हो सकते हैं। इस अजीबोगरीब भेद के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा और कानून व्यवस्था की समझ पर कड़े सवाल उठाने शुरू कर दिए। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और RJD के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री की तीखी आलोचना की और सरकार को आड़े हाथों लिया।
निर्दलीय विधान पार्षदों के भाजपा प्रवेश पर कानूनी कदम
क्राइम वाले बयान के अलावा प्रशांत किशोर ने हाल ही में भाजपा में शामिल हुए बिहार विधान परिषद के दो नवनिर्वाचित निर्दलीय सदस्यों के मामले पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जन सुराज पार्टी ने इस दलबदल के खिलाफ विधान परिषद के सभापति को औपचारिक याचिका सौंप दी है। इसके साथ ही दोनों संबंधित प्रत्याशी भी सभापति के समक्ष अलग से याचिका पेश करने जा रहे हैं।
किशोर ने स्पष्ट किया कि यह कदम पूरी तरह से संवैधानिक नियमों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की अवहेलना है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस मामले में नियमों के उल्लंघन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि जरूरत पड़ी तो वे अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि हर हाल में इन दोनों सदस्यों की विधान परिषद सदस्यता समाप्त होकर ही रहेगी।























