गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही बाजारों में मौसमी फलों की भरमार दिखने लगी है। इन्हीं खास फलों में सीताफल भी शामिल है, जिसकी मलाईदार मिठास हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। प्राकृतिक मिठास और लाजवाब स्वाद के चलते लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। पोषण और ऊर्जा के लिहाज से यह शरीर को ताजगी देता है, लेकिन ठंड के मौसम में इसका अनियंत्रित सेवन कई बार सेहत पर भारी पड़ सकता है। सीताफल की तासीर ठंडी मानी जाती है, जिसके चलते जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर सर्दी, खांसी और कफ से जुड़ी परेशानियां घेर सकती हैं।
आयुर्वेद के अनुसार सीताफल के मूल गुण
आयुर्वेद की दृष्टि से देखें तो सीताफल को मधुर रस से युक्त और शीतवीर्य फल माना गया है। शीतवीर्य का सीधा अर्थ है कि इसकी प्रकृति अंदरूनी रूप से ठंडी होती है। यह फल शरीर को तात्कालिक बल प्रदान करने में सक्षम होता है। इसके साथ ही आधुनिक पोषण विज्ञान भी इसके स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि करता है। सीताफल में प्रचुर मात्रा में विटामिन सी और पोटैशियम जैसे जरूरी खनिज व पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और कोशिकाओं की कार्यप्रणाली के लिए मददगार माने जाते हैं, लेकिन इनके बेहतर लाभ तभी मिलते हैं जब फल को सही तरीके से खाया जाए।
वात और पित्त के लिए लाभकारी, पर कफ बढ़ाने का जोखिम
बिलासपुर की शासकीय आयुर्वेद औषधालय की आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर डॉ. आस्था मिश्रा ने बताया कि सीताफल वात और पित्त शामक माना गया है। इसका मतलब है कि यह शरीर के भीतर वात और पित्त दोष के असंतुलन को शांत करने में मदद करता है। इसके बावजूद इसका एक दूसरा पहलू भी है। यदि कोई व्यक्ति इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन करता है, तो शरीर में कफ दोष बढ़ने लगता है। ठंडी तासीर होने की वजह से मौसम के इस दौर में सर्दी, जुकाम और सीने में जकड़न जैसी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए मौसम के बदलाव और अपनी शारीरिक प्रकृति को ध्यान में रखकर ही इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए।
कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए बरतने योग्य सावधानियां
सीताफल का एक मुख्य गुण यह भी है कि यह गुरु यानी स्वभाव से काफी भारी होता है। भारी होने के कारण इसे पचाने में पाचन तंत्र को अपेक्षाकृत अधिक समय और मेहनत लगानी पड़ती है। जिन लोगों को मंदाग्नि यानी कमजोर पाचन की समस्या रहती है, उन्हें सीताफल खाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि पाचन तंत्र पहले से धीमा है और ऐसे में भारी फल अधिक मात्रा में खा लिया जाए, तो पेट में भारीपन, अपच और गैस जैसी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे लोगों को अपनी व्यक्तिगत पाचन क्षमता का आकलन करके ही सीमित मात्रा में इसका स्वाद लेना चाहिए।
सर्दियों में सेवन का सही तरीका और सुरक्षित मात्रा
शीत ऋतु के दौरान सीताफल का सेवन करते समय संयम बरतना सबसे जरूरी है। खासकर जिन व्यक्तियों को अक्सर सर्दी-जुकाम, नजला या कफ की शिकायत रहती है, उन्हें अतिरिक्त सतर्कता रखनी चाहिए। स्वाद के फेर में आकर अधिक मात्रा में फल खा लेना परेशानी को न्योता दे सकता है। डॉ. आस्था मिश्रा के अनुसार, सामान्य तौर पर एक दिन में लगभग 50 से 100 ग्राम सीताफल का गूदा खाना पर्याप्त और सुरक्षित माना जा सकता है। इतनी संतुलित मात्रा में इसका सेवन करने से शरीर को इसके पोषक लाभ भी मिलते हैं और ठंड या कफ का जोखिम भी नहीं रहता। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति और पाचन क्षमता अलग होती है, इसलिए अपनी व्यक्तिगत सेहत को प्राथमिकता देते हुए ही इसकी मात्रा तय करनी चाहिए।





















