भारत के विभिन्न हिस्सों में मानसून एक बार फिर अपने पूरे शबाब पर है, जिससे देश के एक बड़े हिस्से में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिणी क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के साथ-साथ अत्यंत तेज गति से चलने वाली हवाओं को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। इस मौसमी बदलाव का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में देखने को मिल सकता है, जहां बादलों के जोरदार तरीके से बरसने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां बेहद तेज रहने का अनुमान जताया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान कई संवेदनशील इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ-साथ भूस्खलन यानी जमीन खिसकने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। जिन इलाकों में पहले से ही जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है, वहां विशेष रूप से अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। तेज आंधी के कारण कमजोर ढांचे, पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ने की आशंका है, जिससे अगले 24 से 48 घंटे बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।
सक्रिय मौसम प्रणालियों का प्रभाव और हवाओं की खतरनाक रफ्तार
मौसम विभाग के नवीनतम पूर्वानुमानों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के लगभग 25 राज्यों में बारिश और तेज आंधी-तूफान का व्यापक असर रहने वाला है। कुछ चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों में हवा की गति बढ़कर 80 KM/H तक पहुंचने की चेतावनी दी गई है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में इन विनाशकारी हवाओं का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त होने का खतरा है। बंगाल की खाड़ी की ओर से आ रही नमी से लबालब हवाएं भारत के पूर्वी हिस्सों में पहुंचकर भारी वर्षा की अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर रही हैं। वर्तमान में उत्तर राजस्थान से लेकर उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक और दक्षिण ओडिशा से लेकर उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों तक एक मजबूत मौसमी हलचल सक्रिय बनी हुई है। इसके साथ ही, उत्तरी पंजाब के ऊपर भी एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) विकसित हुआ है। इस दोहरी मौसमी प्रणाली के चलते एक तरफ जहां मैदानी इलाकों में तेज आंधी और आक्रामक बारिश का दौर चलेगा, वहीं दूसरी तरफ पर्वतीय राज्यों में भारी भूस्खलन के कारण यातायात और संपर्क मार्ग पूरी तरह बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान
देश की राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों (दिल्ली-एनसीआर) में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदलने जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने दिल्ली के साथ-साथ गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा जैसे प्रमुख पड़ोसी शहरों में भी बारिश और तेज आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। इस अवधि के दौरान हवाओं की रफ्तार लगभग 30 से 35 KM/H रहने की उम्मीद है, जो धूल भरी आंधी का रूप ले सकती है। आसमान में घने काले बादलों का डेरा रहेगा और कुछ विशिष्ट इलाकों में अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो सकती है। इस मौसमी उथल-पुथल के कारण दिल्ली में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किए जाने का अनुमान है। यद्यपि बारिश की वजह से पारे में थोड़ी गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन हवा में अत्यधिक नमी के कारण उमस भरी स्थिति बनी रह सकती है। सड़कों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को अचानक आने वाली तेज बारिश और हवा के झोंकों से सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि इससे दृश्यता कम हो सकती है।
उत्तर प्रदेश के 20 जिलों में भारी तबाही मचा सकती है आंधी और बारिश
उत्तर प्रदेश के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान अत्यंत चिंताजनक है, जहां राज्य के कम से कम 20 जिलों में मूसलाधार बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अलर्ट जारी किया गया है। जिन जिलों में मौसम की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रहने की आशंका है, उनमें मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, मुरादाबाद, मथुरा, आगरा और अलीगढ़ शामिल हैं। इन क्षेत्रों में अचानक तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा हो सकती है। इसके अतिरिक्त, कानपुर, मिर्जापुर, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, जौनपुर और सुल्तानपुर में भी मौसम का कड़ा रुख देखने को मिलेगा। पूर्वी और तराई वाले क्षेत्रों की बात करें तो सोनभद्र, कुशीनगर, महाराजगंज, प्रयागराज और गोरखपुर में अत्यंत भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जहां रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ती रहेंगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस तेज आंधी और बारिश के दौरान अपनी खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए उचित सुरक्षात्मक उपाय करें और सिंचाई कार्य रोक दें।
बिहार में 60 KM/H की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, वज्रपात की चेतावनी
पड़ोसी राज्य बिहार में भी मौसम के हालात बेहद प्रतिकूल बने रहने की आशंका है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ-साथ 50 से 60 KM/H की रफ्तार से चलने वाली तेज आंधी का अलर्ट घोषित किया है। प्रभावित होने वाले प्रमुख जिलों में सिवान, सारण, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, गया, जहानाबाद, भोजपुर और राजधानी पटना शामिल हैं, जहां अत्यधिक तेज वर्षा होने का अनुमान है। इसके अलावा, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा और पूर्णिया में भी मानसूनी बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा। पूर्वी इलाकों में अररिया, कटिहार, भागलपुर, किशनगंज, मुंगेर, बेगूसराय और खगड़िया में भी मौसम में भारी बदलाव दर्ज किया जाएगा। इस दौरान पटना का अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के करीब बना रहेगा। आपदा प्रबंधन विभाग ने ग्रामीण इलाकों के लोगों से विशेष अपील की है कि वे आकाशीय बिजली चमकने और तेज आंधी चलने के दौरान खुले खेतों, पेड़ों के नीचे या पानी के स्रोतों के पास खड़े होने से बचें, क्योंकि बिहार में वज्रपात की वजह से जान-माल के नुकसान का जोखिम काफी अधिक रहता है।
झारखंड में दो दिनों तक रहेगा मौसम का प्रकोप, 65 KM/H की आंधी संभव
झारखंड में मानसूनी गतिविधियां बहुत अधिक सक्रिय हैं और राज्य में अगले दो दिनों तक यानी 13 और 14 सितंबर को मौसम का कड़ा मिजाज जारी रहने वाला है। मौसम विभाग ने बोकारो, रांची, रामगढ़, खूंटी, चतरा, देवघर और पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों के लिए भारी बारिश और गंभीर आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। इसके अतिरिक्त, पलामू, दुमका, हजारीबाग, धनबाद, गिरिडीह, गुमला और लातेहार में भी आंधी-पानी का संकट बना रहेगा। इस पूरे दौर में हवा की गति 60 से 65 KM/H तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जो कमजोर छतों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। रांची में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा कम होकर 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर आ सकता है। भारी बारिश के चलते शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे आपातकालीन स्थिति को छोड़कर घरों से बाहर न निकलें और बिजली कड़कने के दौरान सुरक्षित पक्के मकानों के भीतर ही शरण लें।
पश्चिम बंगाल में तूफान जैसी स्थिति, कोलकाता समेत कई जिलों में अलर्ट
पश्चिम बंगाल में चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव के कारण मौसम बेहद उग्र रूप धारण कर सकता है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में अगले 48 घंटों के दौरान भारी से अत्यंत भारी बारिश और करीब 70 KM/H की विनाशकारी गति से हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। जिन जिलों के लिए विशेष रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किए गए हैं, उनमें हावड़ा, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग और कूचबिहार शामिल हैं। इसके साथ ही, औद्योगिक क्षेत्रों जैसे दुर्गापुर, बीरभूम और कोलकाता महानगर में भी मौसम के बिगड़ने की आशंका है। कोलकाता में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का पूर्वानुमान है। इतनी तेज हवाओं के कारण बड़े पेड़ों के उखड़ने, कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने और बिजली की लाइनों के टूटने से विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप होने का गंभीर खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने तटीय जिलों के निवासियों और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है।
राजस्थान में 50 KM/H की आंधी के साथ बारिश की दस्तक
पश्चिमी भारत के राजस्थान राज्य में भी मानसून का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में मध्यम से भारी दर्जे की मानसूनी बारिश दर्ज की जा सकती है। जिन प्रमुख जिलों में बारिश और आंधी का असर रहने की संभावना है, उनमें झुंझुनू, करौली, जयपुर, उदयपुर, चूरू, बारां, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, दौसा, भरतपुर, बाड़मेर और भीलवाड़ा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में बारिश के दौरान हवा की गति 50 KM/H तक पहुंच सकती है, जिससे धूल भरी आंधी और आंशिक रूप से दृश्यता प्रभावित होने की समस्या पैदा हो सकती है। राज्य के रेगिस्तानी और अर्ध-शुष्क इलाकों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन अचानक आने वाले तूफानों से स्थानीय स्तर पर यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने और यात्रा की योजना मौसम के अनुरूप बनाने की सलाह दी गई है।



















