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वडोदरा अदालत ने 2024 नवरात्रि नाबालिग गैंगरेप में 5 को ठहराया दोषी, 25 अगस्त को सजा का ऐलानगुजरात
20 अग॰ 2026, 8:23 pm (23 दिन पहले)· 1

वडोदरा अदालत ने 2024 नवरात्रि नाबालिग गैंगरेप में 5 को ठहराया दोषी, 25 अगस्त को सजा का ऐलान

गुजरात के वडोदरा में 2024 की नवरात्रि की रात 16 वर्षीय किशोरी से गैंगरेप मामले में अदालत ने 5 आरोपियों को दोषी पाया है। अदालत 25 अगस्त को सभी दोषियों की सजा की अवधि घोषित करेगी।

गुजरात के वडोदरा शहर में साल 2024 में नवरात्रि उत्सव की रात एक 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में अदालत ने बड़ा निर्णय दिया है। इस जघन्य अपराध में शामिल सभी पांचों आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सी.एम. पवार ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषियों को ठहराए गए अपराधों पर सजा की अवधि तय करने के लिए 25 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। इस फैसले के बाद पीड़िता और उसके परिवार को लंबे समय से चले आ रहे न्यायिक इंतजार के बाद राहत की उम्मीद दिखी है।

वडोदरा अदालत का निर्णय और विधिक धाराएं

मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक नयन सुखड़वाला ने अदालत की कार्यवाही के संदर्भ में जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने आरोपियों के कृत्य को गंभीर श्रेणी में मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की सख्त धाराओं के तहत सभी पांचों को दोषी पाया है। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने न केवल गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया बल्कि सबूतों को नष्ट करने और डकैती जैसे जघन्य अपराध भी किए। कानूनी प्रावधानों के तहत इन गंभीर धाराओं में कड़ी सजा का प्रावधान मौजूद है, जिसकी घोषणा 25 अगस्त को की जाएगी।

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4 अक्टूबर 2024 की रात घटी वारदात

अभियोजन पक्ष की ओर से पेश विवरण के अनुसार यह दर्दनाक घटना 4 अक्टूबर 2024 को नवरात्रि के त्योहार के दौरान घटी थी। उस रात पूरा वडोदरा शहर पारंपरिक गरबा आयोजनों के जश्न में डूबा हुआ था और लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर मौजूद थे। उसी दौरान 16 वर्षीय पीड़िता रात लगभग 11 बजे शहर के लक्ष्मीपुरा इलाके में अपने बचपन के दोस्त से मुलाकात करने गई थी। मुलाकात के बाद रात करीब 12 बजे वे दोनों स्कूटी पर सवार होकर भयली इलाके के रास्ते लौट रहे थे। इसी बीच सुनसान सड़क पर दोपहिया वाहन से जा रहे पांच युवकों ने उन्हें रोक लिया और घेर लिया।

बंधक बनाकर प्रताड़ना और आपराधिक भूमिका

आरोपियों ने हमला करते हुए पीड़िता के साथ मौजूद उसके पुरुष मित्र को बंधक बना लिया ताकि वह किसी सहायता के लिए न पुकार सके। इसके बाद तीन आरोपियों ने किशोरी के साथ बारी-बारी से रेप किया। विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि बाकी दो आरोपी घटनास्थल पर लगातार मौजूद थे और वे पीड़िता तथा उसके मित्र को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। कानून के सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि गैंगरेप जैसे गंभीर मामलों में केवल मूकदर्शक बने रहने वाले या सहायता करने वाले लोग भी अपराध के लिए उतने ही जिम्मेदार होते हैं। अभियोजक नयन सुखड़वाला ने कहा, "अदालत ने 'समान आशय' को ध्यान में रखते हुए सभी पांचों को दोषी पाया।"

25 से 30 वर्ष की उम्र के दोषियों की पहचान

अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए पांचों व्यक्तियों की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोषियों के नाम मुमताज, अजमल, मुन्ना बंजारा, सैफ और शाहरुख हैं। इन पांचों को अदालत ने समान आपराधिक मंशा साझा करने के आधार पर सभी आरोपों में बराबर का दोषी माना है। इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर सत्र अदालत ने नियमित सुनवाई पूरी की।

विश्वामित्री नदी की तलाशी और मजबूत साक्ष्य

अदालत के इस फैसले तक पहुंचने में ठोस तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों ने मुख्य भूमिका निभाई। घटना के दौरान आरोपियों ने पीड़िता का मोबाइल फोन छीन लिया था और साक्ष्य मिटाने के इरादे से उसे विश्वामित्री नदी में फेंक दिया था। पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग की टीमों ने नदी के पानी में मोबाइल की सघन खोजबीन की थी, लेकिन फोन बरामद नहीं हो सका। इसके बावजूद अदालत ने परिस्थितियों और गवाहों के आधार पर यह साबित माना कि फोन लूटा गया था और उसे नदी में फेंका गया था।

इसके अतिरिक्त अभियोजन पक्ष ने कुल 26 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले थे, जिनमें से 3 कैमरों की रिकॉर्डिंग में आरोपी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे थे। अदालत ने इन फुटेज को मजबूत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। अभियोजक नयन सुखड़वाला ने बताया कि पीड़िता और उसके पुरुष मित्र के विस्तृत बयान अदालत के लिए दो प्रमुख प्रत्यक्ष साक्ष्य बने। साथ ही वारदात के तुरंत बाद पीड़िता ने अपने भाई और मां को पूरी आपबीती बताई थी, जिनके बयानों ने भी अभियोजन के पक्ष को अदालत में पूरी तरह मजबूत किया।

सवाल-जवाब

वडोदरा गैंगरेप मामले में अदालत ने क्या फैसला सुनाया है?
वडोदरा की सत्र अदालत ने 2024 नवरात्रि की रात 16 वर्षीय किशोरी से गैंगरेप मामले में सभी 5 आरोपियों को दोषी ठहराया है।
दोषियों की सजा का ऐलान किस तारीख को होगा?
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सी.एम. पवार ने दोषियों की सजा की घोषणा के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की है।
यह घटना कब और कहां घटी थी?
यह घटना 4 अक्टूबर 2024 की रात वडोदरा शहर के भयली इलाके के पास एक सुनसान सड़क पर घटी थी।
अदालत ने किन-किन कानूनी धाराओं के तहत आरोपियों को दोषी ठहराया है?
अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत गैंगरेप, सबूत नष्ट करने और डकैती के अपराधों में दोषी ठहराया है।
दोषी ठहराए गए पांचों व्यक्तियों के नाम क्या हैं?
दोषी ठहराए गए व्यक्तियों के नाम मुमताज, अजमल, मुन्ना बंजारा, सैफ और शाहरुख हैं, जिनकी उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है।
मामले में किस मुख्य इलेक्ट्रॉनिक और प्रत्यक्ष साक्ष्य पर विचार किया गया?
अदालत ने पीड़िता और उसके दोस्त के बयानों के साथ-साथ 26 में से 3 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को मुख्य साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
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टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·22 दिन पहले

वडोदरा की अदालत का यह त्वरित फैसला भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो अधिनियम की कठोरता को रेखांकित करता है। ऐसे संवेदनशील मामलों में समयबद्ध न्याय प्रणाली और समान आशय के कानूनी सिद्धांत का पालन अपराधियों में कड़ा संदेश देता है। आगामी 25 अगस्त को सजा की घोषणा से पीड़ित परिवार को न्याय की दिशा में एक ठोस और निर्णायक राहत मिलेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 दिन पहले

वडोदरा की अदालत द्वारा बीएनएस और पॉक्सो अधिनियम के तहत पांचों आरोपियों को दोषी ठहराया जाना यह रेखांकित करता है कि जघन्य अपराधों में समान आशय रखने वाले मूकदर्शक भी मुख्य अपराधियों जितने ही उत्तरदायी हैं। अब 25 अगस्त को होने वाली सजा की घोषणा से यह स्पष्ट होगा कि न्याय प्रणाली ऐसे गंभीर मामलों में कितनी सख्त मिसाल कायम करती है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

यह फैसला न केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर सख्त कानूनी कार्रवाई को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि जघन्य मामलों में कठोर दंड का असर कॉर्पोरेट सुरक्षा और सार्वजनिक स्थलों पर काम करने वाले कार्यबल, विशेषकर महिला कर्मचारियों के विश्वास को मजबूत करने में कितना महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में ऐसी न्यायिक दृढ़ता सामाजिक सुरक्षा और कॉर्पोरेट इकोसिस्टम में सुरक्षित माहौल के प्रति जवाबदेही तय करने में एक बड़ा मानक बनेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

यह फैसला इस बात का मजबूत उदाहरण है कि जघन्य अपराधों में त्वरित और प्रभावी पैरवी न्याय सुनिश्चित करने में कितनी अहम होती है। विशेषकर उत्सवों के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा और वीरान रास्तों पर पुलिस गश्त बढ़ाने की नीति पर अब प्रशासनिक स्तर पर और अधिक सख्ती से काम किए जाने की जरूरत है, ताकि ऐसे अपराधियों में कानून का भय बना रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला पॉक्सो और नए आपराधिक कानूनों (बीएनएस) के तहत अभियोजन पक्ष की मजबूत और समयबद्ध पैरवी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने त्वरित न्याय की उम्मीद जगाई है। अदालत द्वारा 'समान आशय' के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से लागू करना यह संदेश देता है कि अपराध में प्रत्यक्ष भागीदारी न होने पर भी मूकदर्शक या सहयोगी की भूमिका निभाने वाले हर व्यक्ति को मुख्य अपराधियों के समान ही गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अब निगाहें 25 अगस्त को सजा के ऐलान पर टिकी हैं, जो इस जघन्य मामले में विधिक अंजाम तय करेगा।

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