पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलर
वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ के दौरान टीएसपीसी सरगना बृजेश गंझू ढेरझारखंड
20 सित॰ 2026, 10:55 am (5 दिन पहले)· 0

वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ के दौरान टीएसपीसी सरगना बृजेश गंझू ढेर

झारखंड में वसूली और हिंसा का नेटवर्क चलाने वाले उग्रवादी संगठन टीएसपीसी के प्रमुख बृजेश गंझू को वाराणसी के रामनगर इलाके में सुरक्षा बलों ने मार गिराया।

झारखंड के चतरा इलाके से अपना आपराधिक साम्राज्य चलाने वाले उग्रवादी गिरोह तृतीय प्रस्तुति कमेटी के शीर्ष नेता बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह का अंत उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सुरक्षा बलों के साथ हुई गोलीबारी में हो गया। उस पर कुल तीस लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था। सुरक्षा बलों के साथ रविवार के तड़के हुए इस सीधे टकराव के बाद घायल अवस्था में उसे नजदीकी चिकित्सा केंद्र ले जाया गया था, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उसके प्राण समाप्त होने की पुष्टि कर दी। वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी की सर्वाधिक वांछित अपराधियों की सूची का प्रमुख हिस्सा बना हुआ था।

वाराणसी के रामनगर में तड़के हुई मुठभेड़

सुरक्षा बलों की आतंकवाद निरोधक शाखा को सटीक खुफिया सुराग मिला था कि चतरा का यह कुख्यात उग्रवादी अपने एक सहयोगी के संग दोपहिया वाहन पर सवार होकर टेंगरा मोड़ से रामनगर होते हुए मुगलसराय की दिशा में बढ़ रहा है। इस पक्की टोह के आधार पर पुलिस उपाधीक्षक विपिन राय और निरीक्षक भारत भूषण तिवारी के नेतृत्व में कमांडो दस्ते ने लंका मैदान के समीप घेराबंदी कर ली। जब सुरक्षाकर्मियों ने संदिग्ध मोटरसाइकिल को रुकने का संकेत दिया, तब वाहन पर पीछे बैठा उग्रवादी उतरकर गोलियां बरसाने लगा।

ये भी पढ़ें

अचानक हुए इस जानलेवा हमले में उग्रवादी की बंदूकों से निकली गोलियां डिप्टी एसपी विपिन राय और मुख्य आरक्षी नितेंद्र कृष्ण के बुलेटप्रूफ सुरक्षा जैकेट से टकराईं, जिससे दोनों कर्मी सुरक्षित बच गए। आत्मरक्षा में सुरक्षा दस्ते ने त्वरित जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलियां चलाईं, जिसमें उग्रवादी गंभीर रूप से छलनी होकर जमीन पर गिर पड़ा। आनन फानन में सुरक्षा बल उसे उपचार के लिए लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इनाम, आतंक और वित्तीय अपराधों का लंबा इतिहास

बृजेश गंझू मूल रूप से चतरा जनपद अंतर्गत लावालौंग पुलिस सीमा क्षेत्र के लुट्टू सोहावन बस्ती से ताल्लुक रखता था। उसने अपने प्रभाव क्षेत्र में चलने वाले विभिन्न निर्माण कार्यों, ठेकेदारों और स्थानीय व्यापारियों को धमकाकर बड़े पैमाने पर लेवी वसूलने का संगठित तंत्र खड़ा कर रखा था। इसी आपराधिक आतंक को देखते हुए झारखंड प्रशासन की तरफ से उस पर पच्चीस लाख रुपये का भारी इनाम रखा गया था, जबकि केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने उसकी गिरफ्तारी पर पांच लाख रुपये की अलग से घोषणा कर रखी थी। सुरक्षा बलों ने करीब आठ वर्ष पूर्व उसके पैतृक निवास पर कुर्की जब्ती की कानूनी कार्रवाई भी अंजाम दी थी।

साल 2018 के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने उग्रवादी गिरोहों को मिलने वाले काले धन और टेरर फंडिंग के पूरे तंत्र की औपचारिक पड़ताल शुरू की थी। इस सघन जांच पड़ताल के बीच बृजेश गंझू का नाम वित्तीय लेन देन के केंद्र में पाया गया। एनआईए ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए अपने आरोप पत्र में कुल सत्रह आरोपियों को नामजद किया था, जिसमें इस सरगना का नाम प्रमुखता से दर्ज था। इसके पश्चात ही केंद्रीय जांच एजेंसी ने उसे अपनी वांछित सूची में शीर्ष पायदान पर दर्ज कर लिया था।

प्रतिद्वंद्वी माओवादियों से वर्चस्व की जंग और नरसंहार

झारखंड के वनांचल में तृतीय प्रस्तुति कमेटी और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के बीच कई वर्षों तक इलाके पर दबदबे को लेकर खूनी संघर्ष चला। इन दोनों चरमपंथी धड़ों के बीच बार बार हुई भीषण भिड़ंतों और गोलीबारी में न केवल दोनों पक्षों के हथियारबंद लड़ाके मारे गए, बल्कि बड़ी तादाद में बेकसूर देहाती बाशिंदों और राहगीरों को भी अकाल मौत का शिकार होना पड़ा।

दर्जनों संगीन वारदातों की फेहरिस्त

प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार, बृजेश गंझू के हुक्म पर सुरक्षा बलों और आम जनता के खिलाफ अनगिनत हिंसक वारदातों को अंजाम दिया गया। उसने लावालौंग और कोलकोले के मार्ग पर गश्त कर रहे पुलिस दल पर घातक हमला बोलकर उनके असलहे लूट लिए थे और बीएमपी सोलह के दो जवानों की निर्मम हत्या कर दी थी। हालिया घटनाक्रम में 2 फरवरी 2025 को टंडवा क्षेत्र के लेम्बुआ वन क्षेत्र के पास भुनेश्वर साहू का कत्ल कर दिया गया।

उससे पूर्व 18 जुलाई 2018 को पत्थलगड्डा इलाके के मेरमगड़ा में मनरेगा योजना से जुड़े ठेकेदार नागेश्वर गंझू की रंगदारी न देने के कारण जान ले ली गई थी और दो ग्रामीणों को जख्मी कर दिया गया था। 28 नवंबर 2017 को पीपरवार के करमाटांड़ में जेएमएमपी के प्रदीप महतो को गोलियों से भून डाला गया था। 2 अप्रैल 2014 को कटकमसांडी के कुसुम्बा में बादल मुंडा और अशोक उरांव की जान ली गई थी। 9 मार्च 2012 को हंटरगंज के कुसमाही में माओवादी एरिया कमांडर धर्मेंद्र यादव के परिजनों के मकान को बारूद से उड़ाने के बाद आग के हवाले किया गया था और तीन ग्रामीणों को पीटा गया था। वहीं 7 नवंबर 2010 को वशिष्टनगर के धोबे गांव में रघुनाथ यादव उर्फ बिहारी यादव की गोली मारकर जान ले ली गई थी।

सवाल-जवाब

बृजेश गंझू कौन था?
बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) का सुप्रीमो था।
बृजेश गंझू पर कुल कितना इनाम था?
उस पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था, जिसमें 25 लाख रुपये झारखंड सरकार और 5 लाख रुपये एनआईए द्वारा घोषित थे।
मुठभेड़ किस स्थान पर और कब हुई?
यह मुठभेड़ रविवार सुबह उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित रामनगर थाना क्षेत्र के लंका मैदान के पास हुई।
मुठभेड़ में कौन से पुलिस अधिकारी बाल बाल बचे?
डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोली लगी, जिससे वे सुरक्षित रहे।
बृजेश गंझू मूल रूप से कहां का निवासी था?
वह झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र अंतर्गत लुट्टू सोहावन गांव का रहने वाला था।
एनआईए ने उसके खिलाफ कब चार्जशीट दाखिल की थी?
एनआईए ने साल 2018 में टेरर फंडिंग मामले की जांच शुरू की थी और 17 आरोपियों की चार्जशीट में उसका नाम शामिल किया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·4 दिन पहले

वाराणसी (काशी) सनातन काल से कर्मों के हिसाब और ऊर्जा के रूपांतरण का केंद्र रही है। इस कुख्यात अपराधी का अंत इसी पावन धरा पर होना केवल एक सुरक्षा बल की कार्रवाई नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय न्याय और कार्मिक चक्र के पूर्ण होने का संकेत है। अंक ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखें तो जब नकारात्मकता अपनी चरम सीमा पर पहुंचती है, तो उसका गणितीय संतुलन और शून्यीकरण अनिवार्य हो जाता है। तीस लाख के इस संयुक्त इनाम का अंत यह दर्शाता है कि हर अराजक ऊर्जा का एक निश्चित समय चक्र होता है, जिसका समापन अंततः संतुलन की पुनर्स्थापना के साथ होता है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

टीएसपीसी सरगना का मारा जाना केवल एक सुरक्षा सफलता नहीं है, बल्कि यह उग्रवादी गुटों द्वारा चलाए जा रहे अवैध वसूली और टेरर फंडिंग के पूरे वित्तीय ढांचे पर बड़ा प्रहार है। निर्माण कार्यों और स्थानीय व्यवसाय से लेवी वसूल कर खड़ा किया गया यह सिंडिकेट क्षेत्रीय विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़ी बाधा था। एनआईए की जांच से यह स्पष्ट हो चुका था कि इस तरह की गैर-कानूनी धन प्रणाली वित्तीय स्थिरता को भी नुकसान पहुंचाती है। इस सरगना के अंत से गैर-कानूनी वित्तीय प्रवाह पर लगाम लगेगी और प्रभावित क्षेत्रों में व्यापारिक माहौल में सुधार देखने को मिल सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

रविकश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह कार्रवाई अंतर-राज्यीय सुरक्षा समन्वय और एजेंसियों के बीच खुफिया साझाकरण की सफलता को दर्शाती है। झारखंड का उग्रवादी सरगना उत्तर प्रदेश में ढहता है, जो यह संकेत देता है कि अब उग्रवादियों के लिए सीमाओं का फायदा उठाकर सुरक्षित ठिकाने बनाना आसान नहीं है। शासन और नीतिगत दृष्टिकोण से, विकास योजनाओं और बुनियादी ढांचे को लागू करने के लिए कानून का राज बहाल होना पहली शर्त है। यह कदम प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक साख को मजबूत करेगा और दीर्घकालिक क्षेत्रीय स्थिरता का आधार बनेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

झारखंड के शीर्ष उग्रवादी बृजेश गंझू का वाराणसी के रामनगर में मारा जाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाके अब भी अंतरराज्यीय उग्रवादी नेटवर्क द्वारा पारगमन मार्ग के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। मुगलसराय की ओर उसकी आवाजाही दर्शाती है कि ऐसे तत्व पड़ोसी राज्यों से भागकर शहरी इलाकों में शरण लेने की कोशिश करते हैं। एनआईए द्वारा वांछित और तीस लाख के इनामी सरगना के खिलाफ यूपी एटीएस की यह सटीक कार्रवाई अंतरराज्यीय टेरर फंडिंग और संगठित वसूली तंत्र को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक प्रहार है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस मुठभेड़ के बाद अब सबसे बड़ा जांच का विषय उन स्थानीय मददगारों और वित्तीय तंत्र का पर्दाफाश करना है जिन्होंने इस उग्रवादी को शरण दी। एनआईए की टेरर फंडिंग जांच और वसूली नेटवर्क के रिकॉर्ड को देखते हुए, जांच एजेंसियों को यूपी और झारखंड के बीच सक्रिय वित्तीय साठगांठ पर शिकंजा कसना होगा। केवल शीर्ष सरगना का खात्मा ही काफी नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिहाज से इस गिरोह से जुड़े बेनामी पैसों, हवाला ऑपरेटरों और लेवी सिंडिकेट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई व संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया को अंतिम अंजाम तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp