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विकसित भारत के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा आवश्यक, इंटेलिजेंस ब्यूरो सम्मेलन में अमित शाह ने घुसपैठ और आतंकवाद पर दिया कड़ा संदेशदिल्ली
26 अग॰ 2026, 12:00 am (20 दिन पहले)· 2

विकसित भारत के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा आवश्यक, इंटेलिजेंस ब्यूरो सम्मेलन में अमित शाह ने घुसपैठ और आतंकवाद पर दिया कड़ा संदेश

नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो के सुरक्षा सम्मेलन में गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लिए आंतरिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर बल दिया, साथ ही आतंकवाद के खिलाफ 360 डिग्री एक्शन और नशे पर 3D रणनीति की घोषणा की।

नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) द्वारा आयोजित 'राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन' के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर एक व्यापक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय किए गए वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के भीतर एक मजबूत और सुरक्षित माहौल का होना बेहद अनिवार्य है। यदि भारत को अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, उद्योग और अन्य सभी वैश्विक क्षेत्रों में शीर्ष स्थान प्राप्त करना है, तो आंतरिक सुरक्षा के स्तंभों को पहले से अधिक मजबूत बनाना होगा।

भविष्य के खतरों का विश्लेषण और 15 से 20 वर्षों की दीर्घकालिक रणनीति

अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों से कहा कि वे केवल वर्तमान की समस्याओं से निपटने तक सीमित न रहें, बल्कि आने वाले 15 से 20 वर्षों में पैदा होने वाली संभावित सुरक्षा चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाएं। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन जैसे मंचों का उद्देश्य यही होना चाहिए कि वे भविष्य में उभरने वाले रुझानों का गहराई से अध्ययन करें। अगर किसी खतरे की पहचान समय रहते कर ली जाती है, तो उसे बड़ा रूप लेने से पहले ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश का सुरक्षा तंत्र केवल घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने वाला न होकर, भावी संकटों का पहले से मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

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नक्सलवाद, नशे के कारोबार और पूर्वोत्तर की सुरक्षा चुनौतियों पर नियंत्रण

सुरक्षा क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यदि पूर्ववर्ती सरकारों ने नक्सलवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी समस्याओं को शुरुआत में ही गंभीरता से पहचाना होता, तो देश को दशकों तक इन संकटों का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि, वर्तमान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF), राज्य पुलिस बलों और विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के कारण इन तीनों हॉटस्पॉट में सुरक्षा स्थिति में काफी सुधार हुआ है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बना यह मजबूत समन्वय मॉडल ही भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने में निर्णायक साबित होगा।

सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोधी नीति और 'प्रहार' की रणनीति

सीमा की सुरक्षा पर बात करते हुए अमित शाह ने बताया कि बीते आठ महीनों में उन्होंने सभी स्थल-सीमा से लगे राज्यों का दौरा किया है और वहां की सुरक्षा एजेंसियों के साथ चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा दृष्टिकोण से संबंधित दस्तावेज साझा किए हैं। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बहुत ही कम समय के भीतर देश को अवैध घुसपैठियों से पूरी तरह मुक्त कराना है। अवैध घुसपैठ केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, देश की अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा, "यह देश धर्मशाला नहीं है और इस देश में देश के नागरिकों को ही रहने का अधिकार है।"

आतंकवाद के खिलाफ अभियान का जिक्र करते हुए उन्होंने अपील की कि 'प्रहार' रणनीति को केवल कागजी दस्तावेज तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे दैनिक सुरक्षा अभियानों का हिस्सा बनाया जाए। आतंकवादी तंत्र को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए 360 डिग्री एक्शन प्लान पर अमल करना होगा।

पीएफआई पर कार्रवाई की मिसाल और नशे के खिलाफ 3D मॉडल

गृह मंत्री ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के विरुद्ध की गई त्वरित कार्रवाई को केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय की एक बेहतरीन मिसाल बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि एक ही रात में की गई व्यापक कार्रवाई के जरिए संगठन पर प्रतिबंध लगाना और उसके नेटवर्क को ध्वस्त करना इसी तालमेल की वजह से संभव हो सका। इसके अलावा, नशे के खिलाफ जंग को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए उन्होंने राज्यों से 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029' को जमीन पर लागू करने को कहा। युवाओं को नशे से बचाने के लिए डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय यानी 3D रणनीति अपनाने का आह्वान किया गया, ताकि केंद्र और राज्य मिलकर नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म कर सकें।

सवाल-जवाब

गृह मंत्री अमित शाह ने आंतरिक सुरक्षा को लेकर यह भाषण कहां दिया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में यह विचार व्यक्त किए।
सुरक्षा एजेंसियों को भविष्य के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को केवल वर्तमान चुनौतियों तक सीमित न रहकर अगले 15 से 20 वर्षों की संभावित सुरक्षा समस्याओं की पहचान कर रणनीति बनानी चाहिए।
अवैध घुसपैठ को लेकर सरकार की नीति क्या है?
अमित शाह के अनुसार, अवैध घुसपैठ देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए बड़ा खतरा है, इसलिए सरकार इसे जल्द समाप्त करना चाहती है।
मादक पदार्थों के खिलाफ 3D रणनीति क्या है?
नशे के खिलाफ 3D रणनीति का अर्थ डिटेक्ट (पहचान), डिसरप्ट (बाधित करना) और डिस्ट्रॉय (नष्ट करना) है, जिसे नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 के तहत लागू किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·20 दिन पहले

वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों के साथ आंतरिक सुरक्षा का यह ढांचा बेहद अहम है। भविष्य की चुनौतियों का 15 से 20 साल पहले अनुमान लगाने की रणनीति और घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस का संदेश यह तय करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति अब प्रतिक्रियावादी से बदलकर पूरी तरह सक्रिय और दूरदर्शी हो चुकी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

वर्ष 2047 के 'विकसित भारत' लक्ष्य के साथ आंतरिक सुरक्षा को जोड़ना एक दूरदर्शी राजनीतिक और रणनीतिक कदम है। अमित शाह द्वारा उल्लिखित 360-डिग्री आतंकवाद विरोधी और 3D ड्रग्स विरोधी नीतियां तथा चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा इस बात का संकेत हैं कि केंद्र सरकार सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि आर्थिक विकास और जनसांख्यिकीय स्थिरता की धुरी मानती है। आने वाले समय में केंद्र-राज्य समन्वय और राज्यों की पुलिस का आधुनिकीकरण इस नीति की सफलता तय करेगा।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·20 दिन पहले

एक हेल्थ संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि आंतरिक सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कदम सीधे तौर पर देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़े हैं। मादक पदार्थों की तस्करी युवाओं को गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट और नशे की लत की ओर धकेलती है, जिससे जनसांख्यिकीय स्थिरता और मानव पूंजी को बड़ा नुकसान पहुंचता है। जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी और नशा नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त नहीं होगा, तब तक एक स्वस्थ और उत्पादक 'विकसित भारत' का निर्माण अधूरा रहेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को जो खाका खींचा गया है, उसका सीधा असर उत्तर प्रदेश जैसे सीमावर्ती और रणनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों पर पड़ेगा। नेपाल से सटी खुली सीमाओं और जनसांख्यिकीय संतुलन जैसे मुद्दों पर गृह मंत्री का यह कड़ा संदेश राज्य स्तर की पुलिस और खुफिया तंत्र के लिए आने वाले समय में एक दीर्घकालिक कार्ययोजना तय करेगा, जिससे अवैध घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर लगाम कसने में और अधिक मदद मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

गृह मंत्री के इस 360-डिग्री एक्शन और दीर्घकालिक 15-20 वर्षों के खाके से स्पष्ट है कि अब अपराधियों और राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ त्वरित और भविष्यवादी रणनीति अपनाई जाएगी। अदालतों और कानूनी मामलों में इन मामलों की पैरवी को मजबूत करने के साथ-साथ सीमा सुरक्षा और खुफिया तालमेल को जमीनी स्तर पर और अधिक कड़ाई से लागू करना होगा, ताकि न्याय व्यवस्था तुरंत परिणाम दे सके।

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