नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शनिवार, 12 सितंबर को 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच आयोजित इस महत्वपूर्ण आयोजन पर अमेरिका और यूरोप सहित पूरे विश्व की निगाहें टिकी हुई हैं। इस वर्ष ब्रिक्स संगठन की अध्यक्षता भारत संभाल रहा है। सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को एक स्पष्ट और दूरगामी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की सबसे बड़ी प्राथमिकता साधारण नागरिक और मानवता की भलाई होनी चाहिए। दुनिया भर से आए प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत की अध्यक्षता का मूल दर्शन मानवता और आम लोगों को केंद्र में रखने पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस संगठन की भूमिका केवल सरकारों की नीतियों और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके हर फैसले का प्रत्यक्ष लाभ जमीनी स्तर पर आम जनता तक पहुंचना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने भारत के अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि भारत आज किसी भी राष्ट्र या समूह के विरोध में नहीं खड़ा है, बल्कि वह समावेशी विकास और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की नीति में दृढ़ विश्वास रखता है।
आम नागरिकों को केंद्र में रखकर समावेशी विकास की दिशा
भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान बहुपक्षीय सहयोग को पारंपरिक कूटनीतिक बैठकों के दायरे से बाहर निकालकर व्यापक स्वरूप दिया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय अध्यक्षता का मुख्य उद्देश्य नए नवाचारों, आपसी तालमेल और टिकाऊ विकास को गति देना रहा है। इन प्राथमिकताओं का सीधा मकसद ब्रिक्स की संपूर्ण कार्यप्रणाली को सामान्य नागरिकों की दैनिक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं से जोड़ना है। इस दिशा में किए गए विस्तृत प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के कार्यकाल में देश के 30 से अधिक विभिन्न शहरों में 350 से ज्यादा उच्चस्तरीय और विषयगत बैठकें आयोजित की गईं। इन आयोजनों के माध्यम से ब्रिक्स की गतिविधियों को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में मौजूद सभी ब्रिक्स सदस्य देशों की टीमों, अधिकारियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया, जिनके निरंतर सहयोग से इन वृहद आयोजनों को सफलता पूर्वक पूरा किया जा सका। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है क्योंकि ब्रिक्स संगठन अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।
ब्रिक्स के 20 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा की तुलना प्रधानमंत्री ने मानव जीवन के विकास चरणों से की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार 20 वर्ष की आयु में प्रवेश करते ही किसी व्यक्ति की जिम्मेदारियां, सोच और कार्य करने की क्षमताएं एक नया मोड़ लेती हैं, ठीक उसी तरह ब्रिक्स भी अब अपने पूर्ण परिपक्वता के चरण में पहुंच चुका है। दो दशकों के इस सफर में संगठन ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी एक सशक्त और स्वतंत्र पहचान बनाई है। अब समय आ गया है कि अगले 20 वर्षों के लिए एक दूरदर्शी, व्यावहारिक और महत्वाकांक्षी रूपरेखा तैयार की जाए। इसकी शुरुआत स्वयं संगठन की आंतरिक कार्यप्रणाली में सुधार और उसे अधिक प्रभावी बनाने से होनी चाहिए।
संगठन की कार्यप्रणाली में निरंतरता और संस्थागत सुधार
ब्रिक्स के भीतर प्रशासनिक और संस्थागत निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष एक सदस्य देश से दूसरे सदस्य देश के पास स्थानांतरित होती है। हालांकि, नेतृत्व बदलने के बावजूद संगठन के तहत शुरू की गई परियोजनाओं और पहलों की गति में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने एक स्थाई निगरानी तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया। इसके तहत वर्तमान अध्यक्षता संभाल रहे देश के साथ-साथ पिछली अध्यक्षता वाले देश के समूह को मिलाकर एक विशेष व्यवस्था बनाई जा सकती है, जो विभिन्न पहलों, प्रस्तावों और निर्णयों के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा और ट्रैकिंग कर सके।
इसके अलावा, बैठकों के दौरान लिए गए निर्णयों, सहमतियों और उनके व्यावहारिक परिणामों का एक सुरक्षित और पारदर्शी रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री ने एक आधुनिक डिजिटल संग्रह बनाने का सुझाव भी रखा। इस सुरक्षित डिजिटल आर्काइव के माध्यम से भविष्य में नीतियों के विश्लेषण, जानकारी के आदान-प्रदान और नए सदस्य देशों के साथ समन्वय को अत्यधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
वैश्विक वैश्विक व्यवस्था में बदलाव और संस्थागत प्रतिनिधित्व
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के आंतरिक सहयोग से आगे बढ़ते हुए वैश्विक संस्थाओं में बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ब्रिक्स को मजबूत करने के साथ-साथ हमें वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में सुधार की दिशा भी तय करनी होगी। उन्होंने टिप्पणी की कि दुनिया की मौजूदा शासन व्यवस्था और निर्णय लेने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ढांचा एक पिरामिड की भांति दिखाई देता है, जहां शीर्ष पर बहुत कम देशों का नियंत्रण है और अधिकांश विकासशील राष्ट्रों की आवाज को उचित स्थान नहीं मिल पाता।
प्रधानमंत्री के इस बयान को संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अविलंब सुधार की भारत की पुरानी मांग के संदर्भ में देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से यह पक्ष रखता रहा है कि वैश्विक मंचों पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को जनसंख्या और आर्थिक योगदान के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। ब्रिक्स के इस 20वें सम्मेलन से दिया गया यह संदेश आने वाले समय में वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में संगठन की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है।
टिकाऊ विकास, पर्यावरण और संकट से निपटने की क्षमता
भारत की अध्यक्षता का एक मुख्य पहलू जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकटों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच साझा रणनीतियों का निर्माण करना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकताएं केवल औपचारिक घोषणा पत्रों तक सीमित नहीं थीं। संकट से उबरने की क्षमता, नई प्रौद्योगिकियों का समावेश, आपसी व्यापारिक सहयोग और पर्यावरण के अनुकूल हरित विकास को मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया। इन सभी विषयों का सीधा संबंध आम लोगों के जीवन स्तर, रोजगार के अवसरों और स्वास्थ्य से है।
उन्होंने कहा कि चाहे आर्थिक वृद्धि का विषय हो या फिर आधुनिक तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण का क्षेत्र, ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ता सहयोग तभी सार्थक होगा जब इसका अंतिम लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। अगले 20 वर्षों के लिए पीएम मोदी का यही संदेश है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप ब्रिक्स को स्वयं में बदलाव लाना होगा, अपने निर्णयों की निगरानी मजबूत करनी होगी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का वास्तविक लाभ सामान्य जनजीवन को सुधारने में लगाना होगा।
वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा और द्विपक्षीय कूटनीति
20वें ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन एक ऐसे समय में हो रहा है जब संपूर्ण विश्व बहुध्रुवीय व्यवस्था और तेजी से बदलते कूटनीतिक समीकरणों के दौर से गुजर रहा है। इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा ले रहे हैं। बहुपक्षीय मंच के अतिरिक्त इस दौरान शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय बातचीत पर भी दुनिया की नजरें टिकी हैं। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है।
इसके पूर्व, सम्मेलन की शुरुआत से ठीक पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी विस्तृत द्विपक्षीय चर्चा संपन्न हो चुकी है। शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की अन्य सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ भी अलग-अलग बैठकें निर्धारित की गई हैं। इस तरह ब्रिक्स 2026 केवल एक सामूहिक मंच तक सीमित न रहकर, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, व्यापार और वैश्विक सुरक्षा के भविष्य को आकार देने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक केंद्र बनकर उभरा है।



















