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विशाखापत्तनम के लिटिल गार्डन्स स्कूल में शिक्षक के थप्पड़ के बाद 6 साल के छात्र की मौतआंध्र प्रदेश
20 अग॰ 2026, 8:01 pm (41 दिन पहले)· 4

विशाखापत्तनम के लिटिल गार्डन्स स्कूल में शिक्षक के थप्पड़ के बाद 6 साल के छात्र की मौत

विशाखापत्तनम के वन टाउन क्षेत्र में स्थित लिटिल गार्डन्स स्कूल में यूकेजी के 6 साल के छात्र प्रणय तेजा की शिक्षक द्वारा थप्पड़ मारे जाने के बाद क्लासरूम में ही गिरकर मौत हो गई।

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम शहर से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ स्कूल में होमवर्क चेक करने के दौरान शिक्षक द्वारा मारे गए थप्पड़ से डरे 6 साल के मासूम छात्र की क्लासरूम में ही गिरकर मौत हो गई। यह हृदयविदारक मामला वन टाउन क्षेत्र स्थित लिटिल गार्डन्स स्कूल का है, जहाँ यूकेजी में पढ़ने वाला छात्र प्रणय तेजा शिक्षक की कथित शारीरिक प्रताड़ना का शिकार हो गया। घटना के तुरंत बाद जब बच्चे को गंभीर हालत में किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, तो वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद मृतक बच्चे के परिजनों और पड़ोसियों में भारी आक्रोश फैल गया तथा उन्होंने अस्पताल परिसर के बाहर उग्र प्रदर्शन करते हुए दोषी शिक्षक और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

क्लासरूम का घटनाक्रम और सीसीटीवी फुटेज की सच्चाई

इस पूरे मामले की भयावहता तब उजागर हुई जब स्कूल प्रशासन द्वारा क्लासरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर सामने आई। वायरल वीडियो फुटेज में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि क्लासरूम में होमवर्क की जांच चल रही थी। इसी दौरान महिला शिक्षक अचानक 6 साल के प्रणय तेजा के पास पहुँचती है और उसे सहपाठियों के सामने अपमानित करने की नीयत से उसके कपड़ों को पकड़कर खींचने लगती है। मासूम बच्चा बेहद डर जाता है और रोते हुए शिक्षक के सामने अपने छोटे-छोटे हाथ जोड़कर रुकने की गुहार लगाता है। लेकिन शिक्षक का दिल नहीं पसीजा और उसने बच्चे को जोर से डांटते हुए उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया।

सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि थप्पड़ पड़ते ही मासूम बच्चा कुछ पलों के लिए एकदम सुन्न और स्तब्ध खड़ा रह जाता है। शारीरिक दर्द और अत्यधिक मानसिक खौफ के कारण वह अपना संतुलन खो बैठता है और सीधे अपनी शिक्षक के ऊपर ही बेसुध होकर गिर पड़ता है। इसके बाद क्लासरूम में अफरा-तफरी मच जाती है। बच्चे के शरीर में कोई हलचल न देखकर आनन-फानन में उसे निकटतम किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल परिसर में परिजनों का हंगामा और विरोध प्रदर्शन

किंग जॉर्ज अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा बच्चे को 'ब्रॉट डेड' यानी अस्पताल लाने से पहले ही मृत घोषित किए जाने की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुँची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बच्चे के माता-पिता, रिश्तेदार और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में अस्पताल के बाहर जमा हो गए और उन्होंने स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिजनों का आरोप है कि शिक्षक द्वारा की गई बेरहम पिटाई और अत्यधिक भय के कारण ही उनके बच्चे की जान गई है।

मृतक बच्चे के रिश्तेदारों ने मांग की है कि लिटिल गार्डन्स स्कूल के प्रबंधन और आरोपी शिक्षक पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों पर इस प्रकार का शारीरिक बल प्रयोग पूरी तरह से अमानवीय है और इस घटना की निष्पक्ष जाँच करके सभी दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए ताकि किसी अन्य मासूम के साथ ऐसा हादसा न हो।

पिता का भावुक बयान और घटना के दिन की पूरी दास्तान

मृतक प्रणय तेजा के पिता कृष्ण प्रसाद अपने मासूम बेटे को खोने के बाद गहरे सदमे में हैं। रोते हुए कृष्ण प्रसाद ने घटना वाले दिन के घटनाक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुरुवार की सुबह उनका बेटा एकदम सामान्य रूप से सोकर उठा था। त्योहार की छुट्टियां बीतने के बाद उसने खुद ही खुशी-खुशी स्कूल जाने की इच्छा जाहिर की थी। कृष्ण प्रसाद ने बताया कि उन्होंने सोचा कि अभी परीक्षाओं में समय है और बच्चा पढ़ाई के प्रति उत्साहित है, इसलिए उन्होंने उसे स्कूल भेज दिया।

कृष्ण प्रसाद ने आगे बताया कि दोपहर लगभग 12 बजे उन्हें एक फोन के जरिए इस अनहोनी की जानकारी मिली। हैरानी की बात यह रही कि स्कूल प्रशासन ने बच्चे के बेहोश होने या अस्पताल ले जाने की सूचना उसके पिता को सीधे नहीं दी। उनके घर के पास स्थित रिश्तेदार के बाड़े में काम करने वाले रसोइयों ने फोन करके उन्हें घटना के बारे में बताया। सूचना मिलते ही कृष्ण प्रसाद बदहवास हालत में किंग जॉर्ज अस्पताल पहुँचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि मासूम की सांसे काफी पहले थम चुकी थीं।

अपने बयान में कृष्ण प्रसाद ने कहा, "डॉक्टरों ने मुझे बताया कि अस्पताल लाने से करीब आधा घंटा पहले ही उसकी जान जा चुकी थी।" उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि घटना से पहले सीसीटीवी कैमरों में साफ दिखा कि शिक्षक ने उनके बेटे को बुरी तरह डराया, घुमाया और थप्पड़ मारा, जिससे खौफजदा होकर वह वहीं गिर पड़ा और दम तोड़ दिया।

बच्चे की सेहत का इतिहास और तिरुपति यात्रा की जानकारी

अस्पताल के बाहर जब मीडिया और पुलिस अधिकारियों ने पिता से बच्चे के स्वास्थ्य इतिहास के बारे में पूछा, तो कृष्ण प्रसाद ने पूरी स्पष्टता के साथ बताया कि उनका बेटा पूरी तरह से स्वस्थ था। उसे किसी भी प्रकार की कोई पुरानी बीमारी, दिल की समस्या या वायरल बुखार जैसी शिकायत नहीं थी। घटना की पूर्व संध्या को भी वह अपने घर पर सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद कर रहा था और सुबह भी बिल्कुल ठीक-ठाक उठा था।

कृष्ण प्रसाद ने यह भी साझा किया कि उनका परिवार हाल ही में धार्मिक यात्रा पर गया था। वे सभी तिरुपति के दर्शन करके मंगलवार की सुबह ही घर वापस लौटे थे। यात्रा के दौरान और लौटने के बाद भी बच्चा पूरी तरह प्रसन्न और ऊर्जावान था। पिता ने बताया कि वे आरोपी शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से पहले से नहीं जानते थे और न ही उन्हें इस बात का कोई अंदाजा है कि शिक्षक ने किस मामूली बात या किस गलती के लिए बच्चे पर इतना जानलेवा थप्पड़ मारा।

पुलिस की तफ्तीश और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद विशाखापत्तनम पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने स्कूल का दौरा कर क्लासरूम के सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में ले लिया है और घटना के समय वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों व गवाहों से पूछताछ कर रही है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या बच्चे को पूर्व से कोई अज्ञात चिकित्सीय स्थिति तो नहीं थी, जो थप्पड़ के डर से अचानक उग्र हो गई।

विशाखापत्तनम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों पर सख्त कानूनी धाराएं लगाई जाएंगी। निष्पक्ष जांच के इस आश्वासन के बाद ही परिजनों को शांत कराया जा सका।

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सवाल-जवाब

यह दुखद घटना विशाखापत्तनम के किस इलाके और स्कूल में हुई?
यह घटना विशाखापत्तनम के वन टाउन क्षेत्र में स्थित लिटिल गार्डन्स स्कूल में गुरुवार को हुई।
मृतक बच्चे का क्या नाम था और वह किस कक्षा में पढ़ता था?
मृतक बालक का नाम प्रणय तेजा था और वह स्कूल में यूकेजी (UKG) का 6 साल का छात्र था।
सीसीटीवी फुटेज में क्लासरूम के अंदर क्या देखा गया?
सीसीटीवी में दिखा कि होमवर्क जांचते समय शिक्षक ने कपड़े खींचकर बच्चे को डराया और गाल पर थप्पड़ मारा, जिसके तुरंत बाद बच्चा बेसुध होकर गिर पड़ा।
बच्चे के पिता कृष्ण प्रसाद को घटना की जानकारी कैसे मिली?
दोपहर 12 बजे रिश्तेदार के बाड़े में काम करने वाले रसोइयों ने पिता को फोन करके घटना की सूचना दी, क्योंकि स्कूल प्रबंधन ने सीधे फोन नहीं किया था।
क्या बच्चे को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी?
पिता के अनुसार बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था, घटना की सुबह भी ठीक था और हाल ही में मंगलवार को परिवार के साथ तिरुपति यात्रा से लौटा था।
पुलिस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
विशाखापत्तनम पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·41 दिन पहले

यह घटना बाल सुरक्षा और स्कूलों में होने वाले मानसिक तथा शारीरिक उत्पीड़न पर एक गंभीर सवाल खड़े करती है। सिनेमा जगत अक्सर ऐसे संवेदनशील मुद्दों को बड़े परदे पर उठाकर समाज को झकझोरने का प्रयास करता है, लेकिन वास्तविक जीवन में इस तरह की क्रूरता यह दर्शाती है कि शैक्षणिक संस्थानों में निगरानी और सुरक्षा के मोर्चे पर अभी भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कदम उठने से ही व्यवस्था में कड़ा संदेश जाएगा।

Kavya Nair@kavya-nair·41 दिन पहले

यह दुखद घटना केवल एक स्कूल की विफलता नहीं, बल्कि हमारे शैक्षिक और बाल पर्यटन परिवेश में मानसिक और शारीरिक सुरक्षा के गंभीर संकट को दर्शाती है। यदि स्कूलों जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर बच्चे असुरक्षित रहेंगे, तो यह पर्यटन और बाल-कल्याण के वैश्विक रुझानों पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डालेगा। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए शिक्षण संस्थानों में सख्त मनोवैज्ञानिक निगरानी और बाल-अधिकारों के प्रति कड़े नियम लागू करना अनिवार्य हो गया है।

Ravikash Gupta@ravikash·41 दिन पहले

विशाखापत्तनम के इस स्कूल में हुई घटना यह साबित करती है कि शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की निगरानी कितनी लचर हो चुकी है। कक्षा के भीतर शिक्षकों द्वारा इस तरह का अमानवीय व्यवहार और कॉर्पोरेट-जैसी लापरवाही न सिर्फ आपराधिक है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की नैतिक विफलता भी है। सीसीटीवी फुटेज का सार्वजनिक होना यह दिखाता है कि जवाबदेही तय करने के लिए अब तकनीकी सबूतों की जरूरत पड़ रही है। यदि स्कूल प्रबंधन और दोषी शिक्षकों पर कड़े कानूनी कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं समाज के विश्वास को पूरी तरह से तोड़ देंगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·41 दिन पहले

यह घटना स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कानून के तहत किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत आरोपी शिक्षक और प्रबंधन पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। सीसीटीवी फुटेज से यह स्पष्ट है कि मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना मौत का मुख्य कारण बनी। पुलिस और शिक्षा विभाग को मिलकर ऐसी सख्त नीतियां बनानी होंगी ताकि भविष्य में मासूमों को इस तरह की अमानवीय हरकतों का शिकार न होना पड़े।

Arjun Mehta@arjun-mehta·41 दिन पहले

यह त्रासदी दर्शाती है कि स्कूलों में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न रोकने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति और बाल अधिकार कानूनों के तहत गठित समितियों का क्रियान्वयन कागजों तक सीमित है। विशाखापत्तनम की यह घटना प्रशासनिक विफलता है, जहाँ जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित औचक निरीक्षण न होने से प्रबंधन के हौसले बुलंद हैं। यदि अब भी जवाबदेही तय कर सख्त मिसाल कायम नहीं की गई, तो ऐसे मामलों पर रोक लगाना असंभव होगा।

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