साइबर अपराधियों के एक बड़े वैश्विक गिरोह ने फर्जी क्रिप्टोकरेंसी मुनाफे का झांसा देकर एक भारतीय नागरिक को करोड़ों रुपये का चूना लगाया. आंध्र प्रदेश के मंगलगिरी स्थित सीआईडी पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले की पड़ताल के दौरान जांचकर्ताओं ने ब्लॉकचेन ट्रैकिंग की मदद से करीब 15 करोड़ रुपये यानी 1.5 मिलियन डॉलर की ठगी का सुराग खोज निकाला. जांच एजेंसी ने न केवल इस अंतरमहाद्वीपीय नेटवर्क को बेनकाब किया बल्कि अदालत के जरिए ठगी की पूरी रकम पीड़िता को वापस लौटाने का कानूनी आदेश भी हासिल कर लिया है.
तेनाली से शुरू हुआ फर्जी निवेश का खेल
इस पूरे मामले की शुरुआत तेलंगाना के तेनाली की रहने वाली एक महिला के साथ हुई. ठगों ने अत्यधिक वित्तीय रिटर्न का लालच देकर उसे क्रिप्टोकरेंसी योजनाओं में बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार किया. पीड़िता ने वास्तविक निवेश मानकर अपने निजी बैंक खातों से धन निकाला और उसे 13 अलग-अलग नॉन-कस्टोडियल डिजिटल वॉलेट में भेज दिया. इन डिजिटल वॉलेट्स में रॉबिनहुड का एक वॉलेट और 12 ऑन-चेन वॉलेट शामिल थे. इसके तुरंत बाद जालसाजों के निर्देश पर महिला ने वह सारी क्रिप्टो संपत्ति उनके फर्जी निवेश प्लेटफॉर्मों पर स्थानांतरित कर दी.
तीन प्रमुख डिजिटल टोकन और 27 संदिग्ध लेनदेन
पीड़िता के डिजिटल वॉलेट से फर्जी पोर्टलों पर कुल 27 अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन किए गए. इन सौदों में मुख्य रूप से बिटकॉइन, सोलाना और डॉजकॉइन जैसी प्रचलित डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल हुआ, जिनकी कुल कीमत 1.5 मिलियन डॉलर आंकी गई. जांच में सामने आया कि गिरोह ने इस अवैध धन के वास्तविक स्रोत को मिटाने के लिए कई परतों में लेनदेन किए. धन को कई स्तरों वाले म्यूल खातों से घुमाते हुए केमैन आइलैंड में पंजीकृत क्रिप्टो एक्सचेंज गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन तक पहुंचाया गया था.
ब्लॉकचेन विश्लेषण और न्यायिक कार्रवाई
जांच अधिकारियों ने गहन ब्लॉकचेन विश्लेषण और तकनीकी निगरानी के जरिए डिजिटल नेटवर्क पर इन परिसंपत्तियों के प्रवाह का पीछा किया. पड़ताल में 15 बिटकॉइन लेनदेन सीधे गेट आईओ एक्सचेंज के चार खास खातों से जुड़े पाए गए, जिनका संचालन इस संगठित सिंडिकेट के गुर्गे कर रहे थे. साक्ष्य पुख्ता होने के बाद न्यायिक प्रक्रिया के तहत संबंधित एक्सचेंज के उन चारों खातों में मौजूद संपत्तियों को पूरी तरह फ्रीज करवा दिया गया.
चार देशों में फैले गिरोह के आठ सदस्य गिरफ्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के तकनीकी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय समन्वय से इस सिंडिकेट पर शिकंजा कसा गया. पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. पकड़े गए अपराधियों में दो हैदराबाद, दो महाराष्ट्र, एक मलेशिया, दो चीन और एक पुर्तगाल का नागरिक शामिल है. एजेंसी ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित अदालत में औपचारिक आरोप पत्र भी दायर कर दिया है.
अदालत का फैसला और धन की वापसी प्रक्रिया
गुंटूर की एक सक्षम अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन को स्पष्ट कानूनी आदेश जारी किया है. निर्देश के अनुसार, चिन्हित चारों फ्रीज खातों में जमा क्रिप्टो परिसंपत्तियों को वर्तमान बाजार दर के आधार पर यूएसडीटी में बदला जाएगा. इसके बाद यह पूरी धनराशि सीधे पीड़िता के तयशुदा क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में भेजी जाएगी. इस कानूनी आदेश ने अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी में उलझी संपत्तियों की वसूली के लिए एक नया और कड़ा मानक स्थापित किया है.



















