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विशेष गहन पुनरीक्षण पर शीर्ष अदालत अपने आदेश की समीक्षा करे, वी. गोपाल गौड़ा ने उठाया सवालभारत
9 अक्तू॰ 2026, 5:47 am (1 घंटे पहले)· 0

विशेष गहन पुनरीक्षण पर शीर्ष अदालत अपने आदेश की समीक्षा करे, वी. गोपाल गौड़ा ने उठाया सवाल

पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को बरकरार रखने वाले अदालती आदेश को वापस लेने की मांग उठाई है।

निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही कानूनी व राजनीतिक खींचतान के बीच एक नया रुख सामने आया है। शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने निर्वाचन आयोग की इस कवायद को वैध ठहराने वाले अदालती आदेश को वापस लेने का आग्रह किया है। उनके अनुसार, यह समूची प्रक्रिया पूरी तरह से असंवैधानिक, गैर-कानूनी और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत में इस कवायद को निरस्त करने के लिए पहले से ही कई याचिकाएं लंबित हैं, जिन पर आने वाले समय में सुनवाई होनी है।

प्रक्रियात्मक सहमति और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की मांग

बृहस्पतिवार, 8 अक्टूबर 2026 को दिए गए अपने बयान में वी. गोपाल गौड़ा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय को निर्वाचन आयोग के पास मौजूद सभी आंतरिक फाइलों और मूल दस्तावेजों को अपने पास तलब करना चाहिए। उनका तर्क है कि इन कागजातों के परीक्षण से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि एसआईआर को लागू करने का संकल्प दोनों निर्वाचन आयुक्तों की औपचारिक मंजूरी और सहमति से पारित हुआ था अथवा नहीं। प्रक्रियागत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने इस न्यायिक जांच को अत्यंत अनिवार्य करार दिया।

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सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के बयान और विपक्ष का विरोध प्रदर्शन

यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ठीक उसी दिन 42 सेवानिवृत्त जजों के एक समूह ने एसआईआर के समर्थन में बयान जारी किया था। उस समूह ने इसे पूरी तरह से विधि सम्मत और नियमित कानूनी प्रक्रिया निरूपित किया था। दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल इस मसले पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। विपक्षी खेमा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तक उठा रहा है और इस बाबत न्यायिक हस्तक्षेप की गुहार भी लगा चुका है।

बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) की ओर से मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विरोध में एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। इस सभा को संबोधित करते हुए पूर्व जज ने 27 मई को आए फैसले का हवाला दिया और कहा, “एसआईआर की संवैधानिक वैधता को सही ठहराने वाला उच्चतम न्यायालय का 27 मई का फैसला गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक है, जिसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।”

न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां के रुख का समर्थन

शीर्ष अदालत के मौजूदा न्यायाधीश उज्जल भुइयां ने हाल ही में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने पर सख्त आपत्ति जताई थी। न्यायमूर्ति भुइयां ने रविवार को कहा था कि लाखों नागरिकों को उनके वोट देने के अधिकार से बेदखल करने वाला कोई भी प्रशासनिक कदम हमारे संविधान के मूलभूत ढांचे के खिलाफ है।

पूर्व जज वी. गोपाल गौड़ा ने न्यायमूर्ति भुइयां की इस टिप्पणी का पूरी तरह समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को मताधिकार से वंचित किए जाने जैसी गंभीर विसंगति पर सवाल खड़ा करके मौजूदा न्यायाधीश ने किसी भी तरह की न्यायिक मर्यादा या आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की है।

सवाल-जवाब

पूर्व जज वी. गोपाल गौड़ा ने उच्चतम न्यायालय से क्या मांग की है?
उन्होंने शीर्ष अदालत से निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वैध ठहराने वाले 27 मई के फैसले को वापस लेने और आयोग के सभी दस्तावेज तलब करने की मांग की है।
पूर्व न्यायाधीश ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से गैर-कानूनी, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों का मताधिकार प्रभावित हुआ है।
42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के समूह का इस मामले पर क्या रुख था?
42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के समूह ने विशेष गहन पुनरीक्षण का बचाव करते हुए इसे पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया बताया था।
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने इस मुद्दे पर क्या टिप्पणी की थी?
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां ने कहा था कि लाखों नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी कवायद संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
विपक्षी दल निर्वाचन आयोग को लेकर क्या मांग कर रहे हैं?
कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·12 मिनट पहले

वोटिंग लिस्ट से नाम काटना लोकतंत्र पर सीधा हमला है, इस पर कोर्ट को गंभीरता से सोचना चाहिए।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·12 मिनट पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछले साल जब मेरे अपने गृह नगर में कई पुराने मतदाताओं के नाम सूची से गायब मिले थे, तब बुजुर्गों का दर्द मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·32 मिनट पहले

42 जजों का समर्थन अपनी जगह, पर वोटर लिस्ट से नाम कटना गंभीर मामला है।

Ravikash Gupta@ravikash·32 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। 42 जजों के समर्थन से ज्यादा जरूरी आम लोगों के अधिकार हैं।

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