मानसून सत्र की औपचारिक समाप्ति दर्ज होने के तुरंत बाद उत्तराखंड के पर्वतीय तथा मैदानी हिस्सों में वायुमंडलीय हलचल तेज हो गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने 9 अक्टूबर को देहरादून, नैनीताल तथा पिथौरागढ़ जनपदों के विभिन्न भूभागों में जोरदार वर्षा होने की संभावना जताई है। हिमालय की ऊंची चोटियों पर मौसमी हिमपात की नई परत जमने से पूरे राज्य में सामान्य गुलाबी ठंडक की जगह समय से पहले तीखी ठिठुरन अपने पैर पसारने लगी है। दून घाटी से लेकर तराई के मैदानी इलाकों तक तेज हवाओं, बादलों की भीषण गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम गहरा गया है।
तेज झोंकेदार हवाओं और आकाशीय बिजली की चेतावनी
पहाड़ी ढलानों और संकरे राजमार्गों से गुजरने वाले मुसाफिरों के साथ-साथ घाटी में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने को कहा गया है। मौसम निगरानी तंत्र के अनुसार 9 अक्टूबर को राज्य के समस्त 13 जिलों में कुछ-कुछ स्थानों पर बादलों की भारी गड़गड़ाहट और बिजली चमकने का अंदेशा बना रहेगा। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार धूलभरी आंधी चलने के आसार हैं। वायुमंडल में व्याप्त यह विक्षोभ किसी एक तारीख तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 14 अक्टूबर तक रुक-रुक कर बौछारें और उच्च शिखरों पर हिमपात का यह क्रम बना रहने वाला है।
दून घाटी, ऋषिकेश और मसूरी में बिगड़ेगा मिजाज
देहरादून जिला मुख्यालय, तीर्थनगरी ऋषिकेश और पर्वतीय पर्यटन स्थल मसूरी के आसमान पर 9 अक्टूबर को सघन बादलों का डेरा रहेगा। दून जिले की सीमा में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश का येलो अलर्ट प्रभावी किया गया है। बीते चौबीस घंटों के दौरान भी दून जनपद के देहाती इलाकों में तेज आंधी और तीव्र बौछारों ने असर दिखाया था, जिसके चलते कई बस्तियों में वृक्ष उखड़ गए थे और बिजली की तारों के टूटने से ऊर्जा आपूर्ति घंटों बाधित रही थी। इस बार भी अचानक उठने वाले अंधड़ से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने का खतरा जताया गया है।
कुमाऊं अंचल और सरोवर नगरी में गिरता पारा
नैनीताल जनपद के प्रमुख नगरों जैसे भीमताल, भवाली तथा हल्द्वानी के मैदानी छोर तक 9 अक्टूबर को वायुमंडलीय दशाएं खराब रहेंगी। सरोवर नगरी और इसके करीबी पर्यटक स्थलों में रुकने वाले सैलानियों और स्थानीय निवासियों को खुले में बड़े वृक्षों की ओट में खड़े होने से पूरी तरह बचने को कहा गया है, क्योंकि तेज हवाओं में टहनियों के टूटने का डर बना रहता है। जनपद के ऊंचाई वाले कोनों में चलने वाली सर्द पछुवा हवाओं की वजह से दिन और रात दोनों पहर के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसके चलते बाजारों में अभी से गर्म कपड़ों की मांग एकाएक बढ़ गई है।
पिथौरागढ़ और बागेश्वर की घाटियों में अंधड़ की दस्तक
भारत के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के निचले ढलानों पर तीव्र बरसात की आशंका व्यक्त की गई है। इसी भूभाग के उच्च हिमालयी अंचलों, जैसे मुनस्यारी और धारचूला की 4200 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर स्थित पर्वतमालाओं पर बर्फ की सफेद चादर बिछने की पूरी संभावना है। पिथौरागढ़ के साथ लगते बागेश्वर जिले के नदी घाटी क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से अंधड़ चलने तथा बादलों की बिजली कड़कने का पूर्वानुमान है, जिससे स्थानीय जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
टिहरी और पौड़ी गढ़वाल के कस्बों में अंधड़ का रुख
गढ़वाल मंडल के टिहरी और पौड़ी जनपदों में 9 अक्टूबर को कुछ-कुछ जगहों पर गरज-चमक के बीच हल्की से मध्यम श्रेणी का पानी बरस सकता है। मौसम कार्यालय ने इन दोनों पहाड़ी जिलों के लिए 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और बिजली गिरने की पूर्व सूचना दी है। नई टिहरी, नरेंद्र नगर, कोटद्वार तथा श्रीनगर जैसे प्रमुख कस्बों में बादलों की आवाजाही के दौरान अचानक झोंकेदार तेज हवाएं चलने से दिनचर्या पर असर पड़ेगा।
आगामी दिनों में बर्फबारी और ठंड का फैलाव
उच्च हिमालयी जनपदों उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में 9 अक्टूबर को बादलों की गड़गड़ाहट के साथ पानी बरसने और 4200 मीटर की ऊंचाई पर बर्फबारी के संकेत हैं। अगले दिन यानी 10 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में यह मौसमी तंत्र और अधिक सक्रिय हो जाएगा, जिससे हिमपात की सीमा नीचे खिसककर 3800 मीटर की ऊंचाई तक आ जाएगी। 11 अक्टूबर आते-आते हरिद्वार और उधम सिंह नगर के मैदानी जिलों में आकाश साफ और मौसम शुष्क होने लगेगा, यद्यपि पहाड़ी जनपदों में छिटपुट वर्षा जारी रहेगी। इसके उपरांत 12 और 13 अक्टूबर को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, टिहरी तथा देहरादून में बहुत हल्की से हल्की फुहारें पड़ने और 3800 मीटर की चोटियों पर हिमपात का दौर चलेगा। अंततः 14 अक्टूबर को केवल उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ के सबसे ऊंचे शिखरों पर हल्की बर्फबारी व बारिश के आसार बाकी रह जाएंगे।























