अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान साझा यूरोपीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के सामने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। यह जोड़ी 1.1215 के स्तर के आसपास कारोबार करती दिखी। हालांकि यूरोपीय संघ की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में गहराते कर्ज संकट और राजकोषीय असंतुलन की वजह से मुद्रा के आगे बढ़ने की रफ्तार सीमित रहने की आशंका बनी हुई है। बाजार भागीदार शुक्रवार को ही आने वाले मिशिगन कंज्यूमर सेंटीमेंट इंडेक्स के अक्टूबर आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फ्रांस का राजकोषीय तनाव और डॉलर का दबदबा
यूरोपीय संघ के भीतर राजकोषीय चुनौतियां साझा मुद्रा के लचीलेपन की कड़ी परीक्षा ले रही हैं। मेसिरो करेंसी मैनेजमेंट के वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार यूतो शिनोहारा ने मौजूदा परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यूरो लगातार दबाव का सामना कर रहा है, जिसके चलते यह डॉलर के मुख्य विकल्प के तौर पर अपनी भूमिका पूरी तरह नहीं निभा पा रहा है। फ्रांस में बजट घाटे और उधारी के बढ़ते स्तर ने संस्थागत निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे एकल मुद्रा में आक्रामक खरीदारी देखने को नहीं मिल रही है।
दूसरी ओर, अमेरिका में ब्याज दरों के परिदृश्य में त्वरित बदलाव देखा जा रहा है। सीएमई फेडवॉच टूल के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, फेडरल रिजर्व द्वारा चालू महीने की आगामी बैठक में उधारी लागत में कम से कम 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करने की संभावना घटकर 17.7 प्रतिशत रह गई है। यह आंकड़ा सिर्फ एक हफ्ते पहले लगभग 38 प्रतिशत पर दर्ज किया गया था। हालांकि दिसंबर में होने वाली बैठक को लेकर व्यापारी वर्ग अभी भी अत्यधिक आश्वस्त दिखाई दे रहा है, जहां ब्याज दर वृद्धि की संभावना 83 प्रतिशत आंकी जा रही है।
नीतिगत रुख और बॉन्ड यील्ड का प्रभाव
ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) द्वारा हाल ही में उठाया गया नीतिगत कदम और उसकी आने वाली विस्तृत रिपोर्ट मुद्रा विनिमय दर की मौजूदा दिशा में कोई नाटकीय मोड़ नहीं ला पाएगी। विश्लेषक याद दिलाते हैं कि पिछली नीतिगत बैठक में ईसीबी ने सर्वसम्मति से अपनी नीतिगत दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 2.50 प्रतिशत कर दिया था। उनका आकलन है कि नीतिगत दस्तावेज भविष्य में और बढ़ोतरी के तर्कों को पुष्ट करेंगे, लेकिन बॉन्ड यील्ड में हालिया उछाल को देखते हुए ये संकेत कुछ हद तक पुराने लग सकते हैं।
इधर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीति-निर्माता क्रिस्टोफर वालर ने मौद्रिक सख्ती के पक्ष में कड़ा संदेश दिया है। उनके हालिया संबोधन को नीति विश्लेषकों ने सामान्य मानक 7.2 की तुलना में 8 अंक की आक्रामकता रेटिंग दी है, जो दर्शाता है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को लेकर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। वालर ने कहा कि आगे और बढ़ोतरी की दरकार है, लेकिन कदमों की रफ्तार को लेकर लचीलापन रखा जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लगातार हर बैठक में दरों का बढ़ना अनिवार्य नहीं है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बुनियादी ढांचे के विस्तार और ऊर्जा बाजार के झटकों से उत्पन्न लगातार बनी रहने वाली महंगाई, मजबूत आर्थिक विस्तार और स्थिर श्रम बाजार के चलते फेड को अपनी पाबंदियां बरकरार रखनी पड़ रही हैं। जब तक मुद्रास्फीति की उम्मीदें पूरी तरह काबू में नहीं आतीं, तब तक अमेरिकी डॉलर को व्यापक समर्थन मिलता रहेगा, भले ही केंद्रीय बैंक के आगामी कदम पूरी तरह आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर रहें।
तकनीकी स्तर और चार्ट परिदृश्य
मुद्रा जोड़ी के चार्ट पैटर्न का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि तेजी के मार्ग में पहला तकनीकी प्रतिरोध बॉलिंगर मिडल बैंड सिंपल मूविंग एवरेज के आसपास 1.1360 पर स्थित है। यदि खरीदारी की रफ्तार इस बाधा को पार करती है, तो 100 दिवसीय एसएमए 1.1495 पर और उसके बाद ऊपरी बॉलिंगर बैंड 1.1585 पर अवरोध पेश करेगा।
गिरावट की स्थिति में, 1.1135 पर स्थित निचला बॉलिंगर बैंड शुरुआती सुरक्षा स्तर प्रदान करता है। यदि यह सीमा रेखा टूटती है, तो पहले से जारी मंदी का दौर और गहरा सकता है। इसके अलावा वर्तमान तकनीकी आंकड़ों के अनुसार रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 26 के स्तर पर अत्यधिक बिकवाली क्षेत्र में दिखाई दे रहा है, जबकि एमएसीडी सूचक नकारात्मक रुझान के साथ मंदी का संकेत दे रहा है। अल्पकालिक और दीर्घकालिक मूविंग एवरेज में डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो समग्र दबाव की पुष्टि करता है।
यूरोपीय मुद्रा का वैश्विक कद और व्यापार चक्र
यूरो 20 यूरोपीय देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरो क्षेत्र का गठन करते हैं। वैश्विक वित्तीय तंत्र में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा मानी जाती है। वर्ष 2022 के संकलित आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा।
EUR/USD की जोड़ी दुनिया भर में होने वाले कुल विदेशी मुद्रा कारोबार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले संभालती है। इसके बाद अन्य जोड़ियों में EUR/JPY लगभग 4 प्रतिशत, EUR/GBP करीब 3 प्रतिशत और EUR/AUD लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। फ्रैंकफर्ट स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए मौद्रिक नीति का संचालन करता है, जिसका मुख्य उद्देश्य कीमत स्थिरता बनाए रखना और 2 प्रतिशत के मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करना है। यदि महंगाई लक्ष्य से ऊपर जाती है, तो ईसीबी दरों में वृद्धि करता है, जिससे विदेशी पूंजी आकर्षित होती है और साझा मुद्रा मजबूत बनती है।
जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन की संयुक्त अर्थव्यवस्थाएं यूरोज़ोन की कुल आर्थिक क्षमता का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं। इसलिए इन देशों के सकल घरेलू उत्पाद, पीएमआई आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास सूचकांक मुद्रा की चाल तय करते हैं। इसके साथ ही व्यापार संतुलन के आंकड़े भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। यदि यूरोज़ोन का निर्यात आयात से अधिक रहता है, तो विदेशी खरीदारों की मांग सीधे तौर पर यूरो की क्रय शक्ति में बढ़ोतरी करती है।
अन्य मुद्राओं और जिंस बाजार की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी उठापटक देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.6900 के मध्य स्तर पर स्थिरता तलाशने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रात भर की गिरावट ने डॉलर को 18 महीने के उच्च स्तर से नीचे रखा है, जिससे इस जोड़ी को सीमित सहारा मिला है। फिर भी, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दरें बढ़ाने की कम होती उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को सीमित रखा है।
उधर डॉलर-येन जोड़ी 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर को दोबारा छूने में कामयाब रही है। शुक्रवार को आए घरेलू खर्च के आंकड़ों में लगातार नौवें महीने गिरावट दर्ज की गई, जिसने जापानी येन पर भारी दबाव डाला। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना और सरकारी हस्तक्षेप की आशंका ने येन की गिरावट को एक दायरे में सीमित रखा है।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें लगातार दूसरे दिन हल्की बढ़त के साथ कारोबार करती दिखीं, हालांकि ठोस दिशा के अभाव में पीली धातु पिछले दो हफ्तों के दायरे में ही अटकी रही। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी ने सोने को दो महीने के निचले स्तर से उबरने में मदद की, लेकिन फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख और ईरान से जुड़े जोखिम डॉलर के खरीदारों को सहारा दे रहे हैं, जिससे सोने की तेजी सीमित बनी हुई है।
























