विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतदाता सूची से नाम गायब होने की समस्याओं को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने उन सभी राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है जहां एसआईआर पूरा हो चुका है कि वे गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं की पहचान करें और उन्हें फॉर्म 6 के जरिए दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने में मदद करें। 1 अक्टूबर के इस आधिकारिक निर्देश के तहत प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
बीएलओ करेंगे घर-घर जाकर सर्वेक्षण
आयोग के नए आदेश के अनुसार, बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) संशोधित मतदाता सूची की तुलना पिछले रिकॉर्ड से करेंगे। इसके बाद वे घर-घर जाकर जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण करेंगे ताकि उन पात्र मतदाताओं की पहचान की जा सके जिनके नाम मौजूदा सूची से गायब हो गए हैं। इस पूरी कवायद को लगभग एक महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए काम का स्पष्ट खाका तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक बीएलओ को हर हफ्ते 20 से 25 मतदाताओं का सत्यापन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हालांकि, यह विशेष सत्यापन अभियान पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं पर लागू नहीं होगा जिनकी अपील वर्तमान में अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। चूंकि ये मामले विचाराधीन हैं, इसलिए संबंधित नागरिकों को न्यायाधिकरण की प्रक्रिया के अनुसार ही चलना होगा।
मतदाता सूची में नाम ऑनलाइन जांचने का तरीका
नागरिक निर्वाचन आयोग के आधिकारिक पोर्टल voters.eci.gov.in पर जाकर या वोटर हेल्पलाइन ऐप की मदद से अपना नामांकन विवरण आसानी से देख सकते हैं। पोर्टल पर जाकर मतदाता अपने ईपीआईसी नंबर या अपने व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, पिता का नाम और राज्य दर्ज करके स्थिति जांच सकते हैं।
यदि किसी मतदाता का नाम सूची में दिखाई नहीं देता है, तो उसे अपने मतदान केंद्र के लिए प्रकाशित विलोपन सूची (डिलीशन लिस्ट) की जांच करनी चाहिए, जहां यह उपलब्ध हो। नागरिकों को नाम हटाए जाने के विशिष्ट कारण की पुष्टि करनी चाहिए और नाम दोबारा जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
फॉर्म 6 और फॉर्म 8 का सही उपयोग
जिन पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची से गायब है, वे इसे शामिल करने के लिए फॉर्म 6 भरकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदक निर्वाचन आयोग के पोर्टल या वोटर हेल्पलाइन ऐप के जरिए ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके अलावा, वे अपने क्षेत्र के बीएलओ या निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास भौतिक रूप से भी फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं।
आवेदन के साथ जरूरी सहायक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य है। आवेदन जमा करने के बाद पावती संख्या (एक्नॉलेजमेंट नंबर) को संभालकर रखना चाहिए ताकि ऑनलाइन आवेदन की स्थिति ट्रैक की जा सके। यदि ईआरओ द्वारा सत्यापन या सुनवाई के लिए बुलाया जाता है, तो आवेदक को उसमें उपस्थित होना होगा।
यहां यह समझना आवश्यक है कि फॉर्म 6 केवल नए नाम जोड़ने या गायब नाम को दोबारा शामिल करने के लिए होता है। इसके विपरीत, फॉर्म 8 का उपयोग केवल उन मतदाताओं के विवरण को सुधारने या अपडेट करने के लिए किया जाता है जिनके नाम पहले से मतदाता सूची में मौजूद हैं। फॉर्म 8 के जरिए किसी गायब नाम को सूची में नहीं जोड़ा जा सकता।
अपील प्रक्रिया और चुनावी आंकड़े
यदि किसी मतदाता का आवेदन खारिज कर दिया जाता है, तो उसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत अपील करने का विधिक अधिकार है। पहली अपील निर्णय आने के 15 दिनों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर के समक्ष दायर की जा सकती है। यदि मतदाता उस परिणाम से भी संतुष्ट नहीं होता है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के समक्ष दूसरी अपील कर सकता है। पश्चिम बंगाल के मामले में, जिन लोगों की अपील न्यायाधिकरणों में लंबित है, उन्हें राज्य सीईओ द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना होगा।
निर्वाचन आयोग ने साल में पंजीकरण के लिए चार पात्रता तिथियां निर्धारित की हैं, जो 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर हैं। इससे नागरिक वर्ष के अलग-अलग समय पर आवेदन कर सकते हैं। एसआईआर अभियान के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ है। विपक्ष ने दावा किया है कि 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 13.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। अकेले बिहार में 7.89 करोड़ की सूची में से लगभग 65 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान बाद में लगभग तीन लाख नाम दोबारा जोड़े गए। नागरिकों को आधिकारिक सूचनाओं और राज्य सीईओ की वेबसाइटों पर समय-सीमा देखकर तुरंत आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी गई है।














