विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में अब पुरानी और नई मतदाता सूचियों के व्यापक मिलान की तैयारी शुरू हो चुकी है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पुनरीक्षण से पूर्व वाली सूची और वर्तमान सूची की तुलना करके उन सभी नागरिकों का रिकॉर्ड अलग से तैयार किया जाए जिनके नाम हालिया फेरबदल में कट गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वैध और पात्र भारतीय नागरिक तकनीकी या लिपिकीय भूल के चलते अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए। हाल के दिनों में एसआईआर को लेकर विभिन्न स्तरों पर तीखी बहसें और आपत्तियां सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर यह विस्तृत सुधारात्मक कदम उठाया गया है। आयोग के भीतर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्य संचालन तौर-तरीकों पर निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति की चर्चाएं भी उठी थीं, हालांकि आयोग ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्णय तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।
प्री-एसआईआर और वर्तमान सूचियों की आमने-सामने तुलना
इस विशेष अभियान के अंतर्गत बूथ स्तर अधिकारी यानी बीएलओ सबसे पहले अपने-अपने कार्यक्षेत्र की पूर्ववर्ती सूची और हालिया संशोधित सूची का बारीकी से परीक्षण करेंगे। इस गहन मिलान से उन नागरिकों का एक अलग डेटाबेस तैयार होगा जिनका नाम पुरानी सूची में बाकायदा दर्ज था लेकिन नई सूची में नदारद है। बीएलओ को इस तुलनात्मक सूची में प्रत्येक संबंधित व्यक्ति की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा। यदि जांच के दौरान किसी योग्य व्यक्ति का नाम छूटा हुआ पाया जाता है तो तुरंत फॉर्म 6 भरवाकर उसका ब्योरा दर्ज किया जाएगा। आयोग ने इस पूरी कवायद के लिए समयबद्ध रूपरेखा तैयार की है, जिसमें प्रत्येक बीएलओ को हर सप्ताह कम से कम 20 से 25 मतदाताओं के पते पर पहुंचने का लक्ष्य सौंपा गया है ताकि पूरा अभियान लगभग एक महीने की अवधि में सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित श्रेणियों की दोबारा पड़ताल
मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कई बार लोगों को मृत, अन्यत्र स्थानांतरित या लंबे समय से अनुपस्थित दर्ज कर दिया जाता है। इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं श्रेणियों में दर्ज प्रविष्टियों की जमीनी पड़ताल पर केंद्रित रहेगा। बीएलओ सीधे संबंधित घरों में जाकर यह देखेंगे कि कहीं किसी जीवित या उसी पते पर रह रहे पात्र व्यक्ति को भूलवश मृत या स्थानांतरित मानकर सूची से तो नहीं हटा दिया गया। यदि कोई मतदाता अपने पुराने पते पर ही निवास करता हुआ मिलता है और वह मतदान के सभी नियमों को पूरा करता है, तो मौके पर ही फॉर्म 6 की औपचारिकता पूरी करवाई जाएगी। इस अभियान की प्राथमिकता सूची में वे मामले मुख्य केंद्र बिंदु नहीं हैं जो ट्रिब्यूनल के समक्ष संदिग्ध मतदाता के रूप में पहले से विचाराधीन हैं। प्रशासनिक ध्यान केवल उन वास्तविक नागरिकों पर है जो लिपिकीय चूक के कारण बाहर हुए हैं।
युवा मतदाताओं का पंजीकरण और नए नामों का समावेश
घर-घर जाकर सत्यापन करने के साथ-साथ अधिकारियों को अपने क्षेत्र के उन युवाओं की पहचान करने की जिम्मेदारी भी दी गई है जो हाल ही में मतदान की पात्रता आयु में आए हैं। पहली बार मतदाता बनने के योग्य पाए जाने वाले ऐसे युवक-युवतियों से सीधे फॉर्म 6 भरवाया जाएगा ताकि चुनावी प्रक्रिया में युवाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा अन्य ऐसे पात्र नागरिक भी, जिनका नाम किसी भी कारण से अब तक नहीं जुड़ सका था, इस अभियान के तहत कवर किए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए बूथ स्तर पर विशेष सहायता शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा, जहां नागरिक मौके पर आकर आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जमा कर सकेंगे।
राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझेदारी
प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आयोग ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी इससे जोड़ने का फैसला किया है। बीएलओ द्वारा तैयार की जाने वाली तुलनात्मक और स्थिति-आधारित सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए के साथ साझा की जाएंगी। जब यह जमीनी पड़ताल और सत्यापन अभियान पूरा हो जाएगा, तब प्रत्येक बूथ की अंतिम संकलित सूची भी दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम से राजनीतिक दलों को अपने स्तर पर यह देखने का अवसर मिलेगा कि कोई पात्र नागरिक छूट तो नहीं गया है, और वे भी योग्य मतदाताओं का नाम जुड़वाने में सहयोग कर सकेंगे।
गरीब बस्तियों, रैन बसेरों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष शिविर
जिला निर्वाचन अधिकारियों को समाज के सबसे कमजोर तबकों तक सीधे पहुंचने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि शहरों और कस्बों के रैन बसेरों, रात्रि आश्रय गृहों और श्रमिक बस्तियों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों का मकसद उन गरीब और बेघर लोगों को मतदाता सूची से जोड़ना है जिनके पास स्थायी आवास न होने के कारण अक्सर दस्तावेज संबंधी जटिलताएं आ जाती हैं। इसके साथ ही सामान्य बूथ स्तर के शिविर भी जारी रहेंगे ताकि स्थानीय लोग सहजता से नाम जोड़ने के लिए अपने आवेदन जमा करा सकें।
फॉर्म 6 के नियम और तार्किक विसंगतियों के नोटिस पर कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने प्रपत्रों के उपयोग को लेकर भी नियमों की स्थिति साफ कर दी है। आयोग के अनुसार, घोषणा पत्र के साथ फॉर्म 6 का प्रयोग एसआईआर के चरण के दौरान किया जाना निर्धारित है। एक बार जब किसी क्षेत्र में एसआईआर का चरण पूर्ण हो जाता है, तो उसके बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम 1960 के तहत निर्धारित संबंधित प्रपत्रों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं जिन नागरिकों को अनमैप्ड श्रेणी या तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस मिले हैं, उनके समाधान के लिए बीएलओ स्वयं उनके पते पर जाकर जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज एकत्र करेंगे। इन दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल ईसीआईनेट पर अपलोड किया जाएगा, जिसके आधार पर संबंधित ईआरओ या एईआरओ औपचारिक निर्णय लेंगे।
20 राज्यों में सीईओ और डीईओ स्तर पर सीधी निगरानी
यह व्यापक अभियान उन 20 राज्यों में लागू किया जा रहा है जहां एसआईआर का कार्य पहले ही संपन्न हो चुका है। इस संदर्भ में निर्वाचन आयोग ने सभी 20 राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत दिशा-निर्देश साझा किए हैं। तय व्यवस्था के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक आदेश पारित करेंगे, जो आगे चलकर बीएलओ स्तर तक इसे लागू कराएंगे। यह अभियान किसी औपचारिकता तक सीमित न रहे, इसके लिए आयोग ने स्पष्ट कहा है कि सीईओ और डीईओ स्तर पर इसकी प्रगति की निरंतर और नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि हर एक वास्तविक पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज हो सके।



















