विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र दिवस के विशेष अवसर पर चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन में अपनी बात रखी। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और आधुनिक विश्व मंच पर देश की बढ़ती भागीदारी पर प्रकाश डाला। यह संबोधन भारत के उस व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ता है, जिसके तहत देश की प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्राचीन भारतीय मूल्य और वैश्विक भूमिका
सम्मेलन में विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें और सनातन विचार आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अमृत महोत्सव अभियानों के माध्यम से भारत अपने समृद्ध अतीत की जीवनशैली और वसुधैव कुटुंबकम की भावना को पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का संवाद केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आध्यात्मिक और मानवीय चेतना का समावेश भी देखने को मिलता है।
संयुक्त राष्ट्र दिवस और वैश्विक कूटनीति
संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर हुए इस संबोधन में वैश्विक संस्थाओं के महत्व और उनमें भारत की भागीदारी का उल्लेख किया गया। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय शांति, बहुपक्षवाद और निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की वकालत करता रहा है। इस दौरान सांस्कृतिक संगठनों और वैश्विक निकायों के बीच समन्वय स्थापित करने पर बल दिया गया, ताकि वैश्विक भलाई के लिए एक साझा मंच तैयार किया जा सके।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संबोधन के सामने आने के बाद आम लोगों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के लिए स्थायी सदस्यता और वीटो पावर की मांग को प्रमुखता से उठाने का सुझाव दिया। कुछ उपयोगकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय निकायों के ऐतिहासिक कामकाज और भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर अपनी राय व्यक्त की।


























