रायसीना मिडिल ईस्ट सम्मेलन के दौरान भारतीय टेक जगत के उभरते युवा उद्यमियों और संस्थापकों से एक अहम संवाद देखने को मिला। इस अंतरराष्ट्रीय मंच के इतर हुई इस बैठक में आधुनिक तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में काम कर रहे युवाओं ने अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को साझा किया। वैश्विक स्तर पर तकनीक के क्षेत्र में भारतीय मूल के पेशेवरों और संस्थापकों की बढ़ती भागीदारी के बीच इस तरह के संवाद को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एस जयशंकर ने क्या कहा
इस संवाद के बाद एस जयशंकर ने X पर लिखा कि रायसीना मिडिल ईस्ट के इतर युवा भारतीय टेक उद्यमियों और संस्थापकों से मिलना बेहद दिलचस्प रहा। उन्होंने इस नई पीढ़ी के सोचने के तरीके की सराहना करते हुए कहा कि यह पीढ़ी बड़ा सोचती है और बेहद साहसिक फैसले लेने का माद्दा रखती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीप-टेक स्टार्टअप्स के निर्माण में युवा पीढ़ी सक्रिय रूप से आगे आ रही है।
वैश्विक पटल पर युवा नवोन्मेषकों का प्रभाव
हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और युवा तकनीक विशेषज्ञों का प्रभाव लगातार मजबूत हुआ है। हुरुन की युवा उद्यमियों की सूची हो या वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रहे तकनीकी उत्पाद, कम उम्र के संस्थापक बड़ी कंपनियां खड़ा कर रहे हैं। वैश्विक निवेशक और नीति निर्माता भी इन युवा संस्थापकों के सामर्थ्य को स्वीकार कर रहे हैं, जो जटिल समस्याओं के समाधान के लिए उन्नत तकनीकी समाधान विकसित कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संवाद के सामने आने के बाद आम लोगों और ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई लोगों ने भारतीय युवाओं की वैश्विक उपलब्धियों और बढ़ते आत्मविश्वास का स्वागत करते हुए बेहतर मार्गदर्शन की मांग की, वहीं कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि देश के भीतर प्रशासनिक प्रक्रियाओं और बुनियादी ढांचे को और अधिक सुगम बनाया जाना चाहिए ताकि ऐसी प्रतिभाएं घरेलू स्तर पर ही अपना विस्तार कर सकें।



























