अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लेख साझा करते हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपने पोस्ट में तर्क दिया कि E20 एथेनॉल को लेकर सरकार के दावों में सच्चाई नहीं है। सरकार का यह कहना था कि एथेनॉल मिलाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, लेकिन केजरीवाल ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
एथेनॉल और विदेशी मुद्रा का गणित
केजरीवाल का कहना है कि E20 का फैसला विदेशी मुद्रा बचाने के बजाय अधिक विदेशी मुद्रा बाहर ले जाने का कारण बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नीति से देश को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि आम जनता पर इसका भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उनके अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया आम आदमी के लिए बेहद कष्टकारी साबित हो रही है और इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का पक्ष और स्थिति
दूसरी ओर, सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग व्यापक परीक्षणों और वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित है। हाल ही में, सरकार ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है कि एथेनॉल से पानी की बर्बादी होती है या इंजनों को कोई नुकसान पहुंचता है। आधिकारिक बयानों में यह भी कहा गया है कि यह नीति पूरी तरह सुरक्षित है और इससे वाहन मालिकों के बीमा दावों पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विरोध और जनता की प्रतिक्रिया
इस नीति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्षी खेमे और अन्य आलोचकों का मानना है कि E20 लागू करने से पहले जमीन पर इसकी हकीकत नहीं समझी गई। दावों के अनुसार, करोड़ों पुराने वाहनों की माइलेज घट रही है, जिसका सीधा असर आम मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। विरोध जताने के लिए आंदोलन की योजनाएं भी बन रही हैं, जिसमें रविवार को जंतर मंतर पर धरना देने की घोषणा की गई है। इस पूरे मुद्दे पर जनता में काफी गुस्सा और असमंजस की स्थिति है। सोशल मीडिया पर लोग लगातार सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि क्या एथेनॉल वास्तव में सुरक्षित है और आम नागरिकों के खर्च को बिना किसी ठोस कारण क्यों बढ़ाया जा रहा है।



















