अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट साझा किया है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के अनिवार्य उपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके इस संदेश का मुख्य उद्देश्य जनता को उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को देखने के लिए प्रेरित करना है, जो इस विवादास्पद नीति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है।
वाहनों के इंजन और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं
ईंधन मिश्रण की यह नई व्यवस्था वाहन मालिकों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। मुख्य रूप से पुरानी गाड़ियों के इंजन E20 ईंधन की गुणवत्ता के अनुकूल नहीं हैं। विशेषज्ञों और आम उपयोगकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के मिश्रण से इंजन में जंग लगने, फ्यूल लाइन्स गलने और माइलेज में भारी कमी आने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। देश भर में लगभग 30 करोड़ वाहन हैं, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसी गाड़ियों की है जो E20 के मानकों के साथ नहीं बनाई गई थीं। इन पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए यह ईंधन उनके इंजन के जीवनकाल को सीधे प्रभावित कर रहा है।
विकल्पों की मांग और सरकारी नीति
पब्लिक डोमेन में उठ रही आवाजें यह मांग कर रही हैं कि सरकार पेट्रोल पंपों पर E0 या E10 ईंधन का विकल्प भी उपलब्ध कराए। लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी पसंद और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने की आजादी होनी चाहिए। आलोचकों का तर्क है कि बिना किसी पर्याप्त तैयारी या इंजन अनुकूलन किट के इस नीति को थोपना जनता के साथ अन्याय है। साथ ही, इथेनॉल उत्पादन में पानी की भारी खपत पर भी सवाल उठाए गए हैं, विशेष रूप से गन्ने की खेती के दौरान इस्तेमाल होने वाले जल संसाधनों को लेकर चिंता जताई जा रही है। कई लोगों का तर्क है कि खराब सड़क बुनियादी ढांचे और भारी ट्रैफिक के कारण पहले से ही करोड़ों लीटर ईंधन रोजाना बर्बाद हो रहा है, जिसे रोकने की आवश्यकता अधिक है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर आम जनता ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। ज्यादातर लोग सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं और ईंधन के अन्य विकल्पों की उपलब्धता के लिए दबाव बना रहे हैं, ताकि उनकी गाड़ियां सुरक्षित रह सकें।



















