केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'ग्रामीण ज्ञान सेतु' नामक एक नई डिजिटल पहल की शुरुआत की है। इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में स्थित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पुस्तकालयों को एक डिजिटल नेटवर्क के जरिए आपस में जोड़ना है। इस इंटरलिंक्ड नेटवर्क के माध्यम से गांधीनगर के गांवों और कस्बों में रहने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामान्य पाठकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर विशाल ज्ञान भंडार, आधुनिक अध्ययन सामग्री और डिजिटल संसाधनों तक आसान पहुंच प्राप्त होगी।
गांधीनगर में पुस्तकालय नेटवर्क की व्यापक योजना
गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देने और अध्ययन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए पुस्तकालयों का एक व्यापक तंत्र विकसित किया जा रहा है। 'ग्रामीण ज्ञान सेतु' ऐप के माध्यम से छोटे गांवों के स्थानीय वाचनालयों को शहर के बड़े और समृद्ध पुस्तकालयों के साथ डिजिटल रूप से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उच्च गुणवत्ता वाली किताबें, ई-बुक्स, शोध पत्र और संदर्भ सामग्री अपने ही क्षेत्र में सुलभ हो सकेगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने कहा कि यह कदम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मौजूद डिजिटल खाई को पाटने में निर्णायक साबित होगा।
ग्रामीण विकास और शैक्षिक सशक्तिकरण
शिक्षा और आजीविका के अवसरों में सुधार लाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा विभिन्न ग्रामीण विकास पहलों पर बल दिया जा रहा है। गांवों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और रोजगार व आजीविका गारंटी पहलों को आगे बढ़ाने की दिशा में पुस्तकालयों का यह डिजिटल नेटवर्क एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्ञान के केंद्रों की स्थापना से न केवल साक्षरता दर में सुधार होगा, बल्कि युवाओं को आधुनिक कौशल और करियर संबंधी जानकारी प्राप्त करने में भी सहायता मिलेगी। दूरदराज के क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए सूचना तकनीक का प्रयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण छात्रों को अवसरों की समानता मिल सके।
न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा के बारे में
न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा भारतीय न्यायपालिका की एक प्रमुख और सम्मानित हस्ती रही हैं। वे भारत के उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रह चुकी हैं और उन्हें झारखण्ड उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने का गौरव प्राप्त है। उनके पिता न्यायमूर्ति सतीश चन्द्र मिश्र भी पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर सेवा दे चुके थे। न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा की न्यायिक यात्रा 16 मार्च 1994 को पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति से शुरू हुई थी। इसके बाद 13 जुलाई 2008 को उन्होंने झारखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला। तत्पश्चात उनका स्थानांतरण राजस्थान उच्च न्यायालय में हुआ, जहां उन्होंने 14 वर्षों तक न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दीं। 30 अप्रैल 2010 को उन्हें 4 वर्ष के कार्यकाल के लिए सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
जनता की प्रतिक्रिया
इस नई डिजिटल पहल के शुरू होने के बाद आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिला है। कई लोगों ने गांवों के पुस्तकालयों को डिजिटल रूप से जोड़ने के कदम का स्वागत किया है और इसे छात्रों के लिए उपयोगी बताया है। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक की रोकथाम और देश के सभी राज्यों में एक समान शिक्षा नीति लागू करने को लेकर अपने विचार और प्रश्न व्यक्त किए हैं।



























